कोरोना से मौत:एक दिन में जलीं सर्वाधिक 18 चिताएं, पिछले माह 85 तो अप्रैल के 29 दिनों में दोनों श्मशान में 175 अंतिम संस्कार

श्रीगंगानगर6 महीने पहलेलेखक: संदीप धामू/मयूर पारीक
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चिताओं का धुआं शवदाह गृह में 7 संस्कार - Dainik Bhaskar
चिताओं का धुआं शवदाह गृह में 7 संस्कार
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सरकार भले ही रोज जारी होने वाली रिपोर्ट में कोरोना से जीरो मौत बता रही हो, लेकिन शहर की दोनों कल्याण भूमि के आंकड़े बताते हैं कि यहां सब ठीक नहीं है। स्थिति यह है कि यहां भी अब महानगरों जैसे हालात हो रहे हैं। पिछले माह मार्च में आम दिनों में दोनों कल्याण भूमि में 85 अंतिम संस्कार हुए, वहीं इस माह के 29 दिनों में 175 चिताएं जल चुकी हैं।

गुुरुवार को दोनों श्मशान घाट में 18 अंतिम संस्कार हुए, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है। इनमें 9 संस्कार कोरोना गाइडलाइन के अनुसार हुए। हनुमानगढ़ रोड कल्याण भूमि की स्थिति तो यह है कि अब वहां शुक्रवार को एक ही संस्कार करने की जगह बची है। दोनों कल्याण भूमि के कर्मी बताते हैं, ऐसे हालात उन्होंने पहले कभी नहीं देखे।

भास्कर ने पदमपुर व हनुमानगढ़ रोड कल्याण भूमि के अंतिम संस्कार के सवा दो वर्षों के आंकड़े देखे तो सामने आया कि कोरोना काल में शोक ज्यादा पसरा है। वर्ष 2019 में शहर में एक महीने में औसतन 125 अंतिम संस्कार हुए। वर्ष 2020 में ये आंकड़ा 146 रहा, जो वर्ष 2021 में 163 प्रति माह तक पहुंच चुका है। डॉक्टराें के अनुसार कोरोना से मौतें हो ही रही हैं। इसका दुष्प्रभाव भी लोगों की जिंदगियां छीन रहा है। पदमपुर रोड श्मशान घाट में इस सप्ताह दूसरी बार ऐसा हुआ कि एक ही दिन में 14 अंतिम संस्कार हुए। इसमें 7 कोरोना रोगी थे, जिनका अंतिम संस्कार गैस शवदाह गृह में किया गया।

दिनभर शवदाह गृह की चिमनी से धुआं उठता ही रहा। 27 अप्रैल को भी यहां 14 संस्कार हुए थे। पदमपुर रोड कल्याण भूमि के अध्यक्ष महेश पेड़ीवाल व अन्य कर्मियों के अनुसार, अपने जीवन में एेसा हाल कभी नहीं देखा। जब सुबह से लेकर शाम तक चिताएं जलती रही।

कोराेना सही हो रहा, कई रोगियों के फेफड़े हो रहे कमजोर...डा. मक्कड़

वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. प्रवीण मक्कड़ ने बताया कि यह सही है कि कोरोना की वजह से कुछ मौतें हो रही हैं। कई बार कोरोना से मुक्त होने के बाद भी रिकवर रोगी के शरीर पर साइड इफेक्ट रह जाता है, जो खतरनाक साबित होता है। फेफड़ों में संक्रमण बढ़ने की वजह कई रोगियों के परमानेंट पल्मोनरी फाइब्रोसिस हो जाता है। इसमें फेफड़े हमेशा के लिए पूरी तरह से कमजोर हो जाते हैं। फेफड़ों के नाजुक हिस्सों में झिल्लियां बन जाती हैं। उनकी सक्रियता कम होने से ऑक्सीजन लेने की क्षमता प्रभावित होती है।

इसमें भी मृत्यु की आशंका ज्यादा रहती है। जिन रोगियों को बीपी, डायबिटीज या कोई अन्य तरह की कोमोर्बिड है, उन्हें भी कोरोना का संक्रमण होना घातक साबित होता है। कोरोना की दूसरी लहर में वायरस का संक्रमण भी ज्यादा घातक साबित हो रहा है।

सरकार का झूठ देखिए... 9 दिन में 5 मौत बताई, हकीकत: 41 ने जान गंवाई: राज्य सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार 21 से 29 अप्रैल तक जिले में 9 दिन में कोरोना से 5 मौत हुई है। हकीकत ये है कि सरकार की ओर से आंकड़ा छिपाया जा रहा है। इस अवधि में अब तक 41 कोरोना रोगियों की मौत हो चुकी है।

इस माह एक में 145 व दूसरे में 30 संस्कार हुए
पदमपुर रोड श्रीकल्याण भूमि में मार्च 2021 में 66 और हनुमानगढ़ राेड स्थित कल्याण भूमि में 19 लाेगाें का अंतिम संस्कार किया गया। अप्रैल 2021 के 29 दिन में 175 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया। इसमें पदमपुर रोड श्मशान घाट में 145 और हनुमानगढ़ रोड श्मशान घाट में 30 शवों का अंतिम संस्कार हो चुका है। करीब 100 कोरोना रोगियों का दाह संस्कार किया गया है।
पदमपुर रोड श्रीकल्याण भूमि में मार्च 2021 में 66 और हनुमानगढ़ राेड स्थित कल्याण भूमि में 19 लाेगाें का अंतिम संस्कार किया गया।

अप्रैल 2021 के 29 दिन में 175 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया। इसमें पदमपुर रोड श्मशान घाट में 145 और हनुमानगढ़ रोड श्मशान घाट में 30 शवों का अंतिम संस्कार हो चुका है। करीब 100 कोरोना रोगियों का दाह संस्कार किया गया है।

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