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विश्व तंबाकू निषेध दिवस:टाउन की ख़ुशी अपनी कविताओं से और फतेहगढ़ का दीपू शायरी से छुड़वा रहे लोगों की तंबाकू खाने की आदत

हनुमानगढ़21 दिन पहले
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  • स्वास्थ्य विभाग की इस वर्ष की नई थीम...तंबाकू छोड़ने को प्रतिबद्ध हैं

‘नशे की लत ने कैसा ये हाल कर दिया, कितनों की जिंदगियों को बर्बाद कर दिया, बिखेर दिया हंसते परिवारों को, खुशियों को हमारी गिरफ्त से आजाद कर दिया, इस नशे की लत ने कैसा ये हाल कर दिया।’ यह कविता टाउन स्थित पंजाबी मोहल्ला निवासी 9 वर्षीय ख़ुशी सिंघल ने लिखी है। ख़ुशी लोगों को जागरूक करने के लिए अभी तक इस तरह की 20 से अधिक कविताएं लिख चुकी हैं। 30 से अधिक कार्यक्रमों में जाकर लोगों को नशे और तंबाकू के दुष्प्रभाव बता चुकी है।

इसके साथ ही नशा मुक्ति केंद्र, स्कूलों में, जंक्शन स्थित ब्रह्माकुमारी आश्रम में भी ख़ुशी कविताओं और नाटक के जरिए तंबाकू और नशा छोड़ने के लिए सबको जागरूक करती है। ख़ुशी बताती हैं कि धूम्रपान करना बहुत बुरी बात है। अगर किसी को एक बार आदत पड़ जाती है तो छोड़ने के लिए पूरा जन्म भी कम पड़ जाता है। यह आदत अपनी कंट्रोलिंग पॉवर से ही छोड़ा जा सकता है। परमपिता परमात्मा से नाता जोड़ हम ऐसे ही बहुत ही बुरी आदतों को छोड़ सकते हैं। ख़ुशी के पिता अशोक कुमार सिंघल टिब्बी स्वास्थ्य विभाग में अकाउंटेंट है। अभी कोरोना के चलते वे ऑनलाइन कार्यक्रमों में अपनी कविताओं के जरिए सभी को नशा और तंबाकू से दूर रहने का संकल्प दिलाती हैं।

गांव फतेहगढ़ निवासी 10 वर्षीय दीपू अब तक गांव के 35 लोगों की तंबाकू खाने की आदत छुड़वा चुका है। 15 अगस्त 2020 को नशा मुक्त भारत अभियान के आगाज के अवसर पर राजस्थान में सर्वप्रथम जिला हनुमानगढ़ में नशा मुक्त भारत अभियान के तहत रथ यात्रा रवाना की गई रथयात्रा जब ग्रामीण इलाकों से होते हुए गांव फतेहगढ़ पहुंची थी तो दीपू की जागरूकता देखते हुए तंबाकू मुक्त भारत अभियान से जोड़ा गया। वह दो-दो लाइन की शायरी लिखते हुए सभी को तंबाकू के दुष्प्रभाव बताता है। दीपू बताता है कि एक सिगरेट पीने वाले के नजदीक बैठे व्यक्ति के लिए भी तंबाकू का धुआं उतना ही नुकसानदेह है, जितना कि सेवन करने वाले के लिए।

गांव में अगर किसी को हुक्का या बीड़ी, सिगरेट पीते हुए देखता है तो भी उससे रहा नहीं जाता और वह उसे तंबाकू छोड़ने के लिए प्रेरित करता है। उसने बताया कि शराब, गुटका, बीड़ी, सिगरेट, जुआ हर परिवार के लिए बर्बादी का कारण बनते हैं। दीपू के पिता देवीलाल खेती-बाड़ी का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि दीपू गांव में किसी को भी जर्दा-बीड़ी सुलगाते देखता है तो उसे जरूर टोक कर आता है। कुछ ग्रामीण उसके इस टोकने की आदत को अच्छा मान तंबाकू छोड़ चुके है।

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