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सीकर के कोविड सेंटर में भास्कर की आंखोंदेखी:बगैर संसाधनों के परिजन ही संभाल रहे हैं कोविड मरीजों को, डॉक्टर राउंड करते हैं और बुलाने पर आता है नर्सिंग स्टाफ

सीकर2 महीने पहले
इंजेक्शन लगाता पीपीई किट में न

कोविड सं​क्रमण की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ ने खुद को बचाने के लिए पूरा इंतजाम किया हुआ है। जबकि सं​क्रमितों के बीच अधिकतर समय रहने वाले लोग एक मॉस्क पर निर्भर है। मॉस्क, सेनिटाइजर भी दानदाताओं के जरिए यहां खूब पहुंच रहा है, लेकिन इसका उपयोग केवल मेडिकल स्टाफ के लिए है। जबकि मरीज की नजदीक से देखभाल अटैंडेंट करते हैं। कई संक्रमितों के बीच अपने परिजन की मदद करते है। इतना ही नहीं समय पर दूसरे मरीज को भी संभाल लेते है।

एक मॉस्क के सहारे अटेंडेंट
एक मॉस्क के सहारे अटेंडेंट

सांवली के कोविड डैडिकेटेड केयर सेंटर भास्कर की टीम पहुंची। कोविड ​केयर सेंटर में हालात ​फिलहाल कंट्रोल में है। मेडिकल स्टाफ अपनी ड्यूटी निभा तो रहा है, लेकिन मरीज के हाथ लगाने, उसके नजदीक जाने में झिझकता है। ऐसे में कुछ कार्य को छोड़कर मरीज के साथ वाले अंटेंडेंट ही उसके नजदीक रहता है। वहीं उसको समय पर दवाई देता है और मेडिकल स्टाफ के बताए अनुसार मरीज का ध्यान रखता है। गंभीर होने पर नर्सिंग को तलाशकर वहीं लाता है।

डॉक्टर राउंड पर रहने के दौरान ही मरीज को दूर से देखते हैं, मरीज की हालत को लेकर अटेंडेंट ही डॉक्टर को जानकारी देता है। इंजेक्शन लगाना हो या कोई और काम नर्सिंग स्टाफ को तलाशकर लाना होता है। कई वार्ड में तो दिन में भी नर्सिंग स्टाफ नहीं है। नर्सिंग स्टाफ भी हाथों में ग्लब्ज, चेहरे पर डबल मॉस्क और फेसकवर लगाकर मौजूद है।, यहां तक की इंजेक्शन लगाते समय या शरीर के हाथ लगाते समय तो पीपीई किट भी पहन लेते है।

मुंह पर गमछा लपेटे अटेंडेंट
मुंह पर गमछा लपेटे अटेंडेंट

लेकिन अटेंडेंट के पास या तो एक मॉस्क है या फिर कई तो तोलिए लपेटकर खुद को संक्रमित होने से बचा रहे है। जबकि भर्ती होने वाले के साथ आने वाले अटेंडेंट को हॉस्पिटल से ही मॉस्क और सेनिटाइजर दिया जाना चाहिए। जिससे उसके संक्रमित होने से बचाया जा सके। हालात यह है कि आक्सीजन सिलेंडर तक भी अटेंडेंट को ही घसीटना पड़ रहा है।

भर्ती मरीज के साथ मौजूद एक युवक ने बताया कि व्यवहार तो ऐसा करते हैं जैसे यहां आकर कोई गलती कर दी। वार्ड में रहते नहीं है। आपके पेशेंट को सांस लेने में तकलीफ होने लगे तो पहले नर्सिंग स्टाफ को तलाशों। उसको बुलाकर लाओ, फिर उसकी सूचना पर ही डॉक्टर आएंंगे।

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