पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Sikar
  • Served The Country For 15 Years, Cleared RAS While Living In Navy, After Retiring, Elder Sister Got Preparations Done At Home For Four Months; 57th Rank Made In Ex serviceman Category

15 साल देश सेवा की, अब RAS:नैवी में रहते प्री-क्लीयर किया, रिटायर होते ही बड़ी बहन ने चार महीने घर में ही करवार्ई तैयारी; एक्स सर्विस मैन कैटेगरी में बनाई 57वीं रैंक

सीकर21 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
नैवी का रिटायर्ड अफसर बना RAS - Dainik Bhaskar
नैवी का रिटायर्ड अफसर बना RAS

कई सालों की मेहनत के बाद भी मुफीद परिणाम नहीं मिलते, लेकिन अंकेश की कहानी अलग है। पिता अशोक शर्मा बिजली बोर्ड में लेखाधिकारी थे। इसलिए थोई से परिवार सीकर में ही आ गया। यहां पर अंकेश ने विद्याभारती स्कूल से स्कूलिंग की और नैवी में चयन हो गया। ​

ओपन से कॉलेज की पढ़ाई की। रिटायरमेंट से पहले बहन के कहने पर आरएएस प्री का एग्जाम दिया और बीच जनवरी 2019 में रिटायर हुए, जून 2019 में मैन एग्जाम था। चार म​हीनों के लिए कोई कोचिंग देने वालों ने भी इनकार कर दिया। बड़ी बहन जयपुर में ही केंद्रीय स्कूल में टीचर है। उन्होंने अंकेश को अपने पास रखा और तैयारी के लिए गाइड किया। कल जब परिणाम आया तो अंकेश अपनी बड़ी बहन श्वेता शर्मा का आभार जताते नहीं थक रहा।

नैवी का रिटायर्ड पीटीअफसर बना आरएएस
नैवी का रिटायर्ड पीटीअफसर बना आरएएस

अंकेश ने सीकर में 12वीं साइंस से की थी, नैवी में मद्रास यूनिवर्सिटी से ओपन के जरिए बीए और एमए इकोनॉमिक्स से किया। इस दौरान जयपुर की उमा शर्मा से अंकेश की शादी हो गई। मां का एक एक्सीडेंट में 2010 में ही निधन हो गया था। इसलिए बड़ी बहन श्वेता ही संभालती थी।

अंकेश का कहना है कि पहला प्रयास था। एक बार फिर आरएएस देने की इच्छा है जिससे टॉपर में शामिल हो सकू। नैवी में 15 साल की नौकरी में देशभर में घूम लिया। नैवी से पीटी अफसर से रिटायर होने से पहले सोमालिया के लुटेरों से जहाज को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका पर चीफ एयर कमांडर एक्टिविटी में सम्मानित हो चुके हैं। पत्नी उमा भी बीए बीएड और बडा भाई भी ​प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता है। पांच साल की बेटी और आरएएस के एग्जाम देने के बाद बेटा हुआ है।

आरएएस बने कुलभूषण मिश्रा
आरएएस बने कुलभूषण मिश्रा

25 लाख का पैकेज छोड़कर चुना आरएएस

श्रीमाधोपुर के मूंडरू का रहने वाला कुलभूषण मिश्रा ने आईबीएम कंपनी में 25 लाख रुपए का सालाना पैकेज छोड़कर आरएएस बनने को प्रमुखता दी। मिश्रा सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। आईटीआई खड्गपुर से एमटेक पास आउट कुलभूषण सुखाड़िया यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में एमएससी की है। पहले प्रयास में ही मिश्रा ने 276वीं रैंक हासिल की है। पहले आईएएस का एग्जाम दिया था। लेकिन सफल नहीं हुए तो आरएएस एग्जाम दिया। मिश्रा ने बताया कि वे कम्पनी में अच्छे खासे पैकेज पर थे। लेकिन एडमिनिस्ट्रेशन सर्विस में जाने का सपना था। इसलिए नौकरी छोड़कर तैयारी की। कुलभूषण की मां सुमित्रा देवी दो बार से मूंडरू की सरपंच है। पिता रामजीलाल मिश्रा एडवोकेट है और छोटा भाई आकाश मिश्रा व्याख्याता है।

आरएएस बनने के बाद बाबूलाल जाट
आरएएस बनने के बाद बाबूलाल जाट

पहले देश सेवा फिर प्रशासनिक अधिकारी
श्रीमाधोपुर के खेल गांव डेरावाली के रहने वाले बाबूलाल जाट आरएएस परीक्षा में 19 वीं रैंक लाए है। बाबूलाल जाट बीए प्रथम वर्ष थे तब भारतीय सेना ग्रे​नेडियर में सन् 2000 में भर्ती हुए थे। सेना में 17 साल की नौकरी कर कम्पलसरी रिटायरमैंट लेकर 31 मार्च 2017 को रिटायर हो गए थे। बड़ा भाई शिशुपाल सिंह सरकारी स्कूल में शिक्षक है। उसके पास रहकर ही तैयारी की। रोजाना 7 घंटे पढ़ाई करके एक्स सर्विस मैन में 19वीं रैंक हासिल की। बाबूलाल ने प्राइवेट ही बीए और एमए की डिग्री हासिल की।

कार्तिकेय लाटा
कार्तिकेय लाटा

दूसरे प्रयास में आरएएस बने कार्तिकेय लाटा

खंडेला चौकड़ी गांव के कार्तिकेय लाटा का आरएएस में सलेक्शन हुआ है। कार्तिकेय ने आरएएस में 77वीं रैंक हासिल की है। कार्तिकेय एफसीआई में मैनेजर रहे, इसके बाद उनका चयन एक्सईएन में हुआ, लेकिन उन्होंने जाइन नहीं किया। इस बीच 2016 में आरएएस परीक्षा में 139 वीं रैंक के साथ तहसीलदार बने। कार्तिकेय अजमेर के केकड़ी तहसील में तहसीलदार है। लाटा ने बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग कॉलेज से बीए किया है। 2014 से 18 तक एफसीआई में प्रबंधक पद पर भी कार्य किया था। इस सेवा के उपरांत ही इनका चयन अधिशासी अधिकारी के पद पर भी हुआ था लेकिन जाइन नहीं की।

खबरें और भी हैं...