एसीबी श्रीगंगानगर चाैकी प्रथम की कार्रवाई:दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति देने काे 7 हजार रिश्वत मांगी, 5 हजार लेते सिंचाई विभाग का यूडीसी गिरफ्तार

श्रीगंगानगरएक महीने पहले
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  • दाे माह से चक्कर कटवाता रहा था यूडीसी, सत्यापन के समय 2 हजार लिए

सिंचाई विभाग के उत्तर खंड में यूडीसी काे 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। श्रीगंगानगर एसीबी टीम ने गुरुवार शाम काे विभाग के कार्यालय में ही कार्रवाई की। आराेपी यूडीसी राजेश अराेड़ा पुत्र राेशनलाल ने यह रिश्वत एक किसान से खेत में से वाटरकाेस खाळे की स्वीकृति के दस्तावेजाें की प्रमाणित प्रति जारी करने की एवज में ली। आराेपी काे शुक्रवार दाेपहर एसीबी मामलाें की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।

एसीबी बीकानेर कार्यालय के एसपी गगनदीप सिंगला ने बताया कि गंगनहर के उत्तर खंड के यूडीसी पूजा काॅलाेनी निवासी राजेश अराेड़ा पुत्र राेशनलाल के खिलाफ रिश्वत मांगने के आराेप में श्रीकरणपुर तहसील के चक 48 एफ के काश्तकार ने एसीबी श्रीगंगानगर चाैकी प्रथम के प्रभारी डीवाईएसपी काे शिकायत की थी। इसमें परिवादी ने बताया कि उसके खेत में निर्मित पक्के खाळे से संबंधित दस्तावेजाें की प्रमाणित प्रति एक्सईएन कार्यालय से मांगी थी।

वरिष्ठ कार्यालय सहायक राजेशकुमार अराेड़ा ने इसके लिए 7 हजार रुपए मांगे। शिकायत मिलते ही एसीबी ने 13 अक्टूबर काे सत्यापन करवाया। इस दाैरान आराेपी ने 2 हजार रुपए ले लिए। चाैकी प्रभारी डीवाईएसपी भुपेंद्र साेनी ने टीम सहित 14 अक्टूबर की शाम काे रिश्वत की शेष राशि 5 हजार रुपए लेते हुए आराेपी काे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इसमें सीआई विजेंद्र शीला का सहयाेग लिया गया। एएसआई हंसराज शर्मा, हैड कांस्टेबल सूबेसिंह, कांस्टेबल भवानीसिंह, आशीषकुमार, पूर्णसिंह,दिनेश, प्रदीप व विजयप्रसाद की टीम माैजूद रही।

पड़ताल : 1 माह पहले लगाई थी नकल की अर्जी, दाे बार एक-एक हजार रुपए ले चुका यूडीसी राजेश

परिवादी ने एसीबी काे बताया कि उसने एक माह पहले एक्सईएन कार्यालय में खाळे की स्वीकृति संबंधी दस्तावेजाें की प्रमाणित प्रति के लिए प्रार्थना-पत्र दिया था। इससे पहले बिना प्रार्थना पत्र के भी तीन सप्ताह तक चक्कर कार्यालय के काटता रहा। प्रार्थना पत्र देने के बाद आराेपी यूडीसी ने एक-एक हजार रुपए दाे बार रिश्वत ली। लेकिन दस्तावेज फिर भी नहीं दिए। परिवादी ने इस संबंध में पूछा ताे उसने 7 हजार रुपए की और मांग कर दी। इस पर परिवादी ने एसीबी में शिकायत की।

परिवादी ने एसीबी काे बताया कि उसकी चक 48 एफ, श्रीकरणपुर में कृषि भूमि है। इसमें करीब 8-10 साल से पक्का खाळा था। यह किला नंबर 18 में 17 बिस्वा पर था। सिंचाई विभाग ने स्वीकृत खाले को नक्शे के विपरीत 8 बिस्वा पर बना दिया। इससे जमीन दाे टुकड़ाें में बंट गई। खेती में भी परेशानी आने लगी। परिवादी ने इसका विरोध किया। इस पर एक्सईएन ने कुतरी खाळा चक 48 एफ में 26 नवंबर 2015 के स्वीकृति आदेश की फोटो प्रति परिवादी को दे दी। उसके अनुसार खाळा निर्माण करना बताया। इसलिए परिवादी ने उक्त आदेश की पत्रावली की नकल के लिए एक्सईएन काे आवेदन किया था। इसी पत्रावली की नकल काे लेकर रिश्वत की मांग की गई थी।

आराेपी के पिता पटवारी थे, आरोपी अनुकंपात्मक नियुक्ति पर 2008 में बना था एलडीसी

डीवाईएसपी ने बताया कि आराेपी राजेश अराेड़ा का पूजा काॅलाेनी में संयुक्त परिवार का मकान है। पिता राेशनलाल अराेड़ा सिंचाई पटवारी थे। उनका 2007 में निधन हाे गया। वर्ष 2008 में राजेश अराेड़ा काे अनुकंपात्मक नियुक्ति मिली। उसने आईजीएनपी में बीकानेर में एलडीसी पद पर लगाया था। 2016 में श्रीकरणपुर उपखंड कार्यालय में तबादला करवाकर आ गया। 2018 में उसे एक्सईएन उत्तर खंड कार्यालय में यूडीसी पद पर पदाेन्नत कर लगाया था।

खाळे का नक्शा सिंचाई विभाग ने बनाया, पक्का खाळा सीएडी अभियंताओ ने बनवाया : 48 एफ के खेत में परिवादी के 10 साला से जिस जगह पर कच्चा वाटरकाेस खाळा बना हुआ था, वह 18 नंबर बीघा जाे कि 17 बिस्वा का ही है, उसके एक तरफ 17 बिस्वा पर ही बना हुआ था। सिंचाई विभाग ने अब उस खाळे के आगे के कास्तकाराें के साथ समझाैता कर उसकी जगह बदलकर 18 नंबर बीघा के बीच में 8 बिस्वा पर कर दिया। जबकि परिवादी का दावा है कि उस समझाैते पर परिवादी के हस्ताक्षर ही नहीं हैं, जबकि इस का सीएडी ने निर्माण भी कर दिया।

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