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  • This Time The Sweet Onion Of Shekhawati Will Come In The Market By A Month Late, Because The Plant Was Destroyed By The September Rains.

किसानों को करीब 25 करोड़ रुपए का नुकसान:इस बार एक माह देरी से मार्च तक मार्केट में आएगा शेखावाटी का मीठा प्याज, क्योंकि सितंबर की बारिश से नष्ट हो गई पौध

सीकर2 महीने पहले
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इस बार पंजाब, हरियाणा, दिल्ली के लोगों को  शेखावाटी के मीठे प्याज के लिए एक महीने ज्यादा इंतजार करना पड़ेगा। - Dainik Bhaskar
इस बार पंजाब, हरियाणा, दिल्ली के लोगों को  शेखावाटी के मीठे प्याज के लिए एक महीने ज्यादा इंतजार करना पड़ेगा।
  • अच्छे भावों की उम्मीद में किसानों ने अगेती बुआई के लिए तैयार कर रखी थी नर्सरी

इस बार पंजाब, हरियाणा, दिल्ली के लोगों को शेखावाटी के मीठे प्याज के लिए एक महीने ज्यादा इंतजार करना पड़ेगा। क्याेंकि सितंबर की बारिश के कारण प्याज की नर्सरी खराब हाे गई। इसके बाद किसानों ने नए सिरे से नर्सरी तैयार की। ऐसे में प्याज फरवरी की बजाय मार्च तक मार्केट में आएगा। प्याज की नर्सरी नष्ट होने से किसानों को करीब 25 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। अच्छे भावों की उम्मीद में इस बार किसानों ने एक महीने पहले अगस्त में ही प्याज की नर्सरी के लिए बिजाई कर ली थी।

ग्राउंड रिपाेर्ट में सामने आया है कि किसानाें ने 500 क्विंटल बीज पर 25 कराेड़ रुपए खर्च कर करीब 5000 हैक्टेयर में अगेती नर्सरी तैयार की थी। सितंबर के अंतिम सप्ताह तक मानसूनी बारिश में लगातार नमी से 90 से 95% तक नर्सरी नष्ट हाे चुकी है। वहीं किसानाें काे नए सिरे से नर्सरी बुआई के लिए 1000 रुपए प्रतिकिलाे बीज की कीमत ज्यादा देनी पड़ रही है। ऐसे में बुआई रकबा दो हजार हैक्टेयर तक कम हो सकता है।

असर : अब बीज की डिमांड पर एक रुपए प्रति किलो बढ़ गए भाव, बुआई रकबा घटेगा

उद्यान विभाग के अनुसार सीकर में प्याज बुआई का रकबा 10000 हैक्टेयर के करीब रहता है। इस बार प्याज की खेती की तरफ रुझान काे देखते हुए बुआई रकबा 12 हजार हैक्टेयर के करीब रहने की संभावना जताई जा रही थी। नर्सरी नष्ट हाेने के बाद बने हालाताें काे देखते हुए यदि लाेकल मार्केट में जरुरत के अनुसार बीज नहीं मिला ताे रकबा औसत से 2 हजार हैक्टेयर कम हाेकर 8 हजार हैक्टेयर ही रह सकता है।

अलवर से मंगवाई पाैध में भी 70% खराबा : जल्द पैदावार के लिए काफी किसानाें ने इस साल अलवर से भी प्याज की पाैध मंगवाकर अगस्त माह में ही प्याज की बुआई की थी। अब हालात ये है कि धाेद व लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के दाे दर्जन से ज्यादा गांवाें में 70 प्रतिशत ऐसे किसान हैं जिन्होंने बुआई के लिए अलवर से मंगवाई गई है।

यहां ज्यादा खराबा : किसानाें के अनुसार जिले में प्याज की अगेती बुआई में ज्यादा खराबा लक्ष्मणगढ़, दांतारामगढ़ व धाेद ब्लाॅक क्षेत्र के 40 से अधिक गांवाें में माना जा रहा है। झीगर छाेटी, झीगर बड़ी, सेवा, सांवलाेदा लाडखानी, सांवलाेदा धायलान, सांवलाेदा पुराेहितान, भुकरान का बास, बठाेठ, घाणा, मैलासी आदि में ज्यादा नुकसान हुआ।

यूं समझे प्याज नर्सरी में नुकसान का दर्द

  • काेलीड़ा के किसान श्रीपाल मील ने बताया कि अगस्त के प्रथम सप्ताह में 3500 के भाव से 25 किलाे बीज की खरीद कर नर्सरी की बुआई की थी। एक लाख 40 हजार रुपए खर्च हुए। बारिश में नर्सरी नष्ट हाेने से उसने नए सिरे से 4500 रुपए किलाे के भाव से 22500 रुपए का बीज खरीदकर नर्सरी की बुआई की है। ऐसे में वह तीन हैक्टेयर के बजाय आधे हैक्टेयर में ही प्याज की बुआई कर सकेगा।
  • सांवलाेदा धायलान के रामलाल सिंह मूंड ने पांच हैक्टेयर में प्याज बुआई के लिए सितंबर के पहले सप्ताह में 43 किलाे बीज से दाे लाख 15 हजार खर्च कर नर्सरी बुआई की थी। लगातार बारिश में नर्सरी पूरी तरह से नष्ट हाे चुकी है।
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