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बेलगाम महंगाई:पेट्रोल जिले में 100 पार हुआ तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बाइक रेहड़ी पर ही रख ली, फिर प्रदर्शन, नारेबाजी की

हनुमानगढ़14 दिन पहले
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  • 9 माह में बढ़ी महंगाई पर भास्कर की पड़ताल - सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल सहित राशन-सब्जी के दाम भी बढ़ने से हर परिवार पर 5 हजार प्रतिमाह अतिरिक्त बोझ बढ़ा

“सखी सईयां तो खूब ही कमात है, महंगाई डायन खाय जात है’। फिल्म ‘पीपली लाइव’ का यह गीत काफी लोकप्रिय हुआ था। इस गाने की एक पंक्ति है “हर महीने उछले पेट्रोल, डीजल का उछला है रोल’। दरअसल, हम आपको यह गाना नहीं सुना रहे बल्कि अवगत करवा रहे हैं कि पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतें दिनों दिन मध्यम वर्गीय परिवार की कमर तोड़ रही है। बढ़ते दामों की वजह से तो सब्जी, दालें, राशन सहित हर एक चीज़ महंगी हो गई है। सामान्य परिवार की बात करें तो इस महंगाई की वजह से हर परिवार पर 5 से 6 हजार रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

यह स्थिति तब है जब आम आदमी कोरोना की मार से उबर नहीं पाया है। बहुत से ऐसे परिवार हैं जिनकी नौकरी कोरोना की वजह से चली गई थी। इसीलिए बहुत से ऐसे परिवार हैं जो बड़ी मुश्किल से घर चला पा रहे हैं। आपको जानकार हैरानी होगी कि महज 9 माह के अंदर ही पेट्रोल डीजल 19 रुपए उछले हैं। 1 जून 2020 में जिले में पेट्रोल 81.06 रुपए प्रतिलीटर और डीजल 73.33 रुपए प्रतिलीटर बिका था। केंद्र और राज्य दोनों सरकारों ने पहले से ही टैक्स, एक्साइज ड्यूटी लगा लगा कर पेट्रोल के रेट बढ़ा दिए थे। वहीं अब तो इनके दाम सरकारों के नियंत्रण से ही बाहर हो चुके हैं।

महज एक वर्ष में ही बिगड़ा घर का बजट
(6 सदस्यों का परिवार- व्यक्ति स्वयं, पत्नी, दो बच्चे एवं माता पिता)

पिछले 1 वर्ष के आंकडे लें तो परिणाम चौंकाने वाले सामने आते हैं। विडंबना यह है कि गत वर्ष मार्च के बाद आए कोरोना की वजह से बहुत से लोगों की नौकरी गई। जो पहले 14-15 हजार कमाते थे वे महज 7-8 हजार प्रतिमाह पर आ गए। मध्यमवर्ग पटरी पर लौटा नहीं था कि पेट्रोल-डीजल सहित रसोई गैस की कीमतें बढ़नी शुरू हो गईं।

ख़ास बात यह है कि रसोई गैस सिलेंडर भी 802.50 रुपए हो गया है और इसमें से सब्सिडी लीक हो चुकी है यानी अब महज 9-10 रुपए की सब्सिडी आ रही है। यही वजह है कि घरेलू सिलेंडर ने घर का बजट बिगाड़ा और डीजल के बढ़ते दाम ने ट्रांसपोर्टेशन महंगी कर दी। ऐसे में खाद्य सामग्री भी 10-14% महंगी हो गई है।

आमजन की पीड़ा सुनिए सरकार! कोरोना के बाद बड़ी मुश्किल से घर का गुजारा चलने लगा था, अब फिर से पड़ रही मार

महंगाई इतनी बढ़ जाएगी कभी सोचा नहीं था। कमाई उतनी ही रह गई लेकिन खर्चे डबल हो गए हैं। मिडिल क्लास फैमिली के लिए घर चलाना बेहद मुश्किल होता जा रहा है। सब्जियां, राशन सब कुछ महंगा मिल रहा है। ना जाने कब राहत मिलेगी। अंकिता सिंह, गृहिणी, जंक्शन

कोरोना के बाद बड़ी मुश्किल से काम मिलना शुरू हुआ था। काम पर जाना होता है तो बाइक ले जानी पड़ती है। वरना ग्राहक का काम समय पर नहीं किया जा सकता। हर महीने अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और कमाई पहले से भी कम हो गई है और खर्चा बढ़ गया। सूरज कुमार, कारपेंटर, जंक्शन

मिडिल क्लास को लूटा जा रहा है और विडंबना यह है कि दोनों ही सरकारें इसमें भागीदार हैं। किसी को भी आमजन की कोई फ़िक्र नहीं। महंगाई कम करने के वादे सिर्फ वादे ही रह जाते हैं। अब तो सरकारों पर से भरोसा उठ गया है कि वे हमें राहत देने के लिए कदम उठाएंगे। अमन शर्मा, टाउन

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