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रिकॉर्ड में ट्रॉमा सेंटर, असल में एमरजेंसी ब्लॉक:सरकारी अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर के नाम पर बजट मिला, अलग डॉक्टर  मिले लेकिन बिल्डिंग निर्माण का बजट एमरजेंसी  में खपाया

एक वर्ष पहले
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श्रीगंगानगर के सरकारी अस्पताल का एमरजेंसी ब्लॉक। - Dainik Bhaskar
श्रीगंगानगर के सरकारी अस्पताल का एमरजेंसी ब्लॉक।

' रिकॉर्ड में ट्रॉमा सेंटर, असल में एमरजेंसी' सुनने में भले ही अजीब लगे लेकिन श्रीगंगानगर के सरकारी अस्पताल में कुछ ऐसा ही है। यहां कई वर्ष पहले ट्रोमा सेंटर के लिए बजट मिला था लेकिन तत्कालीन अधिकारियों ने यहां उसी समय बन रहे एमरजेंसी ब्लॉक में ही यह बजट खपा दिया और सरकारी रिकॉर्ड में यहां ट्रोमा सेंटर होना बता दिया गया। अब अस्तपाल में भौतिक रूप से तो केवल एमरजेंसी ही है लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में यहां ट्रॉमा सेंटर और इसमें स्वीकृत स्टाफ तक है। अधिकारी भी मानते हैं कि उनके यहां वर्षों पूर्व बने एमरजेंसी ब्लॉक को ही ट्रॉमा सेंटर मानते हुए बजट का उपयोग कर लिया गया।

श्रीगंगानगर के हनुमानगढ़ रोड पर लगा ट्रॉमा सेंटर का बोर्ड।
श्रीगंगानगर के हनुमानगढ़ रोड पर लगा ट्रॉमा सेंटर का बोर्ड।

जगह-जगह ट्रॉमा सेंटर का प्रचार
खास बात है कि शहर में ट्रॉमा सेंटर होने का प्रचार हनुमानगढ़ और सूरतगढ़ आदि से शहर में प्रवेश के सभी रास्तों पर किया गया है। यहां बाकायदा सरकारी बोर्ड लगाए गए हैं जहां से ट्रॉमा सेंटर की दूरी तक बताई गई है ताकि किसी मुख्य मार्ग पर किसी के गंभीर घायल होने पर उसे हॉस्पिटल लाया जा सके। यह बात अलग है कि अस्पताल आने पर उसे ट्रॉमा सेंटर की जगह एमरजेंसी ब्लॉक जैसी सुविधाएं ही मिल पाती हैं।

ट्रॉमा सेंटर का स्टाफ अस्पताल में
इस ट्रामा सेंटर के लिए एक सर्जन और कुछ स्टाफ तथा एक्स-रे सुविधा मिली है। यह सुविधा भी अस्पताल में ही उपयोग हो रही है। अलग से ट्रॉमा सेंटर के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं है। प्रतिमाह राज्य सरकार को भेजी जाने वाली स्टाफ की सूचना में जरूर इस स्टाफ को अलग दर्शा दिया जाता है।

ट्रॉमा सेंटर में अलग से ये सुविधाएं जरूरी
डॉक्टर बताते हैं कि ट्रॉमा सेंटर की सुविधाएं देखें तो वहां आर्थो, न्यूरोसर्जन आदि की सुविधा, मेडिकल ऑफिसर, अलग नर्सिंग स्टाफ, एक्स-रे, सिटी स्कैन और वेंटीलेटर की सुविधा अलग भवन में होनी चाहिए। श्रीगंगानगर के सरकारी अस्पताल में इनमें से कई सुविधाएं हैं लेकिन ये अलग से नहीं है। ऐसे में उपचार तो हो पाता है लेकिन ट्रॉमा सेंटर में गंभीर रोगियों के अलग उपचार जैसा कुछ नहीं हो पाता।

मिला था बजट
अस्पताल में वर्षों से कार्यरत डॉक्टर बताते हैं कि जिस समय एमरजेंसी ब्लॉक बन रहा था, उसी समय ट्रोमा सेंटर के लिए बजट मिला। ऐसे में इसी बिल्डिंग में यह राशि खर्च कर दी गई और अलग ट्रॉमा सेंटर आज तक नहीं बन पाया।

स्टाफ अलग है लेकिन हमारे पास सुविधा यही
पीएमओ डॉ.बलदेवसिंह बताते हैं कि अस्पताल में ट्रोमा सेंटर के लिए अलग सुविधाएं जैसे एक्स-रे आदि हैं। प्रतिमाह भेजे जाने वाले स्टाफ के ब्यौरे में भी ट्रॉमा सेंटर में एक सर्जन और अन्य स्टाफ का ब्यौरा भेजा जाता है लेकिन ट्रॉमा सेंटर के नाम पर हमारे पास केवल एमरजेंसी ही है। यहां उपचार हम हर गंभीर रोगी का कर रहे हैं।

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