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सबसे लंबा किसान आंदोलन:सीलिंग एक्ट रद्द करवाने, नहरों में पानी के लिए 11 साल चला था आंदोलन, 8 लोग हुए थे शहीद

हनुमानगढ़2 महीने पहले
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  • हनुमानगढ़ में 1959 से 1970 तक चला सबसे लंबा किसान आंदोलन, आज 51 साल पूरे
  • आंदोलन के आगे झुकी सरकार, उस समय पीएम इंदिरा गांधी ने मानी थी मागें

(सतीश गर्ग)
केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों को रद्द करवाने के लिए किसान पिछले 41 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। संगरिया व भादरा क्षेत्र में भी 51 साल पूर्व 1970 में बड़े पैमाने पर किसान आंदोलन हुआ था। इस आंदोलन में भी राज्यभर से लाखों किसानों ने गिरफ्तारी दी थी। स्थिति यह हो गई थी कि किसानों से राज्य की कई जेलें भर गई थीं। संगरिया तब किसान आंदोलन का मुख्य केंद्र था।

आंदोलन को दबाने के लिए 7 जनवरी 1970 को पुलिस ने गोलियां चलाई थीं, जिसमें संगरिया व भादरा के आठ किसान शहीद हुए थे। आंदोलन की यादें यहां के लोगों के जेहन में आज भी जिंदा हैं। संगरिया में आज शहीदों की स्मृति में कार्यक्रम होंगे। चूंकि तब श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ एक ही जिला हुआ करता था। लिहाजा श्रीगंगानगर सहित पूरे राज्य से इस आंदोलन में किसानों ने भाग लिया था। आंदोलन इतना भड़का था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरागांधी को तब हस्तक्षेप करना पड़ा था।

किसान वार्ता करने गए थे, पुलिस ने चलाई गोलियां, आठ शहीद हुए, मुझे 5 गोलियां लगी

आंदोलन संगरिया के साथ-साथ भादरा व चूरू में भी चल रहा था। उस दिन दोपहर में सैकड़ों किसान जुलूस के रूप में गिरफ्तारी देने के लिए नारेबाजी करते हुए तहसील गए। वहां बातचीत का दौर चला। इस दौरान पुलिस की गोलियां चलने से अफरा-तफरी मच गई। पुलिस की गोलियां लगने से 8 किसान मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। गोलियां लगने से मैं भी घायल हो गए। पांव में पांच गोलियां लगीं।

इससे पहले धारा 144 लगी हुई थी, लेकिन सरकार ने गोलीकांड के बाद शहर में कर्फ्यू लगा दिया। बीकानेर के महाराजा करणीसिंह, जयपुर की महारानी गायत्रीदेवी आदि यहां पहुंचे और घायल किसानों से मिले। इस गोलीकांड के विरोध व शहीद किसानों को श्रद्धांजलि देने के लिए हर साल यहां 7 जनवरी को किसान शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन किसान शहीद स्मारक खालसा स्कूल समिति की ओर से शहीदाें की याद में गुरूद्वारा साहिब में अरदास की जाती है। (जैसा कि मदनपाल भोबिया ने बताया)

नहरों में पानी बढ़ाने की मांग व सीलिंग एक्ट कानून का विरोध, किसानों ने दी थीं गिरफ्तारियां

राजस्थान नहर में 1966 में 15 हजार क्यूसेक के आस-पास पानी आया। नहरों का निर्माण नहीं होने से पानी खुला ही बह रहा था। उसी वक्त सीलिंग एक्ट भी आ गया। चौ. कुम्भाराम आर्य, प्रो.केदार, स. गुरदयाल सिंह आदि ने किसान संघर्ष समिति बनाकर भाखड़ा एव गंग कैनाल में सिंचाई सघनता व पानी बढ़ाने सहित सीलिंग एक्ट का विरोध करने के आंदोलन की शुरुआत की। तीन अक्टूबर 1969 को अनूपगढ़ में सरकारी भूमि की नीलामी रखी गई। नीलामी का विरोध करने के लिए रेलगाड़ी से कामरेड श्योपतसिंह मक्कासर व हेतराम बेनीवाल के नेतृत्व में कुछ लोग वहां गए। आउटर पर गाड़ी रोककर जत्था नीलामी स्थल की ओर बढ़ा। दूसरी तरफ रायसिंहनगर से योगेन्द्र हांडा के नेतृत्व में एक दल नीलामी का विरोध करने दूसरे रास्ते से पहुंचा। नीलामी के दौरान विरोधियों और पुलिस में जबरदस्त टकराव भी हुआ। पुलिस के बर्बर लाठीचार्ज में हांडा गंभीर घायल हुए। हांडा, श्योपतसिंह व बेनीवाल सहित सैकड़ों किसानों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। (जैसा कि ओम जांगू ने बताया)

ये थी किसानों की प्रमुख मांगें: वाटरमेंट माफ करना। राजस्थान कैनाल, जोकि अब इंदिरा गांधी कैनाल है से पानी भाखड़ा व गंगकैनाल को देना। राजस्थान कैनाल क्षेत्र में कृषि भूमि की खुली नीलामी राेकने तथा कमजोर-भूमिहीन किसानों के हित में नि:शुल्क आवंटित करने आदि मांगों को लेकर किसान आंदाेलनरत थे। उस वक्त प्रधानमंत्री इंदिरा ने राजस्थान के मुख्यमंत्री को टेलीफोन पर नीलामी रोकने, भूमिहीनों, कम भूमि वालों को भू-आवंटन के निर्देश दिए।

आज होगी किसानों की नई धानमंडी में महासभा
किसान नेता प्रो. ओम जांगू ने बताया कि 7 जनवरी 1970 को किसान आंदोलन में पुलिस की बर्बर गोलीबारी में शहीद हुए संगरिया, चूरू, भादरा के किसानों को श्रद्धांजलि देने के लिए संगरिया की नई धानमंडी में किसानों, मजदूरों और व्यापारियों की महासभा 7 जनवरी को दोपहर 12 बजे रखी गई है।

उन्होंने गांवों से अधिक से अधिक संख्या में किसानों-मजूदरों को पहुंचने की अपील की है। जांगूृ ने बताया कि इस महासभा में सभी एकजुट होकर काले कानूनों को वापिस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून बनाने की मांग को लेकर संघर्ष करने का संकल्प लेंगे। शहीदों की याद में सात जनवरी 1978 में गुरुद्वारा साहिब के भवन में किसान शहीद स्मारक खालसा स्कूल के नाम से स्थापित किया गया।

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