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काउंसलिंग में खुलासा:टीवी-मोबाइल ज्यादा देखने व दोस्तों से न मिल पाने से बढ़ा तनाव, डेढ़ साल में घर से भाग गए 202 बच्चे

सीकर3 महीने पहले
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काउंसलर और मोटिवेटर प्रमिला सिंह का कहना है कि कोरोनाकाल में लॉकडाउन के कारण कई बच्चों के पेरेंट्स की नौकरी चली गई। परिवार में माहौल तनावपूर्ण हो गया। - Dainik Bhaskar
काउंसलर और मोटिवेटर प्रमिला सिंह का कहना है कि कोरोनाकाल में लॉकडाउन के कारण कई बच्चों के पेरेंट्स की नौकरी चली गई। परिवार में माहौल तनावपूर्ण हो गया।
  • घर से भागी 3 नाबालिग दुष्कर्म का शिकार हो गई, पुलिस ने अब तक 181 बच्चों को ढूंढा

कोरोनाकाल में बच्चोें का मानसिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। यह खुलासा डेढ़ साल के दौरान घर से भागे बच्चों की काउंसलिंग में हुआ है। डेढ़ साल के दौरान 202 बच्चे घर से भाग गए। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 20 अप्रैल 2021 से अब तक केवल दो महीने के दौरान घर से भागी 24 नाबालिग बालिकाएं दस्तयाब की जा चुकी हैं।

इनमें 3 नाबालिग दुष्कर्म का शिकार भी हो गईं। बाल कल्याण समिति के सदस्य गिरवर सिंह झाझड़ ने बताया कि उनके सामने पेश हुई बालिकाओं की काउंसलिंग की गई तो ज्यादातर के भागने की वजह घर में कैद रहना, पढ़ाई और सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव सामने आया है।

पुलिस की मानव तस्करी यूनिट से मिली जानकारी के अनुसार 2020 में 134 गुमशुदा बच्चों के मामले सामने आए थे। इनमें 126 का निस्तारण कर दिया गया। इधर, 2021 में जनवरी से अब तक दर्ज हुए 68 मामलों में से 55 में नाबालिगों को दस्तायब कर घरवालों को सौंपा जा चुका है। ज्यादातर मामलों में बालक-बालिकाओं की उम्र 8 साल से लेकर 17 साल के बीच है।

एक्सपर्ट व्यू : बच्चों में तनाव बढ़ने के ये 5 प्रमुख कारण

टीवी, मोबाइल : शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मदन सिंह फगेड़िया ने बताया कि लॉकडाउन में टीवी और मोबाइल के ज्यादा उपयोग से बच्चों की मनोस्थिति में बदलाव आया। धीरे-धीरे चिंता का स्तर भी बढ़ता चला गया। इसी तनाव में घर से भागने का कदम उठा सकते हैं।
दोस्तों से न मिल पाना : मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. विक्रम बगड़िया का कहना है कि लॉकडाउन के कारण बच्चों को बाहर खेलने की इजाजत नहीं मिली। दोस्तों से नहीं मिल पाना भी मानसिक स्थिति बिगड़ने का प्रमुख कारण रहा। पेरेंट्स का टोकना भी बच्चों को अखरने लगा।
ऑनलाइन फ्रेंडशिप : मानव तस्करी यूनिट की इंचार्ज बिमला बुडानिया के अनुसार सोशल मीडिया पर कई नाबालिग बच्चियां ऑनलाइन फ्रेंडशिप के चक्कर में पड़ गई। किसी लड़के के बहकावे में आकर घर से भागने का कदम उठा सकती हैं।
पेरेंट्स मोटिवेट नहीं कर पाए : उद्योग नगर थाने की महिला डेस्क प्रभारी भगवानी का कहना है कि कोरोना की वजह से घर में ही रहने से बच्चाें में अकेलापन बढ़ा। इससे कई बच्चे चिड़चिड़े हो गए। पेरेंट्स भी उन्हें प्रॉपर तरीके से गाइड और मोटिवेट नहीं कर पाए।
पेरेंट्स का रोजगार छिनना : काउंसलर और मोटिवेटर प्रमिला सिंह का कहना है कि कोरोनाकाल में लॉकडाउन के कारण कई बच्चों के पेरेंट्स की नौकरी चली गई। परिवार में माहौल तनावपूर्ण हो गया। बच्चों को मिलने वाली सुविधा कम हो गई। इसी तनाव में बच्चे घर से भागने जैसा गलत कदम उठा लेते हैं।