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इको फ्रैंडली गणपति बन रहे पहली पसंद:जालोर के कारीगर पीओपी के साथ बना रहे मिट्‌टी के गणेश, बंगाल की प्रतिमाओं की भी बढ़ी मांग

श्रीगंगानगर18 दिन पहले
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श्रीगंगानगर में सजे मिट्‌टी के गणपति। - Dainik Bhaskar
श्रीगंगानगर में सजे मिट्‌टी के गणपति।

गणेश उत्सव में महज चार दिन बाकी है, ऐसे में शहर के हनुमानगढ़ रोड पर गणपति बनाने वाले कारीगरों का डेरा लगने लगा है। खास बात यह है कि इस बार लोग गणपति की मिट्टी की प्रतिमाओं की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि गणपति की प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की प्रतिमाएं विसर्जन के लिए ठकी नहीं है। ऐसे में मिट्‌टी की प्रतिमाएं ही बेहतर विकल्प हैं।

बंगाल से आ रही गणपति की प्रतिमाएं
इस बार गणेशोत्सव के लिए बंगाल से ऐसी प्रतिमाएं भी आई है, जो मिट्टी की बनी हैं, यानी उनमें पीओपी की जगह मीनाकारी, नग आदि का इस्तेमाल कर गहने तैयार किए गए हैं। मिट्‌टी की प्रतिमा पर गहनों से इसकी सुंदरता और बढ़ गई है। इन प्रतिमाओं को बंगाल से मंगवाया गया है। बंगाल के दुर्गा प्रतिमा बनाने वाले कारीगर ही इन प्रतिमाओं को तैयार करते हैं। कुछ लोग मिट्‌टी की प्रतिमा पर रंग भी करवाते हैं। वहीं कुछ मिट्टी की प्रतिमा का ही पूजन करते हैं।

श्रीगंगानगर में तैयार गणपति प्रतिमाएं।
श्रीगंगानगर में तैयार गणपति प्रतिमाएं।

विसर्जन के बाद पानी में घुल नहीं पाती पीओपी की मूर्तियां
श्रीगंगानगर में गणपति प्रतिमाओं के कामकाज से जुड़े गोविंद बताते हैं कि मिट्टी की प्रतिमाएं तैयार करवाने के पीछे बड़ा कारण इनके विसर्जन से जुड़ा है। श्रीगंगानगर इलाके में नहरों में विसर्जन किया जाता है। प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाएं विसर्जन के बाद पानी में घुल नहीं पाती जबकि मिट्‌टी की प्रतिमा विसर्जन के बाद पानी में मिल जाती है। गोविंद बताते हैं कि इस बार लोगों में गणेशोत्सव के प्रति उत्साह ज्यादा है।

लौट ना आए कोरोना
जालोर से आए कारीगर अमृतलाल बताते हैं कि उन्होंने करीब तीन महीने पहले मूर्तियां बनाना शुरू कर दिया। बहुत सारी प्रतिमाएं बना ली हैं। मूर्तियां बनाना भी तब शुरू किया जब कोरोना की आशंका कम हो गई। अब एक बार फिर डर सता रहा है कि कहीं कोरोना लौट ना आए। पिछले साल तो कोरोना के कारण गणेशोत्सव सही तरीके से नहीं हो पाया। इस बार तो कम से सही तरीके से आयोजन हो सके, जिससे कारीगर भी अपना गुजर बसर कर सके और भक्तों की आस्था भी कम नहीं हो।

बप्पा के आगमन की तैयारियों में जुटे श्रद्धालु
पिछले साल कोरोना के चलते गणपति की इको फ्रैंडली मूर्तियां घरों में ही तैयार की गई थी। इसके साथ ही प्रसाद भी घरों में बनाए गए। इस बार कोरोना का असर कम होने से बाजार में प्रसाद भी मिल रहे हैं और गणपति की सुंदर प्रतिमाएं तैयार हुई हैं। श्रद्धालुओं में उत्साह है और वे गणपति बप्पा के आगमन की तैयारियों में जुटे हुए हैं।

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