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प्लाज्मा डोनेशन:जिले में अब तक 4800 से ज्यादा लोग कोरोना को हरा चुके हैं, इनमें करीब 1700 प्लाज्मा डोनेट करने योग्य हैं

सीकरएक महीने पहले
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स्पेशल 26 प्लाज्मा डोनर जिन्होंने 100 बार कोरोना को हराया
  • ये 26 लोग पहले खुद पॉजिटिव से निगेटिव हुए + प्लाज्मा डोनेट कर 74 जिंदगी बचाई
  • सोचिए! 1700 लोग प्लाज्मा डोनेट करते तो क्या तस्वीर होती

सुरेंद्र मावलिया. इस खबर के जरिए दैनिक भास्कर सबसे पहले सीकर के उन सुपरहीरो को सलाम करना चाहता है, जिन्होंने पहले खुद कोरोना वायरस को हराया और अब अपने प्लाज्मा के जरिए दूसरे पॉजिटिव मरीजों को भी नई जिंदगी दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और सुधीर महरिया स्मृति संस्थान के प्रयासों से अब तक कोरोना को हरा चुके जिले के 26 लोग प्लाज्मा डोनेट कर 74 लोगों की जिंदगी बचा चुके हैं। देखा जाए तो ये लोग अब तक 100 बार कोरोना को हरा चुके हैं।

इसके अलावा भी कई लोग अपने स्तर पर सीधे जयपुर या दूसरे शहरों में जाकर प्लाज्मा डोनेट कर चुके हैं, लेेकिन उनका आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। ये आंकड़ा और तस्वीरें उन लोगों के लिए प्रेरक हो सकते हैं कि जो प्लाज्मा डोनेट करने के योग्य हैं, लेकिन अभी तक कर नहीं पाए हैं।

कोरोना के आठ माह में जिले में अब तक 6 हजार से ज्यादा लोग लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। 4800 से ज्यादा रोगी कोरोना को हरा चुके हैं। इनमें करीब 1700 लोग 18 से 50 साल की उम्र के हैं और प्लाज्मा डोनेट करने योग्य हैं।
साेचिए 26 डोनर के प्लाज्मा से 74 लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती हैं तो हर योग्य व्यक्ति प्लाज्मा डोनेट करते तो कितनी बड़ी लड़ाई हम जीत सकते हैं।

एक व्यक्ति के प्लाज्मा से 2-3 लोगों की जान बचाई जा सकती है
मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रघुनाथप्रसाद का कहना है कि व्यक्ति के ब्लड में तीन कंपोनेंट्स रेड ब्लड सेल्स (लाल रक्त कोशिका), प्लेटलेट्स और प्लाज्मा होता है। पूरे शरीर के ब्लड का 55 फीसदी प्लाज्मा होता है। जब मरीज कोरोना से ठीक हो जाता है उसमें एंटीबॉडी बनते हैं, यही एंटीबॉडी दूसरे कोरोना संक्रमित के काम आते हैं। योग्य डोनर से एक बार में 500 एमएल या शरीर फिट होने पर 750 एमएल तक प्लाज़्मा लिया जा सकता है।

मरीज की हालत ज्यादा खराब है तो एक बार में 250 एमएल से ज्यादा से प्लाज़्मा लगाया जा सकता है। आईसीएमआर की गाइड लाइन के मुताबिक 250 एमएल प्लाज़्मा से एंटी बॉडी डवलप हो जाती है। ऐसे में एक व्यक्ति से प्लाज्मा से 2-3 लोगों की जान बचाई जा सकती है। व्यक्ति 15 दिन बाद दोबारा प्लाज्मा डोनेट कर सकता है।प्लाज्मा डोनेशन से खुद की बीमारियों का भी पता चल जाता है

सुधीर महरिया स्मृति संस्थान के बीएल मील ने बताया कि डोनेशन के लिए 24 जांचें होती हैं। जांचों के जरिए डोनर को जानकारी मिल जाती है कि वह किसी दूसरी बीमारी की चपेट में तो नहीं है। हीमाेग्लाेबिन, प्राेटीन की जांच की जाती है। एंटी बाॅडी कार्ड टेस्ट किया जाता है। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, टीबी, कैंसर, एलर्जी की जांच की जाती है।

प्रेरणादायक : बसंत और चरण अब तक 3-3 बार कर चुके हैं प्लाज्मा डोनेट
एमबीबीएस स्टूडेंट चरणसिंह और बसंत टेलर अब तक 3-3 बार प्लाज्मा डोनेट कर चुके हैं। बसंत ने 21 सितंबर, 11 अक्टूबर व 17 अक्टूबर को प्लाज्मा डोनेट किया। इसी तरह चरण सिंह ने 12 सितंबर, 30 सितंबर व 19 अक्टूबर को प्लाज्मा डोनेट किया।
सूरत से सीखिए : इतना डोनेशन कि ब्लड बैंकों को कहना पड़ा अब जरूरत नहीं
गुजरात के सूरत में डाॅक्टर, स्वास्थ्यकर्मी, पुलिसकर्मी, मनपाकर्मी, व्यापारी, किसान, आमजन ने 1600 यूनिट प्लाज्मा डोनेट कर दिया। आखिर में बैंकों को कहना पड़ा कि अब पर्याप्त प्लाज्मा जमा हो चुका है, इसलिए इसकी जगह रक्तदान कीजिए।

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