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सिर्फ 36 दिन में मृतक 100 के पार:आज पढ़ें कोरोना से मिले दर्द की कहानियां; ताकि आप इसे महसूस करें और सुरक्षित रहें

सीकरएक महीने पहले
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  • 713 नए रोगी, 21 हजार में से 14000+ ठीक हुए

जिले में गुरुवार को 713 नए कोरोना मरीज मिले। वहीं 489 लोग ठीक भी हो गए। एक्टिव केस अब 7252 पहुंच चुके हैं। कोरोना के बढ़ते प्रकाेप के बीच ये हैं सबसे डरावने आंकड़े और सबसे दर्दभरी कहानियां... जिन्हें न हम फिर कभी लिखना चाहेंगे और न आप पढ़ना चाहेंगे। अप्रैल-मई में मौत का आंकड़ा 100 के पार चला गया। इतनी मौतें पिछले पूरे साल भी नहीं हुई थी।

गुरुवार को सीकर शहर में 149 संक्रमित मिले। फतेहपुर में 70, खंडेला में 60, कूदन क्षेत्र में 78, लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र में 78, नीमकाथाना ब्लॉक में 53, पिपराली क्षेत्र में 124, श्रीमाधोपुर ब्लॉक में 53 और दांता क्षेत्र में 48 नए कोरोना पॉजिटिव आए हैं। कोरोना के दिए हुए घाव कितने गहरे हैं, ये बताने के लिए भास्कर आपको कुछ कहानियाें से रूबरू करा रहा है। जिन्हें पढ़कर आप समझ पाएंगे कि कोरोना आपकी खुशियां किस तरह पलभर में छीन लेता है।

दर्द की कहानियां; 4 दिन में पति-पत्नी की मौत, परिवार से मां-बेटे को छीना

जाेशी परिवार : शादी की वर्षगांठ मनाई, 30 को पति, 3 मई को पत्नी की मौत
कोरोना ने चार दिन के भीतर ही समाजसेवी विजय जोशी (45) और उनकी पत्नी रंजना को लील लिया। विजय ने 6 अप्रैल को अपना जन्मदिन मनाया और 27 अप्रैल को शादी की वर्षगांठ। विजय को 23 अप्रैल को हल्का बुखार आया। जांच रिपोर्ट निगेटिव थी। 28 की दोपहर को विजय ने परिजनों से कहा-मुझे जयपुर ले चलो। 29 को उसे जयपुर के अस्पताल में भर्ती करवाया। 30 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। इसके बाद पत्नी और बड़ी बेटी मानसी पॉजिटिव आई। पति की मौत के सदमे में रंजना की भी 3 मई को मौत हो गई।

जलधारी परिवार : पहली लहर में बेटे ने दम तोड़ा, दूसरी लहर में मां की मौत
जलधारी परिवार की मुस्कराती तस्वीर अब धुंधली पड़ चुकी है। पूर्व विधायक रतन जलधारी ने कोरोनाकाल में पिछले साल अपने बेटे को खोया, फिर दूसरी लहर में पत्नी को। बेटा महेश 12 अगस्त को बीमार हुआ। 22 दिन हॉस्पिटल में भर्ती रहा। सितंबर के पहले सप्ताह में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार पहले सदमे से उबरा भी नहीं था कि परिवार पर कोरोना का दूसरा अटैक हुआ। पिछले दिनों रतन जलधारी की पत्नी नर्बदा देवी बीमार हुई। सोमवार को उन्हें शहर के निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान मौत हो गई।

मूलचंद: 33 साल की उम्र में माता-पिता से बेटा और एक बेटी से पिता छीन लिया
कोरोना अब युवाओं को भी नहीं छोड़ रहा है। इसका उदाहरण हैं खूड़ के पास विजयपुरा गांव के मूलचंद (33)। एक सप्ताह पहले उन्हें हल्का बुखार हुआ। शक हुआ तो परिवार से अलग रहने लगे। सांस लेने में तकलीफ हुई तो ऑक्सीजन का सहारा लेना पड़ा। परिजन मंगलवार को सांवली कोविड सेंटर लेकर पहुंचे, लेकिन वहां वेंटिलेटर नहीं मिला। निजी हॉस्पिटल शिफ्ट करना पड़ा। बुधवार सुबह मूलचंद की मौत हो गई। परिवार में अब माता-पिता, पत्नी और सात साल की बेटी के पास अब सिर्फ मूलचंद की यादें बची है।

मूलचंद: 33 साल की उम्र में माता-पिता से बेटा और एक बेटी से पिता छीन लिया
कोरोना अब युवाओं को भी नहीं छोड़ रहा है। इसका उदाहरण हैं खूड़ के पास विजयपुरा गांव के मूलचंद (33)। एक सप्ताह पहले उन्हें हल्का बुखार हुआ। शक हुआ तो परिवार से अलग रहने लगे। सांस लेने में तकलीफ हुई तो ऑक्सीजन का सहारा लेना पड़ा। परिजन मंगलवार को सांवली कोविड सेंटर लेकर पहुंचे, लेकिन वहां वेंटिलेटर नहीं मिला। निजी हॉस्पिटल शिफ्ट करना पड़ा। बुधवार सुबह मूलचंद की मौत हो गई। परिवार में अब माता-पिता, पत्नी और सात साल की बेटी के पास अब सिर्फ मूलचंद की यादें बची है।

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