अनुकरणीय / भामाशाहों को पीड़ितों की मदद करते देख मजदूरी करने वाले अब्दुल के मन में जज्बा जागा तो अस्पताल को दिया सेफ्टी बूथ

लावारिश पशुओं और पक्षियों लिए रोटी चारे की व्यवस्था कर रहे हैं। लावारिश पशुओं और पक्षियों लिए रोटी चारे की व्यवस्था कर रहे हैं।
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लावारिश पशुओं और पक्षियों लिए रोटी चारे की व्यवस्था कर रहे हैं।लावारिश पशुओं और पक्षियों लिए रोटी चारे की व्यवस्था कर रहे हैं।

  • डॉक्टर बोले- सेफ्टी बूथ से नहीं रहेगा पॉजिटिव के सैंपल लेने में संक्रमण का खतरा

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 05:51 AM IST

रानोली. रानोली निवासी अब्दुल लतीफ ने लॉकडाउन में घर  खर्च कम कर 10 हजार रुपए की बचत की और रानोली के सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों को कोरोना की जांच में काम करने के लिए सेफ्टी बूथ दान किया है। अब्दुल ने बताया कि वह गरीब मजदूर है, लेकिन जब से कोरोना शुरू हुआ तब भामाशाहों को रोज कोरोना वॉरियर्स की मदद करते देखा। इसलिए उसने मन में ठान लिया कि वह भी कुछ करेगा। अब्दुल ने दो महीने में घर खर्च कम कर 10 हजार रुपए इकट्‌ठा किए। ईद पर इस बार खर्चा नहीं किया। बच्चों के लिए भी कपड़े नहीं खरीदे।
ईद के बाद अब्दुल लतीफ ने करीब 10 हजार रुपए की लागत से डॉक्टर्स के काम आने वाला कोरोना सेफ्टी बूथ तैयार कर अस्पताल को दान किया है। डॉ. कमलेश बेनीवाल ने बताया कि यह बूथ कोरोना पाॅजिटिव के सैंपल लेने में बहुत काम आएगा। इसमें बैठकर सैंपल लेने से संक्रमण का खतरा नहीं रहेगा। ग्रामीणों ने अब्दुल लतीफ के कार्य की प्रशंसा की है। बूथ का पूर्व सरपंच विनोद यादव, झाबरमल आर्य, नन्दू साबू, गणपत सैनी, आशीष शर्मा, जगदीश वर्मा,  प्रमोद सैनी आदि ग्रामीणों ने शुभारंभ किया।

पशु-पक्षियों के लिए घर-घर जाकर मांग रहे रोटी-चारा

लॉकडाउन के चलते तीर्थ धाम पर श्रद्धालु नहीं आ रहे हैं। पशु-पक्षियों की भूख से मौत हो रही है। गांव के 20 युवाओं ने ठानी कि कोई भी जानवर भूखा ना रहे। युवा हर घर से सुबह आठ बजे रोटी और दलिया मांग रहे हैं, ताकि जानवर भूख से नहीं मरे और सुरक्षित रहे। युवा लावारिस पशुओं के लिए रोटी-पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। साथ ही अपने-अपने घरों के बाहर पानी का टब एवं चारा रख रहे हैं। मुख्य बस स्टैंड पर भी पानी व चारे की व्यवस्था की गई है। युवा लोगों को भी प्रेरित कर रहे हैं कि जानवरों की भूख और प्यास का ख्याल रखें। गाय, कुत्ते या जीव-जंतु दिखे तो उन्हें रोटी व चावल अवश्य दें। 
अब तक सात सांडों की मौत

गणेश्वर गांव में करीब सात सांडों की मौत हो चुकी हैं। भूख-प्यास से ये जानवर दम तोड़ रहे हैं। अब इनकी देखभाल के लिए युवा आगे आए हैं। हाल ही के 10 दिनों के अंतराल में एक भी पशु नहीं मरा है।

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