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खतरे में विरासत:रूठी रानी महल का छज्जा गिरा, चार छतरियों के गुंबद भी हुए क्षतिग्रस्त

जयसमंद14 दिन पहले
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  • जयसमंद की पाल के पास महाराणा जयसिंह द्वारा निर्मित हवामहल व रूठी रानी महल हो रहे जर्जर

विख्यात जयसमंद झील की पाल के समीप पहाड़ियों पर महाराणा जयसिंह द्वारा निर्मित हवामहल व रूठी रानी महल का अस्तित्व खतरे में नजर आ रहा है। रूठी रानी महल के प्रवेश द्वार का छज्जा गिर गया, लेकिन पुरातत्व विभाग ने सुध तक नहीं ली। सार संभाल व मरम्मत के अभाव में करीब साढ़े तीन सौ साल पुरानी यह हैरिटेज जर्जर होती जा रही है। इधर, हवा महल असामाजिक तत्वों का अड्‌डा बनता जा रहा है।

बता दें कि दोनों महल जयसमंद अभयारण्य में स्थित होने के कारण इन महलों में प्रवेश के लिए वन विभाग द्वारा टिकट के रूप में शुल्क लिया जाता है। इन महलों की सार संभाल व जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग के जिम्मे हैं। पूर्व में इन महलों में चौकीदार नियुक्त था, जो निगरानी करता था। अब दोनों किले भगवान भरोसे हैं। यहां आने असामाजिक तत्व भ्रमण के बहाने दोनों किलो को नुकसान पहुंचा रहे। कई जगह तो दीवारों को भी खोद दिया और जगह-जगह शराब की बोतले बिखरी हुई है। परिसर व प्रवेश द्वार भी विलायती बबूल की झाड़ियों से अटा है। दोनों महल में करीब चार छतरियों के गुंबद भी टूटे पड़े हैं।

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