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  • There Will Be An Online System For Devotees For Aarti, Worship And Darshan, To Stop The Third Wave, The Entry Of Visitors To The Ganesh Temple Is Closed.

कोरोना ने फीका किया गणेश चतुर्थी का रंग:भक्तों के लिए आरती, पूजा और दर्शनों को लेकर रहेगी ऑनलाइन व्यवस्था, तीसरी लहर काे राेकने के लिए गणेश मंदिर में दर्शनार्थियों की एंट्री बंद

सीकर18 दिन पहले
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विघ्नहर्ता और रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश के जन्मोत्सव की शुरुआत मंगलवार काे अभिषेक के साथ हाेगी। भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी शुक्रवार को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। शहर के बड़े और छोटे गणेश मंदिरों में दूसरी बार भक्त कोरोना संक्रमण के चलते दर्शन नहीं कर सकेंगे। कोरोना की तीसरी लहर काे राेकने के लिए गणेश मंदिर में दर्शनार्थियों की एंट्री बंद कर दी गई हैं। भगवान गणेश के जन्मोत्सव पर धार्मिक स्थल बंद रहेंगे। गणेश चतुर्थी का उत्सव 10 दिनों तक चलता है जो चतुर्थी को शुरू होकर अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है। हालांकि कोरोना संकट के चलते इस साल गणेश उत्सव अलग रूप में मनाया जाएगा। फतेहपुर गेट स्थित गणेश मंदिर के पवन पुजारी ने कहा कि मंगलवार से भगवान गणेश का तीन दिवसीय उत्सव प्रारंभ हाेगा।

इसमें पहले दिन भगवान गणेश का 101 किलाे दूध से अभिषेक हाेगा। गुरुवार काे सिंजारा महोत्सव रहेगा। इस बार शोभायात्रा का आयोजन नहीं हाेगा। संक्रमण के चलते मंदिर में गणेश मंदिर के पुजारी ही शामिल हाेंगे। साथ ही अपील की है कि इस बार भी संक्रमण का काल है, इसलिए घर में रहकर मिट्‌टी के गणेश की स्थापना कर पूजा-अर्चना करें, गणेश मंदिर श्रद्धालुओं के पूर्णतया बंद रहेगा। इसलिए मंदिर नहीं आकर घर में भगवान गणेश का ध्यान करें। कोविड-19 में जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए गणेश मंदिर में कोई भी सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं होगा। मंदिर में नहीं आए, घर में भगवान का पूजन कर सुरक्षित रहें। मंदिर सभी से ऑनलाइन दर्शनों की व्यवस्था की जाएगी।

भगवान गणेशजी को संपन्नता के कारक

भगवान गणेश जी को बुद्धि, विवेक, धन-धान्य, रिद्धि-सिद्धि का कारक माना जाता है। मान्यता है कि गणेश जी को प्रसन्न करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति की स्थापना होती है। मान्यता ये भी है कि इसी दिन गौरीपुत्री श्रीगणेश का जन्म हुआ था। इस दिन घर-घर में मंगलमूर्ति की स्थापना होती है। गणेश जी का जन्म मध्याह्न में हुआ है, इसलिए गणेश जी को मध्याह्न में बिठाया जाता है। गणेश जी को बिठाने के बाद 10 दिनों तक उनकी पूजा होती है। वहीं गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्र दर्शन वर्जित होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चांद को देखने पर मिथ्या दोष लगता है। इसकी वजह से देखने वाले को चोरी का झूठा इल्जाम सहना पड़ता है।

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