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उर्वरकता बढ़ाने के लिए अभियान:रसायनिक उर्वरक के इस्तेमाल से बिगड़ रही जमीन की सेहत जैविक कार्बन 0.30 %हुआ, कृषि विभाग चलाएगा अभियान

हनुमानगढ़2 महीने पहले
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  • आत्मा परियोजना करेगा गांव-गांव जाकर किसानों को जागरुक

जिले में खेती की जमीनों में साल-दर-साल जैविक कार्बन कम होते जा रहे हैं। वर्तमान में जमीनों का जैविक कार्बन औसतन 0.30 प्रतिशत हो गया है जो न्यूनतम मापदंड 0.50 प्रतिशत से भी 20 फीसदी कम है। स्वस्थ मृदा में जैविक कार्बन 0.75 प्रतिशत होता है।

यानी पोषक तत्वों की कमी काफी चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। अब कृषि विभाग आत्मा परियोजना कार्यालय की ओर से मृदा जैविक कार्बन अभियान चलाकर किसानों को जागरूक किया जाएगा। अभियान के माध्यम से जमीन में जैविक कार्बन कम होने के कारण व बढ़ाने के उपाय बताए जाएंगे। विभाग की ओर से अभियान की समस्त तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। शीघ्र ही गांव-गांव पहुंचकर काश्तकारों को पोषक तत्व घटने से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जाएगा। इसके साथ जमीन में जैविक कार्बन बढ़ाने संबंधी फोल्डर का भी वितरण किया जाएगा। उपनिदेशक कृषि (आत्मा परियोजना)जयनारायण बेनीवाल के अनुसार अगर मृदा जैविक कार्बन बढ़ाने के प्रति किसान किसान अब जागरूक नहीं हुए तो आने वाले समय में स्थिति काफी विकट हो जाएगी।

पोषक तत्वों की कमी के कारण फसलों की पैदावार काफी घट चुकी है। तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव फसलें सहन नहीं कर पाती और उत्पादन प्रभावित होता है। खरीफ सीजन में बड़े स्तर पर बीटी कपास की फसलें शॉट मारने से खराब हो गई थी। इसका कारण जैविक कार्बन की कमी था।

100 किलो मिट्‌टी में मात्र 300 ग्राम जैविक कार्बन, इस कारण घट रही जमीनों की उर्वरा शक्ति
जिले की जमीनों में औसत जैविक कार्बन 0.30 प्रतिशत है। यानी 100 किलो मिट्‌टी में मात्र 300 ग्राम ही जैविक कार्बन रह गया है। कम से कम 500 ग्राम जैविक कार्बन होना जरूरी है। स्वस्थ मृदा में 750 ग्राम जैविक कार्बन पाया जाता है। दिनों-दिन कम हो रहे जैविक कार्बन के कारण जमीनों की उर्वरा शक्ति घट रही है। इस कारण फसलों की पैदावार में काफी गिरावट आ गई है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार फसल अच्छी स्थिति में होने के बावजूद उत्पादन बहुत कम होता है। इसके साथ अचानक मौसम बदलने से ही फसलों को नुकसान हो जाता है। यह जैविक कार्बन की कमी के कारण ही हो रहा है। ऐसे में काश्तकारों को जागरूक होकर पोषक तत्व बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए।

जैविक कार्बन कम होने के 3 बड़े कारण

1. रसायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग कर किसान उत्पादन अधिक लेने का प्रयास करते है। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है।
2. किसान जैविक खाद का बहुत कम प्रयोग करते हैं। कई जगह बिल्कुल ही जैविक खाद नहीं डाली जा रही। इसका कृषि भूमि पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
3. अधिक पैदावार के लिए किसान अंधाधुंध रसायनिक उर्वरक भूमि में डालते हैं। लगातार अधिक उपयोग भी जैविक कार्बन घटने का मुख्य कारण है।

जैविक कार्बन के कम होने से 3 बड़े नुकसान
1.
जैविक कार्बन कम होने से जमीनों की उर्वरा शक्ति कम होने से फसलों के उत्पादन में काफी गिरावट आ रही है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
2. जैविक कार्बन की कमी के कारण ज्यादा-कम तापक्रम, दिन-रात के तापक्रम में अधिक अंतर, अधिक ठंड व पाला से फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
3. फसलों पर कीटों व बीमारियों का अधिक प्रकोप होता है। कम पोषक तत्वों वाली जमीन में उत्पादित धान खाने से मनुष्य के स्वास्थ्य पर कुप्रभाव पड़ता है।

जैविक कार्बन बढ़ाने के ये हैं 3 मुख्य उपाय
1.
गोबर की खाद, कंपोस्ट, सिटी कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट, गोबर गैस प्लांट की सलरी, भेड़-बकरी, मुर्गी की खाद का जमीन में छिड़काव करना चाहिए।
2. फसल अवशेष को जलाने या बेचने की बजाए भूमि में ही डालना चाहिए। जैसे सरसों व ग्वार की तूड़ी सहित विभिन्न फसलों के अवशेष जुताई से पहले डालने चाहिए।
3. हरी खाद भी काफी उपयोगी होती है। हरी खाद की फसलों में ढैंचा मुख्य है। लवणीय एवं क्षारीय भूमि को सुधारने में इसका विशेष योगदान होता है।

भास्कर नॉलेज: पोषक तत्वों में 90 फीसदी योगदान कार्बन, हाइड्रोजन व ऑक्सीजन का
फसल उत्पादन के लिए जरूरी तत्वों का 90 प्रतिशत भाग कार्बन, हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन, 6 प्रतिशत भाग नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा पोटाश व शेष 4 प्रतिशत भाग सल्फर, मैगनिशियम, कैल्सियम, जिंक, लोहा (आयरन), मैंग्नीज, बोरोन, कॉपर, मोलीब्डेनम तथा क्लोरीन का होता है। जमीन की ऊपरी 12 इंच परत में जितना जैविक पदार्थ पाया जाता है उसका 60 प्रतिशत भाग ऊपर की 2.5 इंच मृदा में पाया जाता है। यानी मिट्‌टी की 12 इंच की गहराई तक मिट्‌टी द्वारा पानी तथा पोषक तत्व रोकने व सप्लाई करने की क्षमता पर जैविक पदार्थों का बहुत प्रभाव पड़ता है। वृक्षों को छोड़कर सभी फसलें मिट्‌टी की ऊपरी 9 से 10 इंच की गहराई से पोषक तत्व तथा पानी लेती है।

जिले की जमीनों में जैविक कार्बन चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुका है। अगर अब किसान इसके प्रति जागरूक नहीं हुए तो आने वाले समय में फसलों की पैदावार काफी प्रभावित होगी। मृदा जैविक कार्बन अभियान के माध्यम से गांवों में जाकर किसानों उपयोगी जानकारी दी जाएगी।-जयनारायण बेनीवाल, उपनिदेशक कृषि (आत्मा परियोजना), हनुमानगढ़

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