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70 दिन बाद लौटा कोरोना:नीदरलैंड से आया युवक 27 दिन गांव-रिश्तेदारी में घूमा, वापसी के लिए कराए टेस्ट में मिला पॉजिटिव; सतर्कता से ही तीसरी लहर रुकेगी

सीकर2 महीने पहले
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सोशल मीडिया से साभार। - Dainik Bhaskar
सोशल मीडिया से साभार।

दुनिया में काेराेना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्राॅन की दशहत के बीच मंगलवार काे सीकर के लिए भी बुरी खबर आई। 70 दिन बाद जिले में काेराेना पाॅजिटिव मिला। पाॅजिटिव युवक कूदन ब्लाॅक के दुजाेद गांव का रहने वाला है। वह 3 नवंबर काे ही पत्नी के साथ नीदरलैंड से घर दुजाेद गांव पहुंचा था। वापस जाने के लिए साेमवार काे आरटी-पीसीआर जांच के लिए सैंपल दिया था।

जांच में वह पाॅजिटिव मिला। स्वास्थ्य विभाग ने युवक काे घर में आइसाेलेट किया है। ये एक तरह से कोरोना की तीसरी लहर का अंदेशा माना जा सकता है। पहली लहर में 9461 मरीज आए व 101 माैत हुई। दूसरी लहर में 21535 मरीज आए और 237 मौत हुई। 70 दिन के लंबे अंतराल के बाद एक पॉजिटिव मरीज मिला है। दुजाेद गांव का युवक नीदरलैंड में फिटनेस ट्रेनर है। पत्नी भी नीदरलैंड में साइकाेलाेजिस्ट है। पति-पत्नी दीपावली पर 3 नवंबर काे गांव दुजाेद पहुंचे थे।

दाेनाें की दिल्ली एयरपाेर्ट पर आरटी-पीसीआर जांच हुई थी और दाेनाें निगेटिव मिले थे। युवक और उसकी पत्नी काे फाइजर वैक्सीन की दाेनाें डाेज भी लगी हुई। दाेनाें को 1 दिसंबर काे वापस नीदरलैंड जाना था, इसलिए दाेनाें ने आरटी-पीसीआर जांच के लिए सैंपल दिया। मंगलवार काे सैंपल का रिजल्ट आया ताे वो पाॅजिटिव मिला। पत्नी की जांच रिपाेर्ट निगेटिव आई। जबकि युवक में भी काेराेना लक्षण नहीं है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने उसे घर में आइसाेलेट किया है।

पहली लहर यानी फर्स्ट गियर
पिछले साल मार्च में कोरोना की पहली लहर आई थी। सीकर में उस समय 9461 मरीज आए व 101 की मौत हुई।
दूसरी लहर यानी सैकंड गियर
मार्च 2021 में आई दूसरी लहर ज्यादा घातक साबित हुई। सीकर जिले में 21535 मरीज आए, 237 की मौत हुई।
थर्ड गियर को रोकने की चुनौती
कई देशों में ओमिक्राॅन वैरिएंट का प्रकोप शुरू हो चुका है। टीके, मास्क व सोशल डिस्टेंस से ही ये लहर रुकेगी।घटा दी 71% सैंपलिंग : स्वास्थ्य विभाग ने 6 माह में सैंपलिंग 71 फीसदी तक घटा दी। दूसरी लहर के दौरान मई माह में 42 हजार सैंपल ले रहा था। जाे घटकर अक्टूबर माह में महज 7731 सैंपल रह गए। नवंबर माह में भी 12 हजार 485 सैंपल लिए। रेंडम सैंपलिंग ताे बिल्कुल बंद है।

2.20 लाख काे नहीं लगी सैकंड डाेज : दूसरी लहर के पीक टाइम यानी जिले में वैक्सीनेशन रफ्तार भी गिर गई है। 2.20 लाख लाेगाें को सैकंड डाेज नहीं लग पाई है। इनकी तय सीमा 84 से 116 की अवधि गुजर चुकी है। एेसे लाेगाें में पहला टीका बेअसर हाेने का खतरा है।

