धान की पराली जलाने पर जुर्माना:निस्तारण के लिए उपकरण चाहिए, सरकार डेढ़ साल से कर रही अनदेखी

हनुमानगढ़एक महीने पहले
  • कॉपी लिंक

जिले में धान की हार्वेस्टिंग का काम शुरू हो गया है। इस बार धान का कुल बवाई क्षेत्र 34 हजार 730 हेक्टेयर है। धान की सरकारी खरीद के लिए तो किसान संघर्ष कर ही रहे हैं, लेकिन अब अवशेष (पराली) को नष्ट करना भी उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

अवशेष मिट्टी में मिलाने के लिए किसानों के पास महंगे कृषि यंत्र नहीं है और जलाने पर प्रशासन की ओर से एनजीटी के निर्देश पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाती है। प्रशासन की ओर से लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व किसानों को अनुदान पर 1500 उपकरण उपलब्ध करवाने की कार्य योजना सरकार को भिजवाई गई थी, लेकिन अब तक नाम मात्र के छोटे कृषि यंत्र ही मिले हैं।

जानकारी के अनुसार अवशेष प्रबंधन के लिए हैप्पीसीडर, रोटावेटर, बैलर, चौपर, स्ट्रारीपर, मल्चर की आवश्यकता पड़ती है। रोटावेटर की कीमत लगभग एक लाख रुपए है और अन्य उपकरण इससे भी महंगे हैं। उपकरणों की कीमत अधिक होने के कारण काश्तकार इन कृषि यंत्रों को खरीदने में रुची नहीं दिखाते। गेहूं की बिजाई करने के लिए खेतों को तुरंत खाली करने की आवश्यकता पड़ती है।

ऐसे में किसान अवशेष को जला देते हैं। इस पर प्रशासन द्वारा काश्तकारों पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाती है। ऐसे में किसानों को भारी परेशानी होती है। अधिकांश किसान 8 से 10 बीघा तक ही धान की बिजाई वाले हैं। इस कारण वे महंगे उपकरण खरीदने में असमर्थ होते हैं। सरकार अनुदान पर कृषि उपकरण उपलब्ध करवा नहीं रही है।

धान की पराली जलाने पर जुर्माना;

धान के अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि विभाग की ओर से तैयार की गई कार्य योजना में कृषि उपकरणों पर 75 प्रतिशत अनुदान देने की सिफारिश की गई थी। इतना अगर अनुदान मिले तो किसान कृषि यंत्र खरीद सकते हैं। कार्य योजना में हेप्पीसीडर/सुपरसीडर पर 2.25 लाख, रोटावेटर पर 0.75 लाख, बैलर (14-16 किग्रा) पर 6 लाख, चौपर पर 1.50 लाख, स्ट्रारीपर पर 2.62 लाख और मल्चर पर 1.87 लाख रुपए अनुदान की सिफारिश की गई थी।

किसानों, गोशालाओं व संस्थाओं को 1500 उपकरण मांगे गए थे। अगर पर्याप्त संख्या में कृषि यंत्र उपलब्ध हो जाए तो किसान पराली का प्रबंधन आसानी से कर सकते हैं। उपकरण नहीं मिलने की स्थिति में हर बार की तरह इस बार भी किसान पराली जलाएंगे और प्रशासन जुर्माना लगाने की कार्रवाई करेगा। इससे किसानों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनेगी।

सांसद निहालचंद ने भी सीएम गहलोत को लिखा था पत्र

सांसद निहालचंद ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर जिले के किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र अनुदान पर उपलब्ध करवाने का आग्रह किया था। पत्र में बताया था कि दोनों जिलों में काफी क्षेत्र में किसान धान की खेती करते हैं। एनजीटी ने पराली जलाने पर रोक लगा रखी है और आधुनिक यंत्र नहीं होने के कारण किसान अवशेष जमीन की जुताई कर दबा नहीं सकते।

अनुदान पर मांगे गए कृषि उपकरणों की संख्या और कीमत एक नजर में

उपकरण संख्या अनुमानित कीमत
हेप्पीसीडर 173 3.00
रोटावेटर 555 1.00
बैलर 149 8.00
चौपर 105 2.00
स्ट्रारीपर 347 3.50
मल्चर 171 2.50
(नोट: अनुमानित कीमत लाख में है।)

खबरें और भी हैं...