प्रशासन गांवों के संग अभियान:सैनिकों ने बॉर्डर से भेजी पॉवर ऑफ अटॉर्नी शिविर में तीन पीढ़ी के बाद खुला नामांतरण

सीकर2 महीने पहले
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प्रशासन गांवों के संग अभियान में राजस्व के लंबित मामलों में बड़े स्तर पर आमजन को राहत मिल रही है। भारत-चीन, कच्छ बॉर्डर और भारत-पाक बॉर्डर पर तैनात कंवर का नांगल निवासी एक ही परिवार के तीन सैनिकों द्वारा परिवारजनों के नाम भेजी गई पॉवर ऑफ अटॉर्नी से तीन पीढ़ियों से अटका जमीन बंटवारे का मामला चंद मिनटों में सुलझ गया।

ग्राम कंवर का नांगल के स्व. रामनाथ गुर्जर के कुल 35 वारिस हैं। इनमें से दो पौते व एक पड़पोता भारतीय सेना में पदस्थापित हैं। पटवारी स्यालोदड़ा ने उनसे समझाइश करने पर परिवार के सभी लोग जमीन बंटवारे के लिए तैयार हो गए, लेकिन सैनिकों के हस्ताक्षर नहीं हो पाने के कारण मामला अटका हुआ था। नीमकाथाना एसडीएम बृजेश गुप्ता ने मामले को गंभीरता से लेते हुए समाधान की तैयारी की।

उन्होंने सैनिकों को विकल्प दिया कि वे तैनाती स्थल से परिवार के किसी नजदीकी व्यक्ति के नाम पॉवर ऑफ अटॉर्नी भेजकर बंटवारा करवा सकते हैं। इसके बाद भारत -चीन सीमा से सैनिक राजेश गुर्जर, कच्छ की खाड़ी से शंकरलाल गुर्जर और भारत-पाक बॉर्डर से विक्रम गुर्जर ने परिवारजनों के नाम पॉवर ऑफ अटॉर्नी की।

परिजनों ने इसे प्रशासन शहरों के संग अभियान में अफसरों के सामने पेश किया। इससे तीन पीढ़ियों से चली आ रही संयुक्त जमीन का बंटवारा हुआ। शिविर में नीमकाथाना विधायक सुरेश मोदी व शिविर प्रभारी ने स्वर्गीय रामनाथ गुर्जर के वारिसों को मौके पर ही जमाबंदी सौंपी। विधायक ने इस खाता विभाजन को प्रेरणा स्त्रोत बताया।

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