सीकर:ट्रक वाले ने मारपीट कर उतारा, घर जाने के लिए तीन घंटे तक भूखा प्यासा मदद की गुहार लगाता रहा, आखिरकार एक बस वाले को आया रहम

सीकर2 वर्ष पहले
बजरंग कांटा पर मदद की गुहार लगाता नरपत

एक 27 साल के युवक से ट्रक चालक ने मारपीट की, उसके पैसे ले लिए और बीच रास्ते में उतार कर चला गया। अनजान शहर में युवक ट्रक वाले की मार तो भूल गया, लेकिन उसे अपने घर की याद सताने लगी। उसने तीन घंटे तक सीकर के बाजार में, बस स्टैंड, रोडवेज और पुलिस के पैर भी पकड़े, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। आखिरकार युवक एक निजी बस परिचालक को ही दया आई, उसने पहुंचाने की हामी भरी तो युवक रोने लग गया।

दरअसल ये कहानी नहीं सीकर में रात सात बजे की घटना है। जालोर के भीनमाल का रहने वाला नरपत कुमावत पिता की मौत के बाद मां और बहन का पेट पालने के लिए ट्रक पर खलासी का काम करना शुरू किया था। पता नहीं किस बात से ट्रक चालक नाराज हो गया और सीकर के नजदीक उसके साथ मारपीट कर रास्ते में उतार दिया।

नहीं पसीजा दिल: मदद के लिए पुलिसकर्मी के पैर पकड़ता युवक
नहीं पसीजा दिल: मदद के लिए पुलिसकर्मी के पैर पकड़ता युवक

मारपीट के बाद नरपत को मां की याद सताने लगी। उसके पास किराए के पैसे नहीं थे। लोगों को अपना दर्द बताया तो उन्होंने रोडवेज डिपो का रास्ता बता दिया। डिपो में उसने चालक, परिचालक को आपबीती बताई तो उन्होंने बगैर किराया ले जाने से इनकार कर दिया। निजी बस संचालकों के पास भी गया। उन्होंने भी उसकी बात को अहमियत नहीं दी। रुआंसा होकर बजरंग कांटा के पास भटकने लगा। उस दौरान गश्त कर रही पुलिस की गाड़ी पर उसकी नजर पड़ी। उनके पास आया।

पुलिस को गुजरी घटना, घर के हालात के बारे में जानकारी दी। गाड़ी में बैठे एएसआई का दिल भी पसीजा, लेकिन उसको घर भेजने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। 50 रुपए देकर उसको उस हाल में छोड़कर चले गए। रात करीब 9.30 बजे बज रहे थे, शहर खाली सा होता जा रहा था और युवक रुआंसा। उसने लोगों के पैर पकड़कर उसे घर भिजवाने की मिन्नतें की, लेकिन कोई दस रुपए दे रहा ​था तो कोई उसके साथ सहानुभूति जता रहा था।

आखिरकार एक निजी बस के परिचालक के पैर पकड़कर रोने लगा। उसने कहा कि उसे जोधपुर तक ही छोड़ दे। रात 10.30 बजे परिचालक ने उससे हामी भर ली। इसके बाद तो वह वहीं बैठ गया। आखिरकार परिचालक ने उसे बस में बैठा लिया।

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