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लापरवाही बढ़ा रही पाबंदियां:मई के पांच दिनों में 46 मौतें; कोरोना एपि-सेंटर बने 9 जिलों में हम भी, संभले नहीं इसलिए 10 से सख्त लॉकडाउन झेलिए

हनुमानगढ़एक महीने पहले
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  • 798 नए रोगी, 6 की मौत

जिले में कोरोना का संक्रमण के साथ ही मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। इस बीच गुरुवार को आई रिपोर्ट में 798 नए पॉजिटिव रोगी मिले जबकि 6 और रोगियों ने दम तोड़ दिया। राहत की बात है कि गुरुवार को पहली बार एक दिन में 623 रोगी स्वस्थ हुए। चिंताजनक बात है कि अप्रैल के बाद मई माह की शुरुआत में भी कोरोना खतरनाक बना हुआ है।

हालत यह है कि पिछले वर्ष प्रदेश में कोरोना से बचाव वाले जिलों में शामिल हमारा हनुमानगढ़ अब प्रदेश के सर्वाधिक तेजी से संक्रमित (एपि-सेंटर) होने वाले 9 जिलों में आ गया है। हनुमानगढ़ जिले की इससे बुरी स्थिति क्या होगी कि प्रदेश के 61 फीसदी मरीज और 70 प्रतिशत मौतें जिन जिलों में हो रही हैं उसमें हमारा जिला शामिल है। वहीं रिकवरी के मामले में भी हनुमानगढ़ सबसे कम रिकवरी वाले 5 जिलों में है।

जिले का रिकवरी रेट महज 43 फीसदी है। इसके लिए काफी हद तक प्रशासन की ढिलाई जिम्मेदार है। हालत यह है कि ऑक्सीजन रिफिलिंग प्लांट लगने के बाद भी जिला प्रशासन ऑक्सीजन लिक्विड टैंकर तक नहीं मंगवा पा रहा है और हमारे जिले का ऑक्सीजन आपूर्ति सिस्टम दूसरे जिलों के हाथ में है।

ऐसे में ऑक्सीजन सिलेंडर भरवाने के लिए रोजाना दूसरे जिले के अधिकारियों के साथ माथापच्ची में संकट की स्थिति बरकरार है। हालत यह है कि संक्रमण के फैलाव के बाद प्रशासन अब काँटेक्ट ट्रेसिंग की बात कह रहा है अगर 15 दिन पहले होम क्वारेंटाइन की मॉनिटरिंग को लेकर सख्ती बढ़ाई होती तो शायद जिले के यह हालात नहीं होते।

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अस्पताल में बेड बढ़ा दिए लेकिन कर्मचारी है नहीं
कोरोना से जिले को बचाने के लिए प्रशासन अभी तक कोई ठोस प्लान नहीं बना पाया है। कलेक्टर ने जिला अस्पताल में बैड की संख्या बढ़ाकर 200 करने के आदेश दिए लेकिन मैन पावर और लोजेस्टिक स्पोर्ट को लेकर कोई इंतजाम नहीं है। फिल्हाल 150 बैड ही हैं जिसमें अधिकांश फुल है। इसलिए प्रशासन को चिकित्सा सुविधा को देखते हुए कुछ नए प्लान बनाने की जरूरत है।

पिछली बार से रोगी ज्यादा फिर भी ओपीडी शिफ्ट नहीं
पिछले वर्ष अप्रैल माह में महज 11 रोगी थे और जिला अस्पताल की ओपीडी को शिफ्ट कर पूरी तरह से कोविड डेडिकेटेड बना दिया गया था। अब 6500 से अधिक पॉजिटिव केस होने के बाद भी ऐसी कोई व्यवस्था नहीं। नतीजा, ओपीडी मे रोजाना 700 से अधिक रोगियों और उनके परिजनों सहित 1500 से अधिक लोगों का मूवमेंट हो रहा है जोकि संक्रमण का खतरा बढ़ा रहा है।

