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पहल:24 वर्षों से स्कूलों में बच्चाें काे नशे से दूर रहने व पाैधे लगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं संत रतनदास

सादुलपुर23 दिन पहले
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  • संत रतनदास अंधविश्वास व सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए भी जगा रहे हैं अलख
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कस्बे के संत रतनदास पौधरोपण और नशा मुक्ति, अंधविश्वास एवं सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए पिछले 24 वर्षों से क्षेत्र में अलख जगा रहे हैं। उन्होंने अब तक लाखों पौधे लगाए हैं, वहीं स्कूलों में जाकर बच्चों को व्यसन मुक्ति से दूर रहने तथा अंधविश्वास एवं सामाजिक बुराइयों को जड़ से मिटाने के लिए प्रेरित करने का भी काम कर रहे हैं।

तहसील क्षेत्र का ऐसा कोई गांव नहीं, जहां पर संत रतनदास ने पौधारोपण नहीं किया हो। ऐसा कोई स्कूल भी नहीं है, जहां वे नहीं पहुंचे हो। संत ने बताया कि तीन दशक पूर्व उनके घर पर घुमक्कड़ साधु आए थे। उनसे मिली सत्संग की प्रेरणा से उन्होंने सन्यासी जीवन जीने का संकल्प लिया।  संत रतनदास 1996 गृहस्थ जीवन त्याग कर सुजानगढ़ के कबीर चेतन आश्रम में रहने लगे थे। आश्रम में रहते उन्होंने सुजानगढ़, रतनगढ़, डूंगरगढ़ अादि क्षेत्र में गांव-गांव एवं स्कूल-स्कूल घूमकर पौधरोपण किया और स्कूलों में विद्यार्थियों को बुराइयों के प्रति जागरूक किया। संत बताते हैं कि शुरू-शुरू में उनके सामने काफी दिक्कतें आई।

जब वे स्कूल में प्रवचन देने के लिए पहुंचते तो स्कूल स्टाफ उन्हें कुछ मांगने के लिए आए होंगे, ऐसा सोचकर बाहर से भेज देता था। संत उनसे कहते थे कि मुझे रुपए नहीं चाहिए बल्कि आपका और विद्यार्थियों का कुछ समय चाहिए ताकि मैं अपनी बात रख सकूं। बाद में उन्होंने शिक्षाधिकारियों से संपर्क कर स्कूलों में प्रवचन शुरू किए।

इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को रूढ़िवादिता, अंधविश्वास, व्यसन व सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर अपना भविष्य उज्जवल बनाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही गांवों में गली-गली घूमकर निरक्षरता और रूढ़िवादिता आदि के प्रति भी लोगों को जागरूक किया। 

कई बार हाे चुका सम्मान
संत रतनदास को वर्ष 2008 में वन विभाग द्वारा जिला स्तर पर सम्मानित किया गया। वर्ष 2008 में ही तत्कालीन जिला कलेक्टर अर्जुन मेघवाल द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया गया। 2009 में केंद्रीय कारागृह बीकानेर के उपाधीक्षक द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया गया। 2010 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री भंवरलाल मेघवाल द्वारा तथा वर्ष 2012 में एसडीएम रतनगढ़ द्वारा उन्हें राजीव गांधी पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

दादा से मिली प्रेरणा से पौधरोपण करने की शुरुआत की
संत रतनदास का जन्म राजगढ़ तहसील के गांव बैजुवा में हुआ था। उन्होंने प्राथमिक स्तर की शिक्षा ग्रहण की। 9 वर्ष सुजानगढ़ क्षेत्र में सेवा देने के बाद पिछले 15 वर्षों से वे लगातार राजगढ़ में रहकर जगह-जगह पौधारोपण कर रहे हैं। पौधरोपण की प्रेरणा उन्हें अपने दादाजी से मिली। उनके दादाजी खेजड़ी के पेड़ लगाते थे। दादाजी से मिली प्रेरणा से स्कूल, मंदिर, जेल, छात्रावास, मोक्ष भूमि सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों पर पाैधे लगाते हैं।

उन्होंने हरियाणा के डबावाली, सिरसा, फतेहाबाद व सतनाली, मध्यप्रदेश के इंदौर, सोनभद्र, गंगानगर के रायसिंहनगर सहित अन्य स्थानों पर उन्होंने पौधारोपण किया। संत रतनदास अभी राजगढ़ के कबीर मानव धर्म चेतन आश्रम में रहते हैं।

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