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बेटे के गम में परिवार ने किया था सुसाइड:एक चिता पर पति-पत्नी, दूसरी पर दोनों बेटियों का अंतिम संस्कार; बूढ़ी मां बहू का नाम लेकर कहती रही- तारा ये तूने क्या कर दिया?

सीकर2 महीने पहले
घर से जब चारों अर्थी उठी तो हर आंख रो पड़ी। सबके मन में एक ही सवाल था कि आखिर हनुमान ने ऐसा क्यों किया?

सीकर में रविवार को एक परिवार के 4 लोगों ने सामूहिक सुसाइड कर लिया था। सोमवार को दो चिताओं पर परिवार के चारों सदस्यों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। एक चिता पर पति-पत्नी जबकि दूसरी पर एक साथ दोनों बेटियों का अंतिम संस्कार किया। मुखाग्नि के वक्त बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। नम आंखों से सब इस बात को समझने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर हनुमान और उसकी पत्नी तारा ने ऐसा क्यों किया? क्या बेटे का गम इतना गहरा था कि दो जवान बेटियों तक की फिक्र नहीं की। वहां मौजूद हर कोई यह कह रहा था कि हनुमान को थोड़ा तो साहस दिखाना चाहिए था। कम से कम अपने बूढ़े पिता के बारे में तो सोचा होता।

रविवार को पुरोहित जी ढाणी इलाके में रहने वाले 48 साल के हनुमान प्रसाद सैनी अपनी पत्नी 45 साल की तारा, 2 बेटियों पूजा और अन्नू के साथ घर में फंदे पर लटके मिले। हनुमान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद दिवंगत मदनलाल सैनी के भतीजे थे। वह सरकारी स्कूल में फोर्थ क्लास कर्मचारी थे। पत्नी हाउस वाइफ थीं। 24 साल की पूजा MSc फर्स्ट ईयर और 22 साल की चीकू BSc सेकंड ईयर में पढ़ती थीं।

हनुमान प्रसाद सैनी (रेड शर्ट) सरकारी स्कूल में काम करते थे। दोनों बेटियां पढ़ाई कर रही थीं और पत्नी हाउसवाइफ थीं (इनसेट में)। -फाइल फोटो
हनुमान प्रसाद सैनी (रेड शर्ट) सरकारी स्कूल में काम करते थे। दोनों बेटियां पढ़ाई कर रही थीं और पत्नी हाउसवाइफ थीं (इनसेट में)। -फाइल फोटो

पूरी खबर यहां पढ़िए: इकलौते बेटे की मौत के 4 महीने बाद पति-पत्नी ने 2 बेटियों के साथ फांसी लगाई; लिखा- उसके बिना नहीं जी सकते

रो-रोकर पथरा गई बूढ़ी मां की आंखें
उधर, घर पर हनुमान की 70 साल की बुजुर्ग मां हैं। महिलाएं उन्हें घेरकर बैठी हैं। रात भर रोते-रोते उनकी आंखें पथरा गई हैं। वह रोती हैं, फिर बेहोश हो जाती हैं। वह बार-बार हनुमान की पत्नी तारा का नाम लेकर एक ही बात बोल रही हैं। तारा...ये तूने क्या कर दिया? वहीं, हनुमान के बुजुर्ग पिता रातभर रो-रोकर टूट चुके हैं। श्मशान स्थल पर भी शांत खड़े रहे। लोग उनको दिलासा दे रहे हैं। लेकिन जवान बेटे-बहू और पोतियों की इस तरह मौत का गम उन पर बहुत भारी पड़ रहा है। इस घटना के बाद से पूरे मुहल्ले के लोग सदमे में हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आखिर परिवार ने ऐसा क्यों किया? पास में रहने वाले रिश्वतेदार और भाईयों के पास भी इस बात का कोई जवाब नहीं है?

पोस्टमार्टम हाउस के बाहर चारों की अर्थियां तैयार की गई।
पोस्टमार्टम हाउस के बाहर चारों की अर्थियां तैयार की गई।

4 महीने पहले हुई थी इकलौते बेटे की मौत
मृतक हनुमान के 18 साल के इकलौते बेटे की 27 सितंबर 2020 को हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। इस गम में पूरा परिवार डिप्रेशन में था। शनिवार को घर में एक सुसाइड नोट भी मिला था। इसमें लिखा था कि हम बेटे अमर के बिना जी नहीं सकते। हम भी दुनिया छोड़कर जा रहे हैं। बेटे के बिना दुनिया बेकार है। पुलिस किसी को परेशान न करे। पड़ोसियों ने बताया था कि बेटे की मौत के बाद से परिवार तनाव में था। सिर्फ हनुमान ड्यूटी पर जाने के लिए घर से निकलते थे। उनकी पत्नी और दोनों बेटियां घर के अंदर ही रहती थीं। महीनों से वह आसपास के लोगों को नजर नहीं आई थीं।

मोर्चरी के बाद रिश्तेदार- परिजनों की भीड़।
मोर्चरी के बाद रिश्तेदार- परिजनों की भीड़।

दूधवाले के आने पर सुसाइड का पता चला
हनुमान के घर रविवार शाम दूधवाला दूध देने पहुंचा। उसने काफी देर तक दरवाजा खटखटाया, लेकिन गेट नहीं खुला। इसके बाद उसने मोबाइल पर कॉल किया, लेकिन किसी ने पिक नहीं किया। दूधवाले ने हनुमान के छोटे भाई घनश्याम के बेटे युवराज को फोन किया, जो अमर की मौत के बाद से हनुमान के पास ही रहता था। युवराज ने अपने पिता और चाचा को मोबाइल पर कॉल किया। मौके पर हनुमान के चाचा का लड़का कपिल सैनी पहुंचा। मेन गेट खोलकर वह अंदर गया तो देखा कि चारों फंदे पर लटके थे।

2 पेज का सुसाइड नोट छोड़ा
'मैं हनुमान प्रसाद सैनी, मेरी पत्नी तारा देवी, 2 बेटियां पूजा और अन्नू अपने पूरे होश में यह लिख रहे हैं। हमारे बेटे अमर का स्वर्गवास 27 सितंबर 2020 को हो गया था। हमने उसके बिना जीने की कोशिश की, लेकिन उसके बगैर जिया नहीं जाता। इसलिए हम चारों ने अपनी जीवन लीला खत्म करने का फैसला लिया है। अमर ही हम चारों की जिंदगी था। वही नहीं तो हम यहां क्या करेंगे। घर में किसी चीज की कमी नहीं है। जमीन है, घर है, दुकान है, नौकरी है। बस सबसे बड़ी कमी बेटे की है। उसके बिना सब बेकार है। हम पर किसी का कोई कर्ज बाकी नहीं है।'

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