नवरात्र शुरू:इस बार अश्व पर सवार होकर आएगी मां, ज्योतिष शास्त्री के अनुसार जनता में बढ़ेगा आक्रोश, युद्ध की स्थिति बनेगी

हनुमानगढ़8 महीने पहले
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  • आज से 9 दिन घर रहकर संक्रमण से बचें, पूरे विधान से करें आराधना

नवरात्र का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि इसी दिन शुभ विक्रम संवत्सर की शुरुआत होती है। ये दिन हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी माना जाता है। इस बार नव वर्ष 2078 आनंद नामक संवत्सर है लेकिन इस बार कोरोना के चलते मंदिरों में पूजा करने का मौका नहीं है। इसलिए नौ दिन घर में रहकर पूजा की जा सकती है साथ ही संक्रमण से बचा जा सकता है। बांके बिहारी मंदिर के पंडित अनुराग शर्मा ने बताया इस वर्ष माताजी का आगमन अश्व यानी घोड़े पर होगा।

मंगलवार को एकम तिथि सुबह 10.16 बजे तक है। घटस्थापना व कलश स्थापना का मुहूर्ति चर वेला में सुबह 9: 22 से लेकर 10: 57 बजे तक, लाभ का सुबह 10: 58 से 12: 33 तक एवं अमृत 12: 34 स दोपहर 2: 10 बजे तक रहेगा। माता का वाहन अश्व होने के कारण देश में आपत्ति, विपदा, सकंट बढ़ेगा।

क्योंकि यह युद्ध का स्वभाव है। जनता में आक्रोश बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि नवरात्रि में नौ दिनों में माता के नौ रूपों की पूजा करने का विशेष विधि-विधान है। साथ ही इन दिनों व्रत,-अनुष्ठान, यज्ञ-दान आदि शुभ कार्य करने से व्यक्ति को पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।
दैनिक भास्कर की पहल....घर बैठे माता रानी के करवाएंंगे दर्शन, पहले दिन मां शैलपुत्री की कहानी...
मां शैलपुत्री सती के नाम से भी जानी जाती हैं। एक बार प्रजापति दक्ष ने यज्ञ करवाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण भेज दिया, लेकिन भगवान शिव को नहीं। देवी सती जानती थी कि उनके पास निमंत्रण आएगा, ऐसा नहीं हुआ। लेकिन भगवान शिव ने मना कर दिया।

उन्होंने कहा कि उनके पास कोई भी निमंत्रण नहीं आया है और इसलिए वहां जाना उचित नहीं है। सती नहीं मानीं, शिव को उनकी बात माननी पड़ी और अनुमति दे दी। सती जब अपने पिता प्रजापति दक्ष के यहां पहुंची तो देखा कि सारे लोग मुंह फेरे हुए हैं और सिर्फ माता ने उन्हें गले लगाया। बाकी बहनें उनका उपहास उड़ा रहीं थीं, सती दुखी हो गईं। सती ने उसी यज्ञ की अग्नि में खुद को स्वाहा कर अपने प्राण त्याग दिए। शिव ने उस यज्ञ को ध्वस्त कर दिया। इसी सती ने फिर हिमालय के यहां जन्म लिया, वहां जन्म लेने की वजह से इनका नाम शैलपुत्री पड़ा।

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