स्वास्थ्य विभाग पाॅजिटिव मिले युवक के सैंपल की जीनाेम सीक्वेंस जांच कराएगा। ताकि वायरस के वैरिएंट का पता लगाया जा सके। काेराेना वायरस लगातार बदल रहा है। फिलहाल ओमिक्राॅन वेरिएंट सामने आया है। जाे डेल्टा वेरिएंट से ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है। गांव में परिचिताें से मिला, बाजार में भी खरीदारी की : पाॅजिटिव युवक 27 दिन गांव में रुका। इस दाैरान वो पूरे गांव में घूमा और परिचिताें से मिलता रहा।

वो अपने रिश्तेदारों से मिलने भी गया। पिछले सप्ताह नीदरलैंड वापस जाने की तैयारियाें काे लेकर खरीदारी करने सीकर शहर में भी घूमा। इसलिए युवक के संपर्क में आए लाेगाें के लिए खतरा बढ़ गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एसिमप्टोमैटिक लोगों से भी वायरस फैलने का खतरा रहता है इसलिए लोगों को मास्क और सोशल डिस्टेंस का हमेशा पालन करना चाहिए।

दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने लोगों की चिंता फिर बढ़ा दी है। एक्सपर्ट्स का दावा है कि यह वैरिएंट भारत में दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार डेल्टा वैरिएंट से भी ज्यादा संक्रामक हो सकता है। कोरोना के नए वैरिएंट B.1.1.529 (ओमिक्रॉन) को डब्ल्यूएचओ ने वैरिएंट ऑफ कन्सर्न के रूप में सूचीबद्ध किया है।
ये हैं ओमिक्रॉन इंफेक्शन के लक्षण : दक्षिण अफ्रीका में सबसे पहले ओमिक्रॉन वैरिएंट की पहचान करने वाली डॉक्टर एंजेलीके कोएट्जी के अनुसार ओमिक्राॅन के मरीज को ज्यादा थकान रहती है। उसे हल्के सिरदर्द के साथ पूरे शरीर में दर्द की शिकायत हाेती है। खांसी और स्वाद व गंध की क्षमता खत्म होने जैसे काेराेना के सामान्य लक्षण नहीं दिखते हैं।

पहला टीका लगवाए 116 से ज्यादा दिन हो गए है। सैकंड अभी तक नहीं लगा है। क्या पहला टीका असरदार रहेगा? 116 दिन तक सैकंड डाेज नहीं लगाने से पहले टीके की एंटी बाॅडी धीरे-धीरे खत्म हाेती जाएगी। समय पर सैकंड डाेज से एंटी बाॅडी का लेवल बना रहेगा। त्याेहार पर लाेग बाहर से यहां आए हैं। मार्केट में आवाजाही बढ़ी है। इससे थर्ड वेव की आशंका बढ़ी है? निश्चित रूप से खतरा बढ़ा है। क्याेंकि दूसरी जगह से लाेग घर आए हैं। संभव है उनमें काेई संक्रमित हाे। नवंबर माह में केस बढ़ना इसका उदाहरण है।

पहली डोज के बाद भी संक्रमित हाे गए। क्या गारंटी है कि सैकंड डाेज लगाने के बाद संक्रमण नहीं हाेगा? वायरस की चपेट में आने से संक्रमण ताे हाेगा ही। दाेनाें डाेज लगी हैं ताे माैत की आशंका खत्म हाे जाएगी। पाेस्ट काेविड बीमारियाें में टीका असरदार है क्या?

टीके लगे हाें ताे पाेस्ट काेविड काॅम्पलीकेशन के चांस कम है। अगर हाे भी गया ताे गंभीर स्टेज नहीं अाएगी। लहर-3 में बच्चाें पर ज्यादा असर की आशंका जताई जा रही है। इसमें कितनी सच्चाई है? एेसी अभी सिर्फ आशंकाएं हैं। क्याेंकि बच्चाें का अभी वैक्सीनेशन शुरू नहीं हुआ है। डेंगू पाॅजिटिव और वायरल पीड़ित टीका लगवा सकते है क्या? डेंगू और दूसरी बीमारियाें के मरीज ठीक होने के 14 दिन बाद टीका लगवा सकते हैं। तब वैक्सीन कारगर साबित होगा।

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