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यूं निपटेंगे कोरोना से:4 करोड़ की कोरोना लैब; रोज 1000 सैंपल की क्षमता 3 दिन में महज 50 जांच, अब केमिकल के अभाव में बंद

श्रीगंगानगरएक महीने पहले
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  • कलेक्टर के आदेश के 6 दिन बाद भी एएचयू व पास बॉक्स के टेंडर तक नहीं किए

जिला अस्पताल में 3.97 करोड़ रुपए से बनी कोरोना जांच लैब का पहले अधूरे इंतजामों के साथ उद्घाटन करने में जल्दबाजी की गई। फिर बगैर पर्याप्त इंतजाम किए ही इसमें सैंपल टेस्टिंग शुरू कर दी। चार करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद तीन दिनों में महज 50 सैंपलों की ही टेस्टिंग हो सकी है। केमिकल व जांच किट्स के अभाव में शुक्रवार को सैंपल टेस्टिंग का काम बंद रहा।

जिले में  कोरोना रोगियों के संपर्क व्यक्तियों व बाहर से आए लोगों के लिए गए 345 सैंपल बीकानेर भेजने पड़े। कलेक्टर की स्वीकृति के बाद भी लैब में वायरस के संक्रमण से फैलाव से सुरक्षा के दृष्टिगत एयर हैंडलिंग यूनिट और पास बॉक्स लगाने की प्रक्रिया अभी तक कागजों से ही बाहर नहीं आई। पीएमओ ने एएचयू और पास बॉक्स   खरीदने के लिए गठित की क्रय  समिति भी भंग कर दी।

कलेक्टर महावीरप्रसाद वर्मा ने बताया कि एएचयू खरीद की स्वीकृति दे दी है, फिर भी इसमें लेटलतीफी करना सही नहीं है। गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में पीएमओ को एएचयू जल्द लगवाने के लिए निर्देश दिए थे। फिर भी विलंब क्यों हो रहा है, इसकी रिपोर्ट तलब की जाएगी।

हालात-ए-लैब...सैंपल रिजेक्ट तो कभी केमिकल खत्म, बीकानेर भेज रहे

लैब के क्वालिटी टेस्ट के लिए मेडिकल कॉलेज बीकानेर ने 96 किट्स और केमिकल उपलब्ध करवाया था। क्वालिटी टेस्टिंग के बाद किट्स और थोड़ा केमिकल बचा था। 5 जुलाई को लैब का उद्घाटन होने के बाद लैब पूरी क्षमता के साथ संचालित की जा सकती थी। तब इसमें एक पीसीआर मशीन थी।

इसमें एक समय में 92 सैंपल की जांच करने की क्षमता है। सात जुलाई काे लैब की शुरुआत के पहले दिन 20 सैंपल की जांच की गई। इसके बाद 8 जुलाई को 18 और 9 जुलाई को 12 सैंपलाें ही जांच हो सकी। केमिकल थोड़ा होने की वजह से ज्यादा सैंपल नहीं लगाए जा सके। 

कोरोना जांच लैब में 8 जुलाई को जो 18 सैंपल लगाए गए थे। इसमें 12 सैंपल टेस्ट के दौरान रिजेक्ट हो गए थे। इसकी वजह मिनी कूलर के अभाव में केमिकल का खराब होना बताया जा रहा है। लैब के डीप फ्रीजर में स्टोर कर रखे गए केमिकल को टेस्ट में उपयोग होने लायक मात्रा में बाहर निकाल कर मिनी कूलर में रखा जाता है।

मिनी कूलर में स्टोर केमिकल को सैंपल की प्रोसेसिंग के दौरान सैंपल ट्यूब में डालकर प्रोसेसिंग की जाती है। मिनी कूलर के अभाव में केमिकल बाहर रखने की वजह से 12 सैंपलों की प्रोसेसिंग सही तरीके से नहीं हो सकी। 8 जुलाई की शाम काे मेडिकल काॅलेज बीकानेर की ओर से मिनी कूलर उपलब्ध करवाया गया। 9 जुलाई को मिनी कूलर में स्टोर केमिकल का उपयोग कर पिछले दिन रिजेक्ट हुए सैंपलों की दोबारा टेस्टिंग लगानी पड़ी। 
नई पीसीआर मशीनें मिली, क्वालिटी की चेकिंग हुई
कोरोना जांच लैब के लिए दो नई पीसीआर मशीनें मिली हैं। पहले मेडिकल कॉलेज की मशीन दी गई थी। उसे उतार कर पैक कर दिया है, जिसे मेडिकल काॅलेज काे वापस कर दिया जाएगा। नई पीसीआर मशीनें इंस्टाल कर क्वालिटी चेकिंग पूरी हो चुकी है। दोनों पीसीआर मशीनों की क्षमता एक समय में 92-92 सैंपल चेक करने की है।
भास्कर सवाल

स्वीकृति, 3 लाख रुपए बजट उपलब्ध, फिर भी एएचयू खरीद में विलंब

जिला कलेक्टर महावीर प्रसाद वर्मा ने 6 जुलाई संक्रमण से बचाव की सुरक्षा की दृष्टिगत लैब में एएचयू और पास बॉक्स लगाने की स्वीकृति प्रदान की। जिला अस्पताल प्रबंधन को इसकी प्रक्रिया जल्द ही पूरी करने के निर्देश दिए। पीएमओ डॉ. केएस कामरा ने एएचयू व पास बॉक्स खरीद के लिए टेंडर कॉल करने की प्रक्रिया के लिए कमेटी भी गठित की थी।

इसमें जिला अस्पताल के डॉक्टर संजय शर्मा, एएओ रवींद्र गोयल, आरएमआरएस के मैनेजर महेश पारीक, हैल्थ मैनेजर शिविंद्र सिंह को शामिल किया था। इसके बाद कमेटी भंग कर दी गई। अभी तक एएचयू और पास बॉक्स खरीदने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। हालांकि इसके लिए जिला स्वास्थ्य समिति ने 3 लाख रुपए बजट जिला अस्पताल के लिए स्वीकृत किया है। पहले बजट के अभाव में एएचयू नहीं लगाया जा रहा था। इसके अभाव में लैब स्टाफ रिस्क उठाकर वहां काम कर रहा है।

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