बलिदान दिवस पर मेजर चहल को किया याद:सेना और प्रशासन के अधिकारियों ने किए पुष्पचक्र अर्पित, मेजर चहल के परिवार के सदस्य भी हुए शामिल

श्रीगंगानगर5 महीने पहले
श्रीगंगानगर के चहल चौक पर मेजर चहल की प्रतिमा के समक्ष पुष्प अर्पित करते सैन्य अधिकारी।

जिले के गांव मोहनपुरा के शहीद मेजर हरबंससिंह चहल के 50वें बलिदान दिवस पर मंगलवार को शहर के चहल चौक पर पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारतीय सेना के उच्च अधिकारियों ने पुष्प चक्र अर्पित कर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। पंद्रह इन्फेंटरी ब्रिगेड के कमांडर एएस मंगत ने शहीद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

कलेक्टर जाकिर हुसैन ने कहा कि श्रीगंगानगर की धरती पर जन्मे मेजर चहल ने अपनी वीरता के दम पर दुश्मन के दांत खट़्टे कर दिए। दुश्मन की सीमा में जाकर उसकी चौकी पर कब्जा करने के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी इस वीरता को केवल श्रीगंगानगर ही नहीं पूरा देश गौरव के साथ याद करता है।

कार्यक्रम में एसपी आनंद शर्मा ने भी शहीद मेजर हरबंससिंह चहल के चित्र पर पुष्पचक्र अर्पित किया। इस अवसर नगर परिषद की सभापति करुणा चांडक, यूआईटी सेक्रेटरी डॉ.हरितिमा, मेजर चहल के पुत्र राजवंतसिंह और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान शबद कीर्तन का भी आयोजन किया गया।

अदम्य साहस दिखाया था मेजर चहल ने

शहर के नजदीक गांव मोहनपुरा में जन्मे मेजर हरबंससिंह चहल वर्ष 1963 में देहरादून से कमीशन प्राप्त कर ग्रेनेडियर्स यूनिट में शामिल हुए। वर्ष 1965 में भारत-चीन सीमा पर नियुक्त हुए। वर्ष 1971 के भारत पाक युद्ध में उन्हें जम्मू कश्मीर के राजौरी सैक्टर में तैनात किया गया। इस दौरान उन्हें शत्रु की सीमा में दो मील अंदर एक चौकी पर कब्जा करने के लिए भेजा गया। तेरह दिसम्बर 1971 की रात मेजर चहल ने दुश्मन पर जबर्दस्त हमला बोला। इसी बीच दुश्मन की ओर से आई एक गोली मेजर चहल की बांह में लगी। चौदह दिसम्बर की सुबह दुश्मन के तोपखाने का एक गोला मेजर चहल के पास आकर फटा और मेजर चहल वीरगति को प्राप्त हो गए।

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