सीकर की शेरनी ने फतह किया 'अफ्रीका का एवरेस्ट':कभी रजनी के जन्म से दुखी घरवालों ने खाना नहीं खाया था, आज देश कर रहा गर्व

सीकर6 दिन पहले

सीकर की रहने वाली रजनी चौधरी ने ईस्ट अफ्रीका के किलिमंजारो पर्वत को फतह किया है। रजनी ने 19, 341 फीट की यह मुश्किल चढ़ाई 66 घंटे में पूरी की। तंजानिया के किलिमंजारो पर्वत की गिनती अफ्रीका के सबसे दुर्गम पर्वतों में होती है। माइनस 30 डिग्री तापमान में 28 किलोमीटर का कठिन सफर रजनी ने बिना रुके तय किया। कभी उनके जन्म के वक्त परिवारवालों ने खाना तक नहीं खाया था।

नहीं बनने दिया गया था फैशन डिजाइनर

अपने परिवार के साथ रजनी चौधरी।
अपने परिवार के साथ रजनी चौधरी।

रजनी ने बताया कि शुरू में उनकी इच्छा फैशन डिजाइनर बनने की थी। लेकिन उनकी दादी ने इसके लिए साफ मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने जुंबा और योग की ट्रेनिंग ली थी। इसी दौरान उनकी रुचि पर्वतारोहण में हुई। उन्होंने हिमाचल के अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनरिंग एंड एलाइड स्पोर्ट्स से ट्रेनिंग ली है।

यूनिवर्सिटी ने उठाया खर्च

खंडेला के प्रतापपुर गांव की रहने वाली रजनी फिलहाल जयपुर के निम्स यूनिवर्सिटी से एमटेक की पढ़ाई कर रही हैं। पर्वतारोहण के लिए उनकी दीवानगी को देखते हुए यूनिवर्सिटी ने ही इस सफर के लिए बजट दिया था।

अब एवरेस्ट फतह का है लक्ष्य

रजनी अब माउंट एवरेस्ट फतह करना चाहती हैं।
रजनी अब माउंट एवरेस्ट फतह करना चाहती हैं।

रजनी इससे पहले भारत में भी कई ऊंचे पर्वतों को फतह कर चुकी हैं। इस दौरान उन्हें 1993 में भारत की सबसे कम उम्र में माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली डिकी डोलमा का मार्गदर्शन मिला। अब रजनी का अगला लक्ष्य माउंट एवरेस्ट फतह करना है।

सामाजिक कार्यों में भी है रुचि

पढ़ाई और पर्वतारोहण के साथ रजनी की रुचि सामाजिक कार्यों में भी है। वे सरकारी स्कूलों में लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देती हैं। उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर पहाड़ी इलाकों में सफाई अभियान चलाया था। रजनी सीकर जिले की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की ब्रांड एम्बेसडर भी हैं।