2014 में 14 फीसदी ही बची जीडीपी:किसानों को जैविक खेती के लिए किया जागरूक, पांच दिवसीय महासम्मेलन का शुभारंभ

आबूरोड16 दिन पहले
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आबूरोड में ब्रह्माकुमारीज के शांतिवन मुख्यालय में पांच दिवसीय राष्ट्रीय यौगिक कृषि-वैश्विक कृषि का प्रकाश स्तंभ महासम्मेलन का शुभारंभ हुआ। इसमें देशभर से छह हजार से अधिक किसान, ग्रामीण, कृषि वैज्ञानिक, कृषि अधिकारी भाग ले रहे हैं। महासम्मेलन के स्वागत सत्र में संबोधित करते हुए हरियाणा सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री देवेंद्रसिंह बबली ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज का कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग किसानों में जागरुकता ला रहा है। प्रभाग से जुड़कर आज देश में हजारों किसान राजयोग का उपयोग करते हुए यौगिक खेती कर रहे हैं। मैं किसान का बेटा हूं। मैंने खुद खेती करवाई और की है। आज रासायनिक खादों के अत्यधिक प्रयोग से कहीं न कहीं हमारे अनाज की जो खुशबू, पौष्टिकता थी वह गायब हो गई है।

मंत्री ने कहा कि पिछले तीन दशकों में हमने खेतों में पेस्टीसाइड डालकर जहर का उत्पादन शुरू किया है। हरिणाया में स्थिति ये है कि कई गांवों में हर तीसरे व्यक्ति को कैंसर है। पहले हम फसल चक्र पद्धति अपनाते थे। कई तरह के अनाज का उत्पादन करते थे। पहले किसान खेती-बाड़ी के साथ बागवानी भी करता था। सब्जियां भी उगाता था। लेकिन हमने तेजी से आगे बढऩे की होड़ में हम ज्यादा उत्पादन देने वाली फसलों लगाने लगे और पेस्टीसाइड उपयोग करने लगे। किसान बागवानी की ओर बढ़े इसके लिए हरियाणा सरकार किसानों को प्रेरित कर रही है। जैविक खेती और नशामुक्ति के लिए ब्रह्माकुमारीज की बहनें लोगों को जागरूक कर रही हैं। आपके इस प्रयास को हर गांव तक ले जाने का प्रयास करुंगा।

यहां से जुड़कर किसान खुद तैयार कर रहे जैविक खाद
महाराष्ट्र सरकार के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री सतेज डी पाटिल ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज ने विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों को जीने की नई राह दिखाई है। भारत की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। हम किसानों के योगदान को भूल नहीं सकते हैं। किसानों को शाश्वत यौगिक खेती के बारे में जागरूक करने बहुत ही सराहनीय कार्य कर रही हैं। भारत जीवनशैली प्राचीन काल से आकर्षण का केंद्र रही है। राजयोग को खेती में शामिल करने से किसान उन्नति कर सकते हैं।

2014 में 14 फीसदी ही बची जीडीपी
लखनऊ से आए उप्र के कृषि निदेशालय के उपनिदेशक बद्री विशाल तिवारी ने कहा कि भारत एक समय सतयुगी, स्वर्णिम भारत था। प्रकृति संतुलित और सब सुखी थे। वर्तमान परिदृश्य पर नजर डालें तो आज खेती का हमारी जीडीपी में लगातार योगदान घटता जा रहा है। वर्ष 1951 में 51 प्रतिशत कृषि का जीडीपी में योगदान था जो लगातार घटता जा रहा है और वर्ष 2014 के आंकड़ों के मुताबिक मात्र 14 प्रतिशत ही रह गया है। इससे किसान तीन तरह से कमजोर हुआ है। आर्थिक रूप से किसान परिवार की प्रतिमाह आय 6-7 हजार रुपये है। दूसरा सामाजिक रूप से कमजोर होना। आज किसान का बेटा किसान नहीं बनना चाहता है। भले वह चपरासी बनना स्वीकार कर लेता है। तीसरा है मानसिक रूप से कमजोर होना। देश में हर वर्ष करीब आठ हजार किसान खुदकुशी कर रहे हैं।

खेती से किसान होंगे सशक्त
उपनिदेशक तिवारी ने कहा कि त्रेतायुग में भी प्रकृति हमारी सहयोगी और सुखदायी थी। द्वापरयुग में भी प्रकृति का साथ मिला। हम रामराज्य की कल्पना करते हैं, जहां सब सुखी रहते हैं। रामराज्य के लिए जरूरी है कि अन्न और मन दोनों शुद्ध और सात्विक हों। यौगिक खेती से अन्न और मन दोनों शुद्ध होते हैं। इसका संबंध योग से है। इसी प्रकार परमात्मा अपनी शक्तियां विखेर रहे हैं लेकिन उन्हें योग के माध्यम से हम संग्रहित, एकत्रित करते हैं। यौगिक खेती हजारों साल पुरानी प्रामाणित विधि है। इसे हजारों साल पहले हमारे ऋषि-मुनियों ने प्राकृतिक खेती का उल्लेख किया है। ऋग्वेद में कहा गया है कि हम धरती मां की पूजा, हल की पूजा, बैल की पूजा, रोपाई लगाते हुए गीत गाने की परंपरा थी। हर चीज का सम्मान था, जिसे आज हम भूल गए हैं।

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