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नप का नया विवाद:माैखिक आदेश से दिवाली पर शहर में 419 सफाई कर्मी रखे मानदेय की बात आई ताे अधिकारी बाेले, हमने नहीं लगाए

श्रीगंगानगर2 महीने पहले
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  • आयुक्त बुड़ानिया के माैखिक अादेश से रखा गया, बड़ा सवाल यह कि अब श्रमिकों काे किस मद से और कैसे हाेगा भुगतान

शहर के 419 सफाई श्रमिक परेशानी में हैं। इसका कारण इन्हें नवंबर व दिसंबर माह के मानदेय का अब तक भुगतान नहीं हाेना है। सफाई श्रमिक सुबह से शाम तक नगरपरिषद में अधिकारियाें के चक्कर लगाते थक चुके हैं, लेकिन कहीं से भी जवाब नहीं मिल रहा कि मानदेय मिलेगा या नहीं। इसी वजह से सफाई श्रमिकाें काे बड़ा निर्णय लेना पड़ा। शहर में गुरुवार से सफाई श्रमिकाें ने सफाई बंद कर दी है।

ऐसे में नगरपरिषद काे दिनभर सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। फिर भी अनेक जगहाें पर गंदगी रह गई। बाजार क्षेत्र, रविंद्र पथ, राधेश्याम काेठी राेड, केंद्रीय बस स्टैंड के पास, मीरा चाैक से इंदिरा वाटिका राेड आदि जगहाें पर कंटेनराें के पास गंदगी पड़ी दिखी। सभापति करूणा चांडक ने परिषद अधिकारियाें से शहर में सफाई व्यवस्था सुचारू करवाने के निर्देश दिए। शाम तक अनेक जगहाें पर सफाई भी कर दी गई।

अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस के संयाेजक अनिल धारीवाल का कहना है कि सफाई श्रमिक काे 5041 रुपए मानदेय दिया जाता है। इस हिसाब से 419 कर्मचारियाें का दाे माह का मानदेय 4224358 रुपए बनता है। नगरपरिषद ने टेंडर ही नहीं किए ताे अब परेशानी की बात यह सामने आ रही है कि इन सफाई श्रमिकाें काे भुगतान कैसे और किस मद से हाेगा। पार्षद बंटी वाल्मीकि का कहना है कि यदि जरूरत पड़ी ताे सफाई श्रमिकाें की मदद के लिए पार्षद अपना मानदेय देने के लिए तैयार रहेंगे।

परेशानी में सफाई श्रमिक, निराकरण नहीं हुआ ताे नगर परिषद के स्थायी सफाई कर्मचारी भी जाएंगे हड़ताल पर

सफाई यूनियन के अध्यक्ष उमेश वाल्मीकि का कहना है कि सफाई टेंडर नहीं हाेने की बात पर सभापति करूणा चांडक, आयुक्त प्रियंका बुडानिया के साथ कलेक्टर के पास गए थे। वहां से भी माैखिक ही आश्वासन मिला। इस पर सफाई श्रमिकाें ने काम शुरू कर दिया। दाे माह तक मानदेय नहीं दिया गया ताे यह बात सामने आई किएडीएम प्रशासन डाॅ. गुंजन साेनी ने परिषद की फाइल पर नाेट लगा दिया है। इस वजह से परेशानी आई है। अब एडीएम का स्थानांतरण हाे चुका है, वहीं, आयुक्त एपीओ हाे गई हैं। ऐसे में सफाई श्रमिकाें का क्या हाेगा। यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ ताे परिषद के स्थायी सफाई कर्मचारी भी हड़ताल पर जाएंगे।

परेशानी...अधिकारियों ने भुगतान करने का दिया था माैखिक आश्वासन

नगरपरिषद आयुक्त रही प्रियंका बुडानिया के माैखिक आदेश व आश्वासन से सफाई श्रमिक रखे गए। कुछ दिनाें पूर्व परिषद के अधिकारी कहते रहे कि आयुक्त के आने के बाद भुगतान कर दिया जाएगा। 5 जनवरी काे बुडानिया ने सुबह परिषद में ज्वाइन किया, शाम काे डीएलबी द्वारा एपीओ कर दिया गया। ऐसे में सफाई श्रमिकाें काे भुगतान नहीं हाे सका है। सबसे अधिक परेशानी की बात यह सामने आ रही है कि सभी कार्य माैखिक आदेश, आश्वासन से हुए। लेकिन अब आश्वासन देने वाली अधिकारी ही एपीओ हाे चुकी हैं, ऐसे में सफाई श्रमिकाें काे भुगतान कैसे हाेगा, समझ से परे है।

नगरपरिषद का टेंडर समाप्त हाे गया था। ऐसे में कलेक्टर के निर्देश व आश्वासन पर ही सफाई श्रमिकाें ने काम किया है। परिषद की ओर से सफाई श्रमिक रखे ही नहीं गए। यह भी सही है कि मानदेय नहीं मिलने से सफाई श्रमिक परेशान हैं। कलेक्टर से फिर मिलेंगे, समस्या का समाधान करवाने का प्रयास करेंगे, आगे कलेक्टर ही जानें।
करूणा चांडक, सभापति नगरपरिषद, श्रीगंगानगर।

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