ट्रेन हादसे में बुजुर्ग की मौत:माॅर्निंग वाॅक पर निकला बुजुर्ग ट्रेन की चपेट में आया, 100 मीटर घिसटने के बाद दाे टुकड़े हुए

सीकरएक महीने पहले
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ट्रैक पर दाे घंटे खुला पड़ा रहा शव, रिश्तेदार बाेले, पत्नी की माैत के बाद गुमसुम रहता था नरेश - Dainik Bhaskar
ट्रैक पर दाे घंटे खुला पड़ा रहा शव, रिश्तेदार बाेले, पत्नी की माैत के बाद गुमसुम रहता था नरेश

घर से बाहर घूमने माॅर्निंग वाॅक पर निकला बुजुर्ग मंगलवार को सुबह ट्रेन की चपेट में आ गया। वह करीब 100 मीटर दूर तक ट्रेन के एंगल में उलझकर घिसटता रहा। इसके बाद पहिए के नीचे आ जाने से उसके शरीर के दाे टुकड़े हो गए।

जीआरपी के अनुसार वार्ड 37, गायत्री धर्मशाला के पास राधाकिशनपुरा में रहने वाला 65 वर्षीय नरेश कुमार सुबह माॅर्निंग वाॅक के लिए घर से निकला था। राधाकिशनपुरा अंडरपास के पास अचानक वह रेलवे क्राॅसिंग के दाैरान उधर से गुजर रही मालगाड़ी की चपेट में आ गया। माैके पर माैजूद लाेगाें ने बताया कि मालगाड़ी दाैड़ रही थी और बुजुर्ग उसमें उलझा हुआ था। थाेड़ी दूर आगे चलने के बाद बुजुर्ग का शरीर मालगाड़ी के पहिए के नीचे आने से अलग हाे गया। जीआरपी थाने के हैड कांस्टेबल जगदीश प्रसाद के अनुसार मृतक की शिनाख्त हाेने के बाद उसके परिजनाें काे माैके पर बुलाया गया। उन्हाेंने पाेस्टमार्टम कराने से मना कर िदया। बाद में समझाइश के बाद पीएम कराकर नरेश का शव उसके दाेनाें बेटे मनीष और मनाेज के हवाले कर िदया गया।

हाथाें से पकड़ रखी थी ट्रेन, छूटते ही आया पहिए के नीचे : घटना के दाैरान माैके पर माैजूद छात्र शेखर और यश गुर्जर ने बताया कि वे दाेनाें सुबह करीब सवा नाै बजे काेचिंग के लिए जा रहे थे। दाेनाें ने देखा कि 100 मीटर दूर से आ रही मालगाड़ी के एक बुजुर्ग लटक रहा था, जिसे देखकर उन्हाेंने मालगाड़ी के चालक काे इशारा भी किया, लेकिन वह ट्रेन काे राेक नहीं पाया और मालगाड़ी से बुजुर्ग के हाथ छूटते ही वह पहिए के नीचे आ गया। इसके बाद उन्हाेंने हादसे की सूचना कंट्राेल रूम में दी ताे आधे घंटे बाद पुलिस माैके पर पहुंची।

शव उठाने नहीं पहुंची नगर परिषद की गाड़ी, परिजनों ने एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया

घटना के करीब दाे घंटे बाद तक नरेश कुमार का कटा हुआ शव पटरियाें के पास खुले में पड़ा रहा। लाेगाें ने शव की बेक्रदी के आराेप लगाए कि किसी ने मृत शरीर काे कपड़े से ढंकने तक का कष्ट नहीं उठाया। जीआरपी का कहना है कि उसने शव काे माैके से उठाने के लिए कई बार नगर परिषद कार्यालय में फाेन किए, लेकिन फाेन रिसीव करने वाले ने कहा कि उनकाे लिखित में रिपाेर्ट चाहिए और वे लाेग शव उठाने के लिए नहीं पहुंचे। इसके बाद नरेश कुमार के परिजन आए और उन्हाेंने एंबुलेंस बुलाकर शव काे एसके अस्पताल में पहुंचाया। इधर, नरेश के रिश्तेदाराें का कहना था कि दाे-तीन महीने पहले नरेश की पत्नी की माैत हाे गई थी, तब से नरेश उसके गम में उदास और खाेया-खाेया सा रहता था।

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