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यह कैसी पुलिस:पुलिस घायल बुजुर्ग को न चौकी पुलिस की मदद मिली और न ही समय पर इलाज, नतीजा-मौत

सीकर8 महीने पहले
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  • भीड़ से बचकर आया युवक कहने पर भी जीप में नहीं बैठा तो मामला समझने के बजाय आगे बढ़ गई
  • यह कैसी पुलिस : गश्ती पुलिस भीड़ देखकर भी आगे बढ़ गई, चौकी का दरवाजा बंद कर लिया, शहर के सवाल: आखिर कौन पुलिसकर्मी थे गश्ती वाहन में, चौकी में कौन था

पान की दुकान चलाने वाले बुजुर्ग की हत्या के मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आई है। घटना में युवक के पीछे दौड़ रहे उपद्रवियों का सबसे पहले पुलिस गश्त से सामना हुआ। पुलिस ने उन्हें टोका, लेकिन होहल्ला करने पर पुलिस उन्हें छोड़कर आगे बढ़ गई। भीड़ पुलिस चौकी पहुंचती है। करीब 15 मिनट हंगामे के बाद लौटते वक्त भीड़ बुजुर्ग की दुकान पर पथराव करती है। गश्त कर रही पुलिस और 150 मीटर दूर चौकी का स्टाफ सख्ती दिखाता तो बुजुर्ग की जान बचाई जा सकती थी।

हाल ये है कि 48 घंटे बाद भी पुलिस यह नहीं बता पाई कि गश्त की गाड़ी में कौन पुलिस कर्मी थे। मामले में आईजी एस सेंगाथिर ने एसपी से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। दैनिक भास्कर ने आसपास के सीसीटीवी खंगाले। दुकान पर बुजुर्ग ओमसिंह बैठा था। उसके बेटे रविंद्र का शराब पीकर हंगामा कर रहे कुछ युवकों से विवाद होता है। मारपीट होती है। इस दौरान कच्ची बस्ती की तरफ आए युवक दुकान पर एक-दो पत्थर फेंकते हैं। डर कर रविंद्र राणीसती सर्किल की तरफ चाचा की दुकान के पास पहुंचता है। ये लोग उसे रोकने का प्रयास करते हैं, लेकिन रविंद्र चंदपुरा रोड की तरफ भाग जाता है।

पीछे दौड़ रही भीड़ से बचने के लिए वह वापस चाचा की दुकान के पास पहुंचता है। इसी दौरान पुलिस गश्त की गाड़ी पहुंचती है। पुलिस कर्मी उसे गाड़ी में बैठने के लिए कहते हैं। रविंद्र गाड़ी में बैठने की बजाय पुलिस चौकी तरफ दौड़ता है। पीछे दौड़ रही भीड़ पुलिस कर्मियों से भी उलझने का प्रयास करती है। अगले ही पल पुलिस गश्त की गाड़ी ओमसिंह की दुकान के सामने से होते हुए बहड़ सर्किल की तरफ निकल जाती है। इधर, बुधवार को हिरासत में लिए गए आरोपियों की गिरफ्तारी दिखाते हुए उन्हें कोर्ट में पेश किया। काेर्ट ने आरोपियों काे तीन दिन के पुलिस रिमांड पर साैंपा है।
आईजी ने एसपी से मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट

10.04 : रविंद्र और दुकान के पास खड़े युवकों में विवाद-मारपीट। 10.05 : नट बस्ती से आए कुछ लोग दुकान के पीछे पथराव करते हैं। दुकान की लाइट भी स्पार्किंग करती है। 10.06 : बुजुर्ग का बेटा रविंद्र बचने के लिए राणीसती सर्किल की तरफ दौड़ता है। 10.07 : नट बस्ती से शुरुआत में कुछ लोग आते हैं। जो युवक के पीछे दौड़ती है। एक मिनट बाद और लोग पहुंचते हैं। 10.08 : चंदपुरा जाने वाले कॉर्नर पर गश्त की गाड़ी पहुंचती है। रविंद्र को गाड़ी में बिठाने का प्रयास करती है, लेकिन वह चौकी की तरफ भाग जाता है। 10.09 : भीड़ के हंगामा करने पर गश्त पर आए पुलिस कर्मी रवाना हो जाते हैं। यह गाड़ी ओमसिंह की दुकान के सामने से निकलती है। 10.10 : भीड़ युवक के पीछे दौड़ती हुई चौकी पहुंच जाती है। यहां हंगामा करती रहती है। 10.16 : चौकी की तरफ से भीड़ दौड़ते हुए बुजुर्ग की दुकान की ओर आती है। भीड़ दुकान पर जमकर पथराव करती है। 10.23 : बाइक पर दो पुलिसकर्मी पहुंचते हैं। जो बुजुर्ग की दुकान के राउंड लगाकर वहां रुक जाता हैं। 10.24 : उद्योग नगर की बोलेरो गाड़ी घटनास्थल पहुंचती है। बुजुर्ग को गाड़ी में बिठाकर 10.29 बजे अस्पताल रवाना होती है।

