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सीएचसी अनूपगढ़ का मामला:कैशियर ने आरएमआरएस की राशि से गबन के 18.74 लाख जमा करवाए, एपीओ किया

श्रीगंगानगर10 महीने पहले
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  • पांच सदस्यीय कमेटी ने शुरू की मामले की जांच, टीम ने 7 साल 3 महीने का रिकॉर्ड जब्त किया

सीएचसी अनूपगढ़ में  दो साल में आरएमआरएस की राशि में से 15.63 लाख रुपए का गबन करने के मामले में कैशियर धर्मवीर सिंह शेखावत ने मूल राशि और ब्याज सहित 18 लाख 74 हजार 644 रुपए जमा करवा दिए हैं। सीएमएचओ की ओर से गठित पांच सदस्यीय जांच कमेटी ने सोमवार को सीएचसी पर पहुंचकर विस्तृत जांच शुरू की। एडिशनल सीएमएचओ (परिवार कल्याण) के नेतृत्व में गठित जांच कमेटी ने सीएचसी से पिछले 7 वर्ष 3 महीने का आरएमआरएस में एकत्रित हुई फीस राशि का रिकॉर्ड जब्त कर लिया है