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कोरोना से सावधान रहें:कोरोना से ठीक हुए लोगों में 33% कमजाेरी, 29% सांस की तकलीफ तो 9% डिप्रेशन के हुए शिकार

श्रीगंगानगरएक महीने पहले
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  • कोरोना से ठीक हुए हैं तो जल्द बेफिक्र मत हों, नियमित व्यायाम करें

कोरोना संक्रमण से रिकवर होने के बाद साइड इफेक्ट हो रहा है। रिकवर रोगियों को शारीरिक तकलीफ और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इनमें में 32.90 प्रतिशत रोगियों को कमजोरी, 28.79 प्रतिशत को सांस में तकलीफ और 8.99 प्रतिशत डिप्रेशन का शिकार भी हो रहे हैं।

जिला अस्पताल के पोस्ट काेविड क्लिनिक पर अब तक 389 कोरोना रिकवर इलाज करवाने पहुंच चुके हैं। इसमें से ज्यादातर कोरोना फोबिया से मानसिक तकलीफ से जूझने लगते हैं, काउंसलिंग से ही ठीक हो रहे हैं।

पोस्ट काेविड क्लिनिक पर पहुंचे रिकवर रोगियों के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार सबसे ज्यादा शारीरिक कमजोरी हो रही है। मानसिक तनाव भी हो रहा है। थकान, बदन व जोड़ों का दर्द, बीपी और शुगर का बढ़ना, सांस की तकलीफ और पेट से संबंधित बीमारियां हो रही हैं। डॉक्टर्स के अनुसार संक्रमित की रिपोर्ट निगेटिव होने के बाद सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना, थकान बढ़ना, हल्का बुखार, जोड़ों में दर्द तो सामान्य है।

जिला अस्पताल के पोस्ट कोविड क्लिनिक में 389 लोग इलाज लेने आए

शारीरिक :फेफड़ों में फ्राइबोसिस बनना

जन सेवा काेविड अस्पताल के प्रभारी व चेस्ट फिजिशियन डॉ. संजय सोलंकी के अनुसार कोरोना वायरस का अटैक फेफड़ों पर ज्यादा होता है। इससे फेफड़ों में संक्रमण बढ़ने से फाइब्रोसिस (एक टिश्यू नष्ट होने के बाद दूसरा बनना) होता है।

पहला टिश्यू खत्म होने के बाद फेफड़ा ऑक्सीजन सोखने और कार्बनडाई ऑक्साइड छोड़ने की प्रक्रिया सामान्य तौर पर नहीं कर पाता। इससे सांस की तकलीफ बढ़ती है। शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। शारीरिक थकान, सांस की तकलीफ, कमजोरी सहित अन्य तकलीफ होने लगती है।

समाधान : ऐसे लोगों को फोर्टिव थैरेपी की जरूरत पड़ती है, जिसमें दवाओं की मदद से तकलीफ दूर की जाती है। ऐसे रोगियों को एनर्जी की ज्यादा जरूरत होती है। समय रहते इलाज शुरू किया जाए तो जल्द रिकवरी की संभावना रहती है। रिकवरी की रफ्तार इस बात पर निर्भर करती है कि फेफड़े पर कोरोना वायरस का कितना प्रभाव पड़ा है।

मानसिक: बीमारी व आर्थिक नुकसान

जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. प्रेमप्रकाश अग्रवाल के अनुसार कोरोना नई बीमारी होने से इसका फोबिया ज्यादा है। संक्रमित व्यक्ति से लोग दूर हो जाते हैं। हर किसी के कन्नी काटने की वजह से संक्रमित की मानसिक परेशानी बढ़ जाती है।

कोरोना ने अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित किया है। काफी लोगों को काराेबार में नुकसान हुआ या राेजगार छिन गया। आर्थिक नुकसान से लोगों को डिप्रेशन भी जकड़ रहा है। भविष्य में भी इसका दुष्प्रभाव रहने की आशंका लोगों को डरा रही है।

यह है समाधान :

ऐसे लोगाें की काउंसलिंग कर मानसिक तौर पर सुदृढ़ करने की जरूरत है। इन्हें संबल देने की जरूरत होती है कि जीवन अमूल्य है। अगर बीमारी से बच गए तो रोजगार के अवसर फिर मिलेंगे। कोरोना वैक्सीनेशन से भी लोगों का हौसला बढ़ रहा है कि वे दो डोज लगने के बाद सुरक्षित हो रहे हैं।

सामान्य रहने के ये 4 टिप्स

30-30 मिनट की सैर

कोरोना से रिकवर होने के बाद व्यक्ति को रोजाना सुबह व शाम किसी पार्क या प्राकृतिक वातावरण में 30-30 मिनट तक घूमना चाहिए।

सुबह-शाम योग करें

सुबह व शाम को दोनों समय योग करना चाहिए। मानसिक तौर पर शांति मिलती है। कपालभाति व अन्य प्राणायाम करना चाहिए जो फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है। शुरुआत में दोनों क्रियाएं 3 से 5 मिनट तक ही करें। फिर इसे धीरे-धीरे बढ़ाएं।

अच्छा खानपान

हरी सब्जियां, दूध, फल सहित अन्य पौष्टिक पदार्थ भोजन में शामिल करें। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए रोजाना 3 से 5 ग्राम अश्वगंधा का चूर्ण व अन्य आयुर्वेदिक टिप्स अपनाएं।

सकारात्मक सोच

सोच सकारात्मक रखें। नकारात्मक विचार मन से निकाल दें। पसंद की किताबें पढ़ने, गीत सुनने, फिल्म देखने और अन्य क्रियात्मक गतिविधियों में खुद को व्यस्त रखें। (जैसा कि पोस्ट काेविड क्लिनिक के प्रभारी डॉ. राजीव बिश्नोई ने बताया)

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