धोरों में ‘पैंगोंग झील’:घग्घर के पानी से धोरों के बीच बनी लद्दाख की पैंगोंग जैसी झीलें, आने लगे विदेशी पक्षी

हनुमानगढ़2 महीने पहले
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फोटो गांव बड़ोपल का है। जहां घग्घर का पानी आने के बाद लेह की पैंगोंग झील सा नजारा दिख रहा है। (यह फोटो डेजर्ट रेडर्स क्लब से गांव हिरनांवाली के हरी सिंह शेरगिल ने दैनिक भास्कर के लिए क्लिक की।) - Dainik Bhaskar
फोटो गांव बड़ोपल का है। जहां घग्घर का पानी आने के बाद लेह की पैंगोंग झील सा नजारा दिख रहा है। (यह फोटो डेजर्ट रेडर्स क्लब से गांव हिरनांवाली के हरी सिंह शेरगिल ने दैनिक भास्कर के लिए क्लिक की।)

फिल्म “3 इडियट्स’, जिसे देखने के बाद सभी लोग लद्दाख स्थित पैंगोंग झील के दीवाने हो गए थे। अगर आप भी पैंगोंग झील देखने के लिए लद्दाख की यात्रा का प्लान बना रहे हैं तो एक बार हनुमानगढ़ के बड़ोपल क्षेत्र भी जरूर घूम कर आएं। वर्तमान में बड़ोपल क्षेत्र के कई हिस्सों में आपको लद्दाख की पैंगोंग झील के नजारों के साथ साथ विदेशी पक्षियों का कलरव भी सुनने को मिलेगा।

एक्सपर्ट- ये कैंपिंग, पिकनिक के लिए बेस्ट जगहों में से एक

डेजर्ट रेडर्स क्लब के अध्यक्ष गुरपिंदर सिंह केपी ने बताया कि क्लब की तरफ से चलाए गए इनक्रेडिबल हनुमानगढ़ अभियान के तहत हम पिछले कई वर्षों से हनुमानगढ़ में टूरिस्ट स्पॉट देखने के लिए यात्रा पर निकलते हैं।

धन्नासर के धोरों का नाम अब दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई में छा चुका है। बड़ोपल के पास घग्गर के पानी से बनी यह झील से पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। प्रशासन और पर्यटन विभाग गौर करे तो हनुमानगढ़ में कैंपिंग, पिकनिक स्पॉट और बर्ड वाचर्स के लिए बड़ोपल बेस्ट जगह बन सकती है।

250 से भी अधिक प्रजाति के पक्षी साइबेरिया, चीन व आस्ट्रेलिया से आएंगे

घग्घर में पानी की आवक होने के बाद बड़ोपल सहित आस-पास के गांवों में जलभराव के क्षेत्र एक झील का रूप ले लेते हैं। पानी की बहुतायत होने के बाद यहां साइबेरिया, चीन और आस्ट्रेलिया से पक्षियों का झुंड आता है। इनमें वाटर फ्लेमिंगो, कोमन सेल्डक, स्पूनबिल, फेलिकंस, डार्टर, डोमोईसले क्रेन, ग्रेल, पिंनटेल, गीज़ सहित 250 से अधिक प्रजातियों के पक्षी शामिल हैं।

कब और कैसे पहुंचे - कैंपिंग और बर्ड वाचिंग के लिए सितंबर से जनवरी का समय बेस्ट है। कार या बाइक से पीलीबंगा से बड़ोपल को लिंक रोड और सूरतगढ़ से रावतसर लिंक रोड का इस्तेमाल करें। कुछ दूर जाने के बाद सड़क से ही झील दिखाई देने लगती है।