मारपीट के बाद मोबाइल भी छीन ले गए और जाकर साे गए आरोपी
मारपीट के बाद आराेपी जाकर साे गए थे। आरोपी ओम सिंह का माेबाइल भी छीन ले गए। उधाेग नगर थानाधिकारी पवन चाैबे ने बताया कि नामजद हाेते ही पुलिस आराेपियाें के ठिकानाें तक पहुंच गई और साेते हुए काे दबाेच लिया। दाेनाें सगे भाई जीतू और मुकेश काे गिरफ्तार कर लिया। इनके दाेस्त विक्की काे भी पकड़ लिया। परंतु इनका एक साथी हरिया का लड़का है। वह बस्ती में नहीं मिला। मुख्य आराेपी पप्पू के चाेट लगने पर उसकाे एसके अस्पताल से गिरफ्तार कर लिया था।

एक पुलिसकर्मी ये जो पिस्टल से बिना डरे लुटेरे से भिड़ गया
कुछ दिनों पहले सीकर शहर में जयपुर रोड स्थित कैनरा बैंक में एक आरोपी ने खाली पिस्टल के दम पर बैंककर्मियों को बंधक बना लिया था। रुपए भी बैग में भर लिए थे। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची तो आरोपी ने दीवार फांदकर भाग गया। कांस्टेबल दुर्गाराम आरोपी के पीछे रीकाे तिराहे पर पहुंचा। उसके पास पिस्टल भी थी। उसने गोली चलाने की भी धमकी दी। फिर भी कांस्टेबल ने दौड़कर उसको पकड़ लिया। दूसरी तरह चौकी वाले जिन्होंने दरवाजा बंद कर लिया। पीड़ित को बचाने के बजाय पुलिस बाहर तक नहीं निकली।

चौकी प्रभारी घटना के वक्त मौजूद होने का दावा कर रहे हैं, पीड़ित का कहना है कि चौकी में सिर्फ 1 कांस्टेबल था, पुलिस बताए-सच क्या है
मारपीट में रविंद्र व पप्पू के चाेट लग गई। पप्पू के खून निकलता देख इसकी सूचना बच्चे ने नट बस्ती में दी। इस पर पप्पू का भाई जीतू, मुकेश तथा इनके साथ दाे दाेस्त विक्की व हरिया का लड़का वहां पहुंचे और दुकान पर हमला कर दिया। रविंद्र ने बताया कि भीड़ ने उसकाे दाे बार पकड़ लिया था। लेकिन, वह छुड़वाकर भाग गया। मंदिर के गेट बंद होने से वह पुलिस चाैकी पहुंचा।

यहां भी पहले उसकाे घुसने नहीं दिया। वह धक्का मारकर चौकी के कमरे में घुस गया। यहां केवल एक कांस्टेबल हरलाल माैजूद था। चाैकी प्रभारी महेंद्र खाना खाने गए हुए थे। भीड़ चाैकी के अंदर घुसने का प्रयास कर रही थी। कंट्रोल रूम सूचना पहुंची ताे बाइक पर पुलिसकर्मी महेश और पुलिस की गाड़ी पहुंची।

ड्यूटी चार्ट तक नहीं दिखाया : गश्त की गाड़ी में माैजूद पुलिस कर्मियों के बारे में जानकारी मांगी गई एएसआई रामेश्वरलाल और एचएम धनेश ने ड्यूटी चार्ट दिखाने से मना कर दिया। साउथ चाैकी इंचार्ज महेंद्र ने भी कांस्टेबल हरलाल से बात नहीं करने दी। घटना की रात ड्यूटी पर हाेने के बावजूद कल्याण सर्किल चाैकी प्रभारी अनिता मुकर गई।
शादी में ढ़ाेल नगाडे़ बजाते हैं आराेपी : सभी आराेपी शादी व कार्यक्रमाें में ढ़ाेल नगाडे़ बजाने का काम करते हैं। काेर्ट ने आराेपियाें काे तीन दिन के पुलिस रिमांड पर साैंपा है। फरार हुए इनके साथी की तलाश में दबिश दी जा रही है। लोगों के अनुसार मृतक ओमसिंह बेहद शांत स्वभाव का था। लोगों का आरोप है कि शराब ठेके पर अक्सर शराबी उत्पात करते रहते हैं। लेकिन पुलिस बीच-बचाव नहीं करती है।

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