NOतपा, मौसम में 25 फीसदी नमी बढ़ी:36.7 डिग्री से शुरुआत, पिछले साल से 3.70 कम, दो दिन बाद बारिश की उम्मीद

सीकरएक महीने पहले
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बुधवार को छाए रहे बादल। - Dainik Bhaskar
बुधवार को छाए रहे बादल।
  • अंधड़ व बारिश से

इस बार नौतपा की शुरुआत कमजोर रही। नौतपा के पहले रोज बुधवार को मौसम में 25 फीसदी नमी होने से धूप का असर कम रहा। इससे पहले लगातार तीन दिन तक चक्रवाती हवाओं के दबाव से मंगलवार तक अंधड़ के साथ ओलावृष्टि और बारिश हुई। इससे मौसम में नमी बढ़ गई। नतीजा नौतपा अपना असर नहीं दिखा पाया। आमतौर पर नौतपा में पारा 43 डिग्री से ज्यादा रहता है। अगले दो दिन मौसम सामान्य रहेगा। इसके बाद 28 मई से धूलभरी हवा चल सकती है।

बुधवार को हल्के बादलों की आवाजाही के बीच मौसम सामान्य बना रहा। हवा की रफ्तार धीमी रही। वहीं नमी के कारण लू से निजात रही। फतेहपुर कृषि अनुसंधान केंद्र पर बुधवार को अधिकतम तापमान में 2.2 डिग्री की बढ़ोतरी हुई। फतेहपुर कृषि अनुसंधान केंद्र पर बुधवार को अधिकतम 36.7 व न्यूनतम तापमान 21.7 डिग्री रहा। मंगलवार काे अधिकतम 34.5 व न्यूनतम तापमान 17.8 डिग्री दर्ज किया गया था।

पारा औसत से 60 नीचे, इसलिए हीटवेव से निजात

मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि थंडर स्टॉर्म एक्टिविटी के कारण दो दिन पहले अंधड़ के साथ ओले और बारिश हुई। इससे मौसम में नमी काफी बढ़ गई। फिलहाल तापमान औसत (43 डिग्री) से काफी नीचे चल रहा है। दो-तीन दिन में तापमान 40 से 42 डिग्री तक पहुंच जाएगा। लेकिन पिछले सप्ताह जैसी हीट वेव नहीं चलेगी।

प्री-मानसून से पहले क्षेत्र विशेष में चक्रवात सक्रिय होने और तापमान में कमी से मानसून प्रभावित नहीं होता है। क्योंकि मानसून बड़े स्तर पर एक्टिव होता है। इसलिए लोकल चक्रवाती घटनाओं से यह प्रभावित नहीं होता है। हालांकि दो दिन बाद प्रदेश के कुछ इलाकों में अंधड़ के साथ बारिश हो सकती है।

6 दिन का तापमान

20 मई 45.5 21 मई 40.0 22 मई 41.5 23 मई 36.5 24 मई 34.5 25 मई 36.7

नौतपा में कम हो जाती है सूर्य से पृथ्वी की दूरी
ज्योतिषियों के अनुसार बुधवार को ज्येष्ठ कृष्ण दशमी पर सूर्य रोहिणी नक्षत्र में आने के साथ ही नौतपा की शुरुआत हो गई। नौतपा के 9 दिन तक धरती से सूर्य की दूरी कम हो जाती है। इससे तापमान में वृद्धि होती है और झुलसा देने वाली गर्मी का असर बढ़ जाता है। इस दौरान अगर धरती अच्छे से तपती है तो मानसून अच्छा रहने की संभावना होती है। इस बीच अगर आंधी-बारिश होती है तो आशंका रहती है
कि मानसून में बारिश कम होगी। उन्होंने बताया कि आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और आश्विन इन चार महीनों को मानसून सीजन माना जाता है।

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