स्कूलों के समय ने बढ़ाई संचालकों की चिंता:कहा- यहां हीटवेव जैसे हालात नहीं, पढ़ाई के लिए 3 घंटे कम

14 दिन पहले
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माउंट आबू में स्कूल संचालकों ने स्कूलों का समय पहले की भांति ही रखने की मांग की है।स्कूल संचालकों का कहना है कि अभी माउंट आबू में हीट वेव जैसी स्थिति नहीं है ऐसे में स्कूलों के समय में बदलाव के पीछे भीषण गर्मी और तापघात जैसे कारण बताना गलत है। - Dainik Bhaskar
माउंट आबू में स्कूल संचालकों ने स्कूलों का समय पहले की भांति ही रखने की मांग की है।स्कूल संचालकों का कहना है कि अभी माउंट आबू में हीट वेव जैसी स्थिति नहीं है ऐसे में स्कूलों के समय में बदलाव के पीछे भीषण गर्मी और तापघात जैसे कारण बताना गलत है।

माउंट आबू में स्कूल संचालकों ने स्कूलों का समय पहले की भांति ही रखने की मांग की है। इस मामले में स्कूल संचालकों ने दो दिन पहले एसडीएम से मिलकर अपनी बात रखने की कोशिश की थी लेकिन उनकी एसडीएम से बात नहीं पाई। स्कूल संचालकों का कहना है कि अभी माउंट आबू में हीट वेव जैसी स्थिति नहीं है ऐसे में स्कूलों के समय में बदलाव के पीछे भीषण गर्मी और तापघात जैसे कारण बताना गलत है।

स्कूल संचालकों ने बताया कि 30 अप्रैल को जारी आदेश के अनुसार निजी और सरकारी स्कूलों का समय 4 मई से सुबह 7.30 बजे से 10.30 बजे तक रखने के आदेश जारी किए गए थे। इन आदेशों के पीछे भीषण गर्मी और तापघात को कारण बताया गया था। स्कूल संचालकों ने कहा कि माउंट आबू मे हीट वेव जैसी कोई परिस्थिति नहीं है । गर्मियों मे समान्यतया अधिकतम तापमान 33 डिग्री ही होता है । बच्चे स्कूल खत्म करके 1:30 बजे तक अपने घरों मे पहुंच जाते हैं । माउंट आबू के ठंडे मौसम के कारण ही यहां गर्मियों मे गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से बड़ी संख्या मे पर्यटक घूमने आते हैं।

स्कूल संचालकों ने बताया कि कोरोना काल की लंबी अवधि के बाद अब बच्चों की ऑफलाइन पढ़ाई पटरी पर आ रही है। ऐसे में स्कूलों में 5 से 6 घंटों तक पढ़ाई जरूरी है। लेकिन नए आदेशों के तहत स्कूलों का समय काफी हो गया है। इस संबंध में कुछ अभिभावकों से भी बातचीत की गई । सूरज मेघवाल और सुनीता ने बताया कि माउंट आबू का तापमान वैसे तो ठंडा रहता है लेकिन फिर भी बच्चों के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होने यह भी कहा कि स्कूलों में मात्र 3 घंटे की पढ़ाई काफी नहीं होगी । कोरोनाकाल में बच्चे घर पर रहकर परेशान हो चुके हैं। स्कूल में बच्चे 5-6 घंटे साथी बच्चों के साथ बिताते हैं तो यह अच्छा है।

इस मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी डॉ. तनवीर हुसैन का कहना है कि गर्मियों में स्टूडेंट्स की तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि बच्चे सुबह कम खाकर या भूखे पेट स्कूल चले जाते हैं। ऐसे में वे धूप में खड़े होने से बीमार हो जाते हैं।