आईएमए का प्रस्ताव लेकर भूला प्रशासन
प्राइवेट अस्पताल संचालकों ने पिछले वर्ष कोरोनाकाल में ओपीडी संचालन में सहयोग किया था। इस बार भी आईएमए ने प्रस्ताव दिया लेकिन प्रशासन प्लान को सिरे नहीं चढ़ा पाया। प्राइवेट अस्पतालों में कोविड के ईलाज की व्यवस्था नहीं है जबकि श्रीगंगानगर में 6 कोविड डेडिकेटेड निजी अस्पताल हैं। जिला अस्पताल स्टाफ में 12 से अधिक संक्रमित हो चुके हैं। टाउन में हिसारिया अस्पताल को अधिकृत किया हुआ है जहां पर वीआईपी मरीजों को यह कहकर भर्ती किया जाता है कि ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन की व्यवस्था उनको खुद करनी होगी।

ऑक्सीजन लिक्विड टैंकर तक नहीं मंगवा पाए
जंक्शन के रीको सेकंड फेज में रिफलिंग प्लांट लग चुका है और गत 23 अप्रैल को पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन(पेसो) ऑक्सीजन लिक्विड स्टोरेज की एनओसी भी जारी कर चुका है। जिला प्रशासन न तो लिक्विड का टैंकर मंगवा पा रहा और न ही कोटे के मुताबिक ऑक्सीजन ले पा रहा है। जिले का ऑक्सीजन सिलेंडर रिफिलिंग सिस्टम दूसरे जिलों पर निर्भर है और जिला अस्पताल में ऑक्सीजन सिस्टम हांफ रहा है। ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए रोजाना अस्पताल की टीम को श्रीगंगानगर जाना पड़ रहा है।

कोरोना कोर कमेटी की बैठक तक नहीं हो रही
तत्कालीन कलेक्टर की ओर से रोजाना कोरोना कोर कमेटी की बैठक लेकर स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य अधिकारियों से फीडबैक के साथ समीक्षा की जाती थी। अब इस तरह की नियमित तौर पर कोई बैठक नहीं हो रही है। ऐसे में कोरोना संक्रमण को लेकर पहले से जो प्लान बन सकते हैं वह अब नहीं बन पा रहे हैं। नतीजा ये है कि संक्रमण की दर दिनों-दिन बढ़ रही है।

इंडोर सुविधा को लेकर भी कोई प्रबंध नहीं किए गए
कोविड के अलावा अन्य इंडोर फेसिलिटी के लिए पिछली बार 3-4 प्राइवेट अस्पतालों में व्यवस्था की गई थी। इसमें मेडिसिन के मरीज महावीर अस्पताल, ऑर्थो सर्जरी के प्रदीप सहारण अस्पताल, गायनीक सर्जरी के बॉम्बे अस्पताल एवं पीडियाट्रिक के लिए डॉ. खोसा अस्पताल में व्यवस्था की गई थी लेकिन इस बार कोई व्यवस्था नहीं की गई है। नतीजा, रोगी परेशान हैं।

इन 6 रोगियों ने दम तोड़ा
कोविड वार्ड में गुरुवार को भंवर सिंह (62) पुत्र दुलसिंह राजपूत पुलिस थाना के पास हनुमानगढ़, प्रेमलता (45) पत्नी बिरमदेव वार्ड 24 रावतसर, रामेश्वरलाल(59) पुत्र किशनाराम 4 एनडब्ल्यूडी रामपुरा मटोरिया रावतसर एवं धन्नाराम(45) पुत्र बलवंत वार्ड 18 रामगढ़, सावित्री(60) पत्नी कुंभाराम गांव सरदारपुरा खर्था एवं धन्नाराम(45) पुत्र बलवंत वार्ड 18 गांव रामगढ़ ने दम तोड़ दिया। मई के पांच दिनों में 46 मौतें हो चुकी हैं और 2604 नए रोगी मिल चुके हैं।

भादरा में बेड 10 से 20

भादरा|सरकारी अस्पताल में बनाए कोविड डेडिकेटेड वार्ड में अब बेड की संख्या 10 से 20 कर दी गई है। इसमें 11 मरीज इलाज करवा रहे हैं। प्रशासन ने रोगियों की बढ़ती संख्या देख कर यूनानी अस्पताल भादरा में 25 बैड का कोविड डेडिकेटेड सेंटर्स तैयार किया है। वहीं भादरा के विवेकानंद अस्पताल में 28 बैड का कोविड अस्पताल शुरू हो गया है। फिलहाल विवेकानंद अस्पताल के कोविड अस्पताल मे 25 मरीज भर्ती हैं। जबकि सुखद बात यह है कि यहां रोजाना 6 से 7 रोगी स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं।

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