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ये देखिए प्रदूषण बोर्ड की नाकामी:खुले में फेंका जा रहा है फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी, हवा चलते ही शहरवासियों को सांस लेने में भी होती है दिक्कत

हनुमानगढ़2 महीने पहले
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  • सीईटीपी प्लांट नहीं बनने से हो परेशानी

जिला मुख्यालय स्थित रीको इंडस्ट्रियल एरिया में फैक्ट्रियों से निकल रहा केमिकल युक्त पानी प्रदूषण का कारण बन रहा है। विडंबना यह है कि इस तरफ ना तो प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, ना प्रशासन और ना ही रीको कोई एक्शन ले रहा है। रीको इंडस्ट्रियल एरिया में करीब 200 फैक्ट्रियां हैं। इनमें से करीब 50 फैक्ट्रियां वाटर डिस्चार्ज करती हैं। रीको अधिकारियों की मानें तो प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारी प्रदूषण की कभी जांच करने ही नहीं आते हैं। बोर्ड की अनदेखी के कारण यहां जलीय प्रदूषण चरम पर है।

दूसरी तरफ यहां से निकली दूषित बदबूदार हवा डिस्ट्रिक पार्क तक लोगों को परेशान करती है। वहीं जब भास्कर ने ईटीपी के बारे में रीको अधिकारियों से जवाब-तलब किया तो किसी भी फैक्ट्री में ईटीपी नहीं लगा होने की बात सामने आई। आमजन की मानें तो प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को शिकायत भी की जाए तो वे सिर्फ नोटिस देने की खानापूर्ति कर लेते हैं, कार्रवाई कभी नहीं होती है।

ये हैं नियम: जब फैक्टरी शुरू होती है उसमे ईटीपी प्लांट लगा होना चाहिए। बिना ईटीपी प्लांट के प्रदूषण बोर्ड उस फैक्टरी को एनओसी भी जारी नहीं करता है। कुछ फैक्टरी संचालक बिना एनओसी के ही फैक्ट्री लगा लेते हैं। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की अनदेखी की वजह से यही फैक्ट्रियां प्रदूषण फैलाती हैं। अगर विभागीय अधिकारी समय समय पर जांच करें तो प्रदूषण से मुक्ति मिल सकती है।

रीको फेज 2 बाइपास के पास बन चुका है गंदे पानी का समंदर

बिना ईटीपी प्लांट की वजह से प्रदूषित पानी सीधा नालियों में गिरता है। यह पानी रेलवे लाइन के पास सड़क के दूसरी तरफ इकट्ठा होता है। यहां यह पानी सड़ जाता है और हाउसिंग बोर्ड से लेकर सिविल लाइन तक के लोग इसकी बदबू से परेशान हो उठते हैं। इसी पानी को रीको प्रबंधन पंप के सहारे बाईपास स्थित फेज 2 के पास बहा देता है। इन दिनों यह प्रदूषित पानी इतना ज्यादा मात्रा में इकट्ठा हो चुका है कि यहां समंदर बन चुका है। सड़क के दूसरी तरफ भी प्रदूषित पानी इकट्ठा होने लगा है। इस पानी की बदबू इतनी गंदी और तेज है कि शीशे बंद कार में भी लोगों को नाक पर कपड़ा रखना पड़ता है। रीको की नालियां भी इस गंदे पानी से ओवरफ्लो हो चुकी हैं।

सिर्फ कागजों में चल रहे ईटीपी प्लांट प्रदूषण विभाग जांच तक नहीं करता
जो भी फैक्ट्री वाटर डिस्चार्ज करती है उसको ईटीपी प्लांट लगाना बेहद जरूरी है। ताकि गंदा पानी ट्रीट करके फैक्ट्री संचालक उसे फिर से इस्तेमाल कर सके। लेकिन फैक्ट्रियों में ईटीपी प्लांट लगा है या नहीं इसकी अभी तक जांच ही नहीं हुई है। रीको अधिकारियों की मानें तो प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों ने भी आजतक इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई नहीं की। यह मुद्दा आमजन की सेहत से जुड़ा है फिर भी विभागीय अधिकारी इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।

आमजन की सेहत पर पड़ रहा विपरीत प्रभाव, कैंसर रोग को बढ़ावा
इंडस्ट्रियल एरिया से निकलने वाले गंदे पानी में केमिकल्स बहुत ज्यादा मात्रा में होते हैं। डॉक्टर्स की मानें तो यह केमिकल भी कैंसर जैसे रोग को बढ़ावा देते हैं। अगर इस दूषित पानी में मक्खी मच्छर बैठे और घर तक पहुंचे तो पेट की बीमारियों जैसे टाईफाईड, उलटी, दस्त और स्किन संबंधित बीमारियां पैदा होती हैं। वहीं फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुंए से सांस की बीमारियां और फेफड़ों का कैंसर भी बढ़ता है।

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