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दम तोड़ रही सीएचसी:सूरजगढ़ ब्लॉक में सबसे ज्यादा कोरोना केस पिलानी में आए थे, फिर भी केवल 3 डॉक्टर्स के भरोसे सीएचसी

पिलानी7 दिन पहले
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पिलानी. सीएचसी भवन। - Dainik Bhaskar
पिलानी. सीएचसी भवन।
  • पिलानी में देशभर के स्टूडेंट्स भी रहते हैं इसके बावजूद पीएचसी में दो शिशुरोग व एक ईएनटी विशेषज्ञ

कोरोना की पहली और दूसरी लहर के बावजूद अब तक भी सरकार कोई सबक नहीं लेती दिखाई दे रही है। ग्रामीण क्षेत्रों की पीएचसी को तो छोड़िए देश और दुनिया में शिक्षा व आईटी नगरी के रुप में विख्यात पिलानी जैसे शहर में सीएचसी दम तोड़ रही है। प्रतिदिन करीब 400 से अधिक ओपीडी वाली यह सीएचसी महज तीन डॉक्टर्स के भरोसे है।

उसमें भी दो शिशुरोग विशेषज्ञ और एक ईएनटी विशेषज्ञ हैं। यानी फिजिशियन के नाम पर तो कोई डॉक्टर यहां है ही नहीं। यह हालात तब हैं जब सूरजगढ़ ब्लॉक में सबसे अधिक कोरोना के मरीज पिलानी में मिले थे। दूसरी लहर के दौरान यहां और आसपास के गांवों में मिलाकर 60 से अधिक मौतें भी हुई। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इस सीएचसी में एक भी महिला रोग विशेषज्ञ नहीं है। सूरजगढ़ ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ. शैलेष कुमार ने बताया कि दूसरी लहर के दौरान पिलानी क्षेत्र में करीब एक हजार रोगी मिले थे।

खतरा : दूसरी लहर में सबसे ज्यादा समय तक कंटेटमेंट जोन रहा पिलानी

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान कोरोना का सबसे अधिक सामना पिलानी शहर ने ही किया। एक वक्त ऐसा था जब यहां सबसे अधिक कंटेटमेंट जोन थे। किसी भी बाहरी व्यक्ति के पिलानी में आने पर मनाही थी। इसके बावजूद यहां कोरोना के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं की गई। जब जिला मुख्यालय पर बीडीके अस्पताल में कोरोना मरीजों का दबाव बढ़ा तो यहां 20 बेड का कोविड़ सेंटर बनाया गया था।

भामाशाहो के सहयोग से सीएचसी में फिलहाल 26 ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर व पांच ऑक्सीजन सिलेंडर हैं तथा दो वेंटिलेटर है। कस्बे व आसपास के कोरोना मरीजों का उपचार सीएचसी पिलानी में नहीं होकर कस्बे के प्राइवेट अस्पतालो में हुआ था। जो कई गरीब परिवारों पर काफी भारी पड़ा।

इन गांवों से आते हैं रोगी

सीएचसी पिलानी में आसपास के विभिन्न गांवों से रोगी उपचार के लिए आते है। जिनमें मुख्यत पांथड़िया, बिशनपुरा-फर्स्ट व सैकंड, केहरपुरा, हमीनपुर, गाडोली, काजी, काजी का बास, मालियों की ढाणी, रायला, मोरवा, डुलानिया, धिंधवा, झेरली, बनगोठड़ी, बेरी, लीखवा, छापड़ा, सरदारपुरा सहित अन्य शामिल है।

बदहाली का असर

आधी रह गई मरीजों की संख्या, 400 से अधिक ओपीडी देने वाली सीएचसी में अब केवल 200 मरीज ही आते हैं

पहाड़ी के पास स्थित पिलानी सीएचसी में प्रतिदिन आने वाले रोगियों की संख्या करीब 400 थी। कोरोना काल के दौरान सीएचसी को कोविड सेंटर बनाए जाने के बाद कस्बे के राजकीय सूरजमल लोयलका अस्पताल परिसर में सीएचसी शुरु की गई। जैसे ही सीएचसी यहां आई ओपीड़ी की संख्या 400 से घटकर 200-250 पर आ गई।

सीएचसी में उपचार के लिए आने वाले आसपास के क्षेत्र के ग्रामीणों से बात करने पर उन्होने बताया कि गांव से बस सीधी भगतसिंह सर्किल पर आती है और वहां ऑटो चालक प्रति सवारी 30-40 रुपये लेते हैं। जिसकी बजाय 50 रुपये ओपीडी फीस देकर प्राइवेट अस्पतालो में ही चिकित्सक से जांच करवा लेना सही पड़ता है। पहले पहाड़ी के पास से आने वाली बसों से सीएचसी के पास ही उतर जाते थे और सीएचसी में उपचार करवा लेते थे।

2 वेंटिलेटर हैं, दोनों स्टोर में

तीसरी लहर की आशंका के बावजूद स्वास्थ्य विभाग पिलानी सीएचसी में व्यवस्थाओं को बढ़ाने के बजाय कम रहा है। आईसीयू की सुविधा के नाम पर केवल दो वेंटिलेटर है जो अभी स्टोर रुम से बाहर नहीं आए है। ऐसे में यदि कोरोना की तीसरी लहर आती है तो पिलानी व आसपास के क्षेत्रो से आने वाले रोगियों के लिए सीएचसी में कोई पर्याप्त सुविधा नहीं है।

जिले की सभी सीएचसी में सबसे ज्यादा प्रसव करवाने की सीएचसी पिलानी में कोई स्त्रीरोग विशेषज्ञ नही है। सिर्फ नर्सिंग स्टाफ के बल पर ही प्रसव करवाए जा रहे है। एक स्त्रीरोग विशेषज्ञ की नियुक्ति यहां की गई थी, लेकिन उसे प्रतिनियुक्ति पर चिड़ावा लगा दिया गया।

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