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भारत में सूतक मान्य नहीं:आठ को राम-जानकी विवाह, 14 दिसंबर से शुरू हाेगा मलमास, चार ग्रह गोचर का शेयर बाजार पर होगा असर

सीकर2 महीने पहले
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ार दिसंबर को देव पितृ कार्य शनिश्चरी अमावस्या के साथ-साथ खग्रास सूर्य ग्रहण का योग बनेगा। - Dainik Bhaskar
ार दिसंबर को देव पितृ कार्य शनिश्चरी अमावस्या के साथ-साथ खग्रास सूर्य ग्रहण का योग बनेगा।

साल का आखिरी महीने दिसंबर में आकाश मंडल में ग्रह गोचर के बदलाव, त्योहार और पर्व की वजह से खास बन रहा है। ग्रह गोचर में बदलाव की वजह से मौसम में उतार-चढ़ाव रहेगा, इसके साथ ही शेयर मार्केट तथा बाजार में भी प्रभाव दिखेगा। इस माह में मलमास की शुरुआत भी होगी, मलमास में शादी-विवाह जैसे शुभ कार्य प्रतिबंधित रहते हैं। ज्योतिषाचार्य पं. अक्षय गौतम के अनुसार, इस माह में शनिश्चरी अमावस्या, सूर्यग्रहण, रवि उत्तरायण, शिशिर ऋतु का प्रारंभ, क्रिसमस डे के साथ-साथ पार्श्वनाथ जयंती, सरदार पटेल पुण्यतिथि, रामजानकी विवाह उत्सव भी रहेगा।

4 दिसंबर देव पितृ कार्य शनिश्चरी अमावस्या के साथ-साथ खग्रास सूर्य ग्रहण का योग बनेगा, हालांकि यह ग्रहण भारत भूमंडल पर दृश्य न होने के कारण सूतक मान्य नहीं होगा। 8 दिसंबर के दिन श्री राम जानकी विवाह उत्सव मनाया जाएगा। 14 दिसंबर मोक्षदा एकादशी व्रत के साथ-साथ गीता जयंती का पर्व मनाया जाएगा। 25 दिसंबर क्रिसमस डे के साथ-साथ इस दिन से दिनमान में वृद्धि प्रारंभ होने के कारण बड़ा दिन भी माना जाता है।

मलमास शुरू होगा विवाह एक माह तक रहेंगे बंद : 14 दिसंबर सूर्य ग्रह के धनु राशि में प्रवेश करते ही मलमास का प्रारंभ हो जाएगा, शास्त्रों की मान्यता है कि मलमास में विवाह जैसे कई मांगलिक कार्य स्थगित रहते हैं, देव अर्चन एवं लक्ष्मी की आराधना के लिए इस मास को श्रेष्ठ माना जाता है। 14 जनवरी मकर संक्रांति प्रारंभ के साथ ही मलमास समाप्त हो जाएगा।

बुध ग्रह के मकर राशि में प्रवेश करते ही शेयर बाजार में बदलाव
दिसंबर में आकाश मंडल में भी ग्रहों की हलचल विशेष रूप से दिखाई देगी। 16 दिसंबर रात्रि 3.42 बजे सूर्य वृश्चिक से धनु राशि में एक माह के लिए प्रवेश करेंगे। 5 दिसंबर को मंगल ग्रह तुला राशि से वृश्चिक में सुबह 5.57 बजे प्रवेश करेंगे। बुध ग्रह का 10 दिसंबर सुबह 6.05 बजे वृश्चिक राशि से धनु राशि में प्रवेश होगा। अतिचारी होने के कारण यह शीघ्र ही 29 दिसंबर सुबह 11.32 बजे मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे, शुक्र ग्रह 8 दिसंबर दोपहर 2.04 बजे धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे तथा 9 दिसंबर को मकर में वक्री होकर 30 दिसंबर को पुन: सुबह 7.55 बजे धनु राशि में प्रवेश करेंगे, इस तरह से बुध एवं शुक्र ग्रह का दो बार राशि परिवर्तन होगा।

इसके साथ ही वृश्चिक राशि में चतुर्ग्रही योग 4 से 10 दिसंबर तक रहेगा। ग्रहों का इस तरह से गोचर में हलचल का प्रभाव प्रकृति में भी अतिशीघ्र मौसम परिवर्तन का कारण बनेगा। आकस्मिक शीत लहर का प्रकोप, माह के मध्य में मौसम का अनुकूल रहना माह के उत्तरार्ध में मौसम की प्रतिकूलता देखने को मिलेगी। बुध ग्रह का राशि परिवर्तन शेयर मार्केट को प्रभावित करेगा, बुध ग्रह के मकर राशि में प्रवेश करते ही शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की विशेष स्थिति रहेगी। मंगल एवं शुक्र का राशि परिवर्तन का प्रभाव राजनीतिक हलचल के साथ-साथ संक्रमण जैसी बीमारियों का भय देगा।

पूरे साल शनि राजा, गुरु संभालेंगे मंत्री का पद
सीकर | न्याय के देवता शनि का नए साल 2022 में जबरदस्त प्रभाव रहेगा। इसकी 3 वजह हैं। पहली एक जनवरी को नए साल की शुरुआत शनिवार से होगी। दूसरी- संयोगवश 2 अप्रैल को विक्रम नवसंवत्सर 2079 का शुभारंभ भी शनिवार को होगा। तीसरी- शनिदेव अभी अपने स्वामित्व वाली मकर राशि में है। अगले वर्ष 29 अप्रैल को कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। उसके स्वामी भी वे ही हैं। अभी चल रहे विक्रम संवत्सर 2078 का राजा मंगल है, जबकि अगले नवसंवत्सर के राजा शनि व मंत्री बृहस्पति (गुरु) होंगे। 100 साल में 15वीं बार व 10 साल में दूसरी बार नए साल की शुरुआत शनिवार को होगी।

साढ़ेसाती और ढैय्या वाले जातकों को अप्रैल से राहत मिलेगी :
पं अश्वनी मिश्रा के अनुसार जिस वार वर्ष की शुरुआत होती है, उस वार का अधिपति ही वर्ष का राजा होता है। शनि का वर्तमान में और आगामी वर्ष में अपनी ही प्रभाव की राशियों मकर और कुंभ में होना भी उनकी शक्ति में इजाफा करने वाला रहेगा। शनि का प्रभाव उस वक्त और बढ़ जाएगा, जब वे नव संवत्सर प्रारंभ होने पर राजा बन जाएंगे। उनके राजा बनते ही देश में न्याय प्रक्रिया मजबूत होगी और गति पकड़ेगी।

भारत समेत धर्म, अध्यात्म और शिक्षा व संस्कृति क्षेत्रों के लोगों का मान-सम्मान बढ़ेगा। मंत्री बृहस्पति के रहते महिलाओं और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। आय के नए द्वार भी खुलेंगे। अभी इस समय शनि मकर राशि में गोचर हैं, ऐसे में धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। वहीं अगर शनि की ढैय्या की बात करें तो मिथुन और तुला राशि पर ढैय्या का प्रभाव है, इन सभी को अप्रैल से राहत मिलना शुरू होगी। पंडित प्रणब मिश्रा के अनुसार शनि के राजा बनने पर सरकार जन हित में कई बड़े कदम उठाएगी। इसका कारण शनि आम जनता का प्रतिनिधि ग्रह माना जाता है। कब-कब शनिवार को हुई नए साल की शुरुआत: 1921, 27, 38, 44, 49, 55, 66, 72, 77, 83, 94, 2000, 05 व 2011 को शनिवार को नया साल शुरू हुआ।

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