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लोग ताना मारते... तू तो दिव्यांग है, कैसे दौड़ेगी:सहेली और कोच ने हाथ पकड़कर दौड़ाया, 11वीं की छात्रा ने स्टेट-नेशनल में जीते 8 मेडल

सीकर4 महीने पहले

11वीं की स्टूडेंट और बेहतरीन एथलीट पूजा सीमार की दिव्यांगता का लोग मजाक उड़ाते थे। ताना मारते "तू तो दिव्यांग है, कैसी दौड़ेगी", लेकिन पूजा के मन की मजबूती के आगे ये ताने भी छोटे पड़ गए। पूजा ने चुनौतियों का सामना करते हुए स्टेट और नेशनल लेवल पर खेलते हुए कई मेडल जीते हैं। हाल ही में राष्ट्रीय बालिका दिवस पर केंद्र की ओर से वर्चुअल प्रोग्राम हुआ था। देशभर की प्रतिभावान लड़कियों के साथ राजस्थान की ओर से पूजा ने भाग लिया था।

सीकर के खाटूश्यामजी की रहने वाली पूजा ने बताया कि वह दिव्यांग है। 2018 में सीकर के हरदयाल स्कूल में पढ़ती थी। उस दौरान दिव्यांग बच्चों की प्रतियोगिता हुई थी। प्रतियोगिता में दिव्यांग बच्चों को खेलते हुए देखा तो हिम्मत आई। मन में आया कि मैं भी खेल सकती हूं। इसके बाद गांव राजवाली में मिट्टी के धोरों और कच्चे रास्तों पर दौड़ना शुरू कर दिया। मुझे दौड़ता देख लोग मजाक उड़ाते थे। तानों को सुनकर रोना भी आया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। लगातार प्रैक्टिस की और धीरे-धीरे रास्ता आसान हो गया।

एथलीट पूजा ने कई प्रतियोगिता में भाग लेकर गोल्ड और सिल्वर मेडल हासिल किया है।
एथलीट पूजा ने कई प्रतियोगिता में भाग लेकर गोल्ड और सिल्वर मेडल हासिल किया है।

स्टेट लेवल पर खेलने का मौका मिला, तब जूते भी नहीं थे
पूजा ने बताया कि जयपुर में स्टेट लेवल की प्रतियोगिता के लिए 2018 में चयन हुआ। उस समय ढंग के जूते भी नहीं थे। कोच महेश नेहरा ने नए जूते दिलाए,उसके बाद प्रतियोगिता में भाग ले पाई। सहेली सरिता ने भी काफी साथ दिया। हर दिन घंटों तक मेरा हाथ पकड़कर दौड़ने की प्रैक्टिस करवाई। नतीजा 100 मीटर और 400 मीटर में पहले स्थान पर रहकर दो गोल्ड मेडल हासिल किए। इसके बाद नेशनल लेवल की प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर एक गोल्ड मेडल जीता। पूजा के दो भाई-बहन है। पिता सरदार मल और माता चंदा देवी खेती करते हैं। परिवार की आर्थिक हालत भी ठीक नहीं है।

नेशनल खेलने गई तो प्रैक्टिस में चोटिल
कोच महेश नेहरा ने बताया कि पूजा नेशनल खेलने के लिए रायपुर गई थी। मुख्य रेस के पहले प्रैक्टिस के दौरान गिरने से उसे चोट लग गई। इसके बाद भी उसने अपना मनोबल टूटने नहीं दिया और गोल्ड हासिल किया। पटना में भी चोटिल होने के बाद भी गोल्ड मेडल जीता।

2018 में करियर की शुरुआत
पूजा ने अब तक 8 मेडल जीते हैं। 2018 में जयपुर में 9th स्टेट लेवल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप से अपने करियर की शुरुआत की। प्रतियोगिता में दो गोल्ड मेडल जीते थे। इसके बाद 2019 में 10th स्टेट लेवल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप जोधपुर में एक मेडल जीता था। 2020 में रायपुर में 16th नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में तीन गोल्ड मेडल जीते थे। 2021 में 17th नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप पटना में दो गोल्ड मेडल हासिल किए हैं।

खेल के साथ पढ़ाई पर भी फोकस
फिलहाल पूजा 11th क्लास में सीकर के गोकुलपुरा के सरकारी स्कूल में पढ़ रही है। प्रिंसिपल बनवारी लाल ने बताया कि पूजा एथलीट होने के साथ ही पढ़ाई में भी होशियार है। दसवीं क्लास में 78 प्रतिशत अंक हासिल किए थे।

पूजा के कोच महेश नेहरा खुद ने एक हाथ से दिव्यांग होते हुए भी नेशनल स्तर वॉलीबॉल खेला है।
पूजा के कोच महेश नेहरा खुद ने एक हाथ से दिव्यांग होते हुए भी नेशनल स्तर वॉलीबॉल खेला है।

पूजा के कोच भी दिव्यांग
पूजा के कोच महेश नेहरा खुद एक हाथ से दिव्यांग है। उन्होंने एशियन एथलेटिक्स में पंद्रह सौ मीटर रेस में चौथा स्थान प्राप्त किया था। नेशनल स्तर पर वॉलीबॉल भी खेला हुआ है। राज्य का महाराणा प्रताप खेल पुरस्कार भी मिला हुआ है।

नेहरा ने बताया कि पूजा के पिता ने उसकी खेल के प्रति रुचि के बारे में बताया था। उन्होंने करीब 1 महीने तक पूजा को ट्रेनिंग दी। वह लगातार अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में जुटी रही। नेहरा ने कहा कि शारीरिक कमजोरी या स्त्री और पुरुष का भेदभाव कभी भी नहीं करना चाहिए। हमेशा व्यक्ति की प्रतिभा का सम्मान होना चाहिए।

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