दवा मिली न इलाज:इसलिए 20 हजार गायों को बचाने के लिए पशुपालकों ने खुद खर्च किए 10 करोड़

सीकर14 दिन पहलेलेखक: सुरेंद्र चिराना
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लंपी संक्रमण का असर जिले में कम नहीं हो रहा है। सरकार और पशुपालन विभाग का दावा है कि बीमार गोवंश और प्रभावित किसान पशुपालकों तक हरसंभव मदद पहुंचाई जा रही है। इस दावे का सच जानने के लिए भास्कर ने रविवार को जिलेभर से ग्राउंड रिपोर्ट की। इसमें पशुपालकों का भयावह दर्द सामने आया। पशुपालकों का कहना है कि पशु चिकित्सा केंद्रों पर दवा और डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं।

अपनी जेब से रुपए खर्च करके बीमार दुधारू गायों का इलाज करवाया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। हालांकि पशुपालन विभाग का दावा है कि हमने 50 लाख रुपए दवा सप्लाई की है। जबकि, ग्राउंड रिपाेर्ट के अनुसार जिले में 30 हजार से ज्यादा गाेवंश की लंपी से माैत हाे चुकी है।

उनमें 10 हजार से ज्यादा पशुपालकाें का दुधारू गाेवंश है। 10 हजार से ज्यादा दुधारू गाेवंश ऐसा है, जिसका पशुपालकाें ने अपने स्तर पर उपचार कराया। खंडेला बावड़ी के देवीलाल, गाेगराज व झाबरसिंह शेखावत का कहना कि सरकारी सेंटराें पर उपचार नहीं मिल रहा है।

इन पशुपालकों की दर्दनाक कहानियों से जानिए सरकारी दावे का सच

श्यामलाल फरडाेलिया, सुंदरपुरा
सरकारी सेंटर से दवा नहीं मिली ताे दाे गायाें के उपचार पर 12 हजार खर्च किए, दाेनाें की माैत : पलसाना क्षेत्र के सुंदरपुरा निवासी श्यामलाल फरडाेलिया का कहना कि एक माह में उनकी दाे गायाें काे लंपी हुअा। पलसाना के राजकीय पशुचिकित्सा केंद्र पर उपचार नहीं मिला ताे निजी पर गया। 12 हजार से ज्यादा खर्च हुए। दाेनाें की माैत हाे चुकी है। माैत के बाद भी प्रशासन की तरफ से किसी ने खैर खबर नहीं ली है।

नरेश ढाका, नेतड़वास
सरकारी डाॅक्टर नहीं आया ताे सात हजार में निजी से उपचार कराया, कोई सरकारी कर्मचारी नहीं पहुंचा : धाेद क्षेत्र के नेतड़वास निवासी नरेश ढाका का कहना कि एक माह में उसकी तीन गाय लंपी से बीमार हुई। नेतड़वास के सरकारी सेंटर पर उपचार नहीं मिला ताे उसने निजी स्तर पर तीनाें का उपचार कराया। तीनाें के उपचार पर 7 हजार से ज्यादा खर्च हुए। उनमें दाे की माैत हाे चुकी है। एक गाय तड़प रही है। 10 दिन में ना पशुपालन विभाग पहुंचा और न ही पटवारी व ग्राम विकास अधिकारी ने हालात देखे।

झाबर बाजिया, दूधवा
एक माह में चार गायों की मौत, बचाने के लिए खुद ने खर्च किए थे 11 हजार रुपए : दांतारामगढ़ क्षेत्र के दूधवा रामपुरा निवासी झाबर बाजिया का कहना कि एक माह में लंपी से उसकी 4 गायाें की माैत हाे चुकी है। सरकारी सेंटर से उपचार नहीं मिला ताे उसने चाराें गायाें का निजी स्तर पर उपचार कराया। 11 हजार से ज्यादा खर्च हुए। परिवार में बजरंगलाल व संजीव के एक-एक तथा छीतरमल की दाे गायाें की माैत हाे गई है।

गिरधारी सिंह, शिवभजनपुरा
सरकारी सेंटर से दवा नहीं होने की कहकर लौटा दिया, दाे गायाें के उपचार पर 16 हजार खर्च किए, बची नहीं : शिवभजनपुरा निवासी गिरधारी सिंह का कहना कि लंपी से उसकी दाे गायाें की माैत हाे गई। दाेनाें के उपचार के लिए वह क्षेत्र के सरकारी सेंटर पर गया। पशुचिकित्सा कर्मी ने उसे दवा नहीं हाेने की बात कहकर लाैटा दिया। उसने दाेनाें गायाें का निजी स्तर पर उपचार भी कराया। उपचार पर 16 हजार से ज्यादा खर्च हुए। अब दाेनाें की माैत हाे चुकी है। गायाें की माैत के बाद भी प्रशासन की तरफ से काेई सूचना नहीं ली है।

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