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राजस्थान में सोना तस्करों का खुलासा:सर्राफा व्यापारी ने तस्करों से ही खरीदा था सवा 2 किलो सोना, करीब एक किलो बेच भी दिया

सीकर2 महीने पहले
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सर्राफा व्यापारी के यहां कार्रवाई करते पुलिसकर्मी।
  • 4 दिन पहले सीकर में सर्राफा व्यापारी के यहां मारा था छापा, जयपुर एयरपोर्ट पर पिछले माह पकड़े गए 32 किलो सोने से जुड़े सीकर के तार
  • सोने की प्रीमियम क्वालिटी पर टिका है तस्करी का पूरा खेल, छोटे सर्राफा व्यापारियों के जरिए बाजार में खपाया जाता है

कस्टम विभाग की ओर से चार दिन पहले सीकर में की गई कार्रवाई में सर्राफा व्यापारी ने तस्करी का सोना खरीदने की बात कबूल कर ली। उसने स्वीकार किया कि 48 लाख रुपए की नगदी भी तस्करी का सोना बेचने के बदले ही मिली थी। कस्टम विभाग द्वारा आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया। उल्लेखनीय है कि चार दिन पहले कस्टम विभाग की टीम ने घंटाघर स्थित चंपालाल कैलाशचंद सोनी के यहां छापामार कार्रवाई की थी।

16 घंटे की कार्रवाई में टीम ने व्यापारी से एक किलो 200 ग्राम सोना और 48 लाख रुपए की नगदी पकड़ी। व्यापारी इसका कोई हिसाब नहीं दे पाया। पूछताछ में तस्करों से सोने के लेन-देन का खुलासा किया। अब विभाग की जांच में इनसे जुड़े अन्य सोना तस्कर और गोल्ड खरीदने वाले व्यापारियों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन के दौरान कस्टम विभाग ने जयपुर एयरपोर्ट पर दुबई से आई फ्लाइट में 16 करोड़ रुपये का सोना पकड़ा। जांच में 32 किलो सोना मिला। सोने के साथ पकड़े गए लोग शेखावाटी के थे। पूछताछ में सीकर, चूरू, झुंझुनूं के लोगों को सोने की डिलीवरी देना बताया। कस्टम विभाग लगातार मामले की जांच कर रहा था।

सोने के भावों में तेजी या रुपए-डॉलर की कीमत में ज्यादा बदलाव के साथ ही सोने की तस्करी बढ़ जाती है। लॉकडाउन में वंदे भारत मिशन की स्पेशल विमान सेवा शुरू होने के साथ ही सोना तस्कर सक्रिय हो गए। क्योंकि तस्करी का पूरा खेल सोने की प्रीमियम क्वालिटी (99.99) पर टिका है। यह शुद्धता ही तस्करों को 25 फीसदी से ऊपर तक की काली कमाई करवाती है।

शेखावाटी में सोना तस्करी गिरोह से जुड़े लोग बड़े स्तर पर सक्रिय है। क्योंकि यहां से बड़ी संख्या में तस्करों तक पहुंचने के लिए कस्टम विभाग की टीम ने चार दिन पहले सीकर में सर्राफा व्यापारी पर कार्रवाई की। मामले में 50 लाख रुपए नगद और सवा किलो सोने का हिसाब नहीं मिला। सोना तस्करी पर दैनिक भास्कर ने ग्राउंड रिसर्च किया।

सामने आया कि शेखावाटी से बड़ी संख्या में लोग सोना तस्करी से जुड़े हैं। सीकर, चूरू व झुंझुनूं से बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों मजदूरी के लिए जाते हैं। सोना तस्करी का काम इन्हीं मजदूरों के जरिए होता है। उल्लेखनीय है कि 4 जुलाई को जयपुर एयरपोर्ट पर तस्करी कर लाया गया 32 किलो सोना पकड़ा गया था। इस मामले में पकड़े गए 14 सभी यात्री शेखावाटी से जुड़े हैं।

तस्करी के सोने पर 25% की काली कमाई का गणित

1 मिलावट के बाद तैयार होते हैं नए बिस्किट : खाड़ी देशों से आने वाला सोना 99.99% शुद्ध होता है। उसमें दो से ढाई फीसदी की मिलावट कर 98 फीसदी पर सोने के नए बिस्किट तैयार किए जाते हैं। हालांकि बाजार में इसे 99.99 से ही बेचा जाता है।
2 12.5% इम्पोर्ट ड्यूटी की चोरी : विदेश से सोना लाने पर 12.5% की इंपोर्ट ड्यूटी लगती है। लेकिन चोरी-छुप्पे सोना लाने वाले इस इंपोर्ट ड्यूटी की चोरी करते हैं। यह पैसा भी इनकी काली कमाई का हिस्सा बनता है।
3 बाजार में बेचने के दौरान जीएसटी की चोरी : तस्करी के जरिए लाया गया सोना गांवों व छोटे कस्बों के व्यापारियों के जरिए बाजार में खपाया जाता है। सोने पर लगने वाली 3% जीएसटी बेचने-खरीदारी करने वाले में बंट जाती है।
4 डॉलर और रुपए की कीमत का खेल : सोने के भाव अंतरराष्ट्रीय मार्केट पर तय होते हैं। यानी डॉलर के जरिए सोने का भुगतान होता है। रुपए और डॉलर में ज्यादा उतार चढ़ाव होने पर विदेशों से खरीदे गए सोने के भाव भारत में बढ़ जाते हैं।

गांवों से जुड़ा हुआ है सोना तस्करी का नेटवर्क

  • सोना तस्करी से जुड़े लोग विदेश में सोने की खरीद करते हैं। उसे पिघलाकर बीज के आकार के चिप्स बना खजूर में छिपाने, बेल्ट का बकल बनाकर, टाेर्च सहित अलग-अलग रूपों में ढालकर सामान में छिपा कर लाया जाता है।
  • सीकर शहर, फतेहपुर, नीमकाथाना, दांतारामगढ़, नागौर, कुचामन, चूरू व झुंझुनूं से बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों में मजदूरी करते हैं। वापसी पर इन्हें टिकट व कुछ पैसा का लालच देकर गिरोह के लोग सोना तस्करी के लिए तैयार कर लेते हैं। यहां गिरोह के लोग सोने की डिलीवरी ले लेते हैं।
  • तस्करी का सोना गांवों और कस्बों के सर्राफा व्यापारियों तक पहुंचता है। क्योंकि सीधे बाजार में इन्हें कीमत पूरी नहीं मिलती है, दूसरा कार्रवाई भी डर होता है। इसलिए बड़े व्यापारियों की बजाय छोटे सराफा कारोबारियों को बेचते हैं।
  • आज भी 60% आबादी गांवाें बसती है। ऐसे में ज्यादात्तर ग्रामीण आस-पास के सर्राफ कारोबारी से ही गहने बनवाते हैं। यहां तस्करी का सोना आसानी से खपाया जा सकता है। व्यापारी पंजीकृत नहीं होने के कारण बिल व जीएसटी का झंझट नहीं रहता।

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