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कथा का तीसरा दिन:भक्ति के लिए उम्र कोई बाधा नहीं है, इसे बचपन से ही करने की प्रेरणा देना चाहिए

सिंघाना3 दिन पहले
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  • सिंघाना में चल रही कथा का तीसरा दिन

भवसागर से पार होने के लिए आवश्यक है कि हम भक्तिमय हों। भगवान की याद में आंसू भी आ जाए तो भगवान कहते हैं यही सच्चा भक्त है। धर्म कर्म का परिणाम देखिए कि राजा अजामिल की बुद्धि बिगड़ी और घर में वेश्या को ले आए।

उससे उत्पन्न हुई संतान का नाम नारायण रख दिया। मानव की यह प्रवृत्ति है कि या तो वह सबसे बड़ी संतान का नाम लेता है या सबसे छोटी संतान का। अंत समय राजा अजामिल ने नारायण-नारायण पुकारते हुए प्राण त्याग दिए। उसी नारायण नाम की वजह से राजा अजामिल मोक्ष के अधिकारी बने।

यह बात सिंघाना के स्कूल परिसर में चल रही कथा के तीसरे दिन मंगलवार काे कथावाचिका माेनिका पारीख ने कही। भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा सुनाते हुए बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए। क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है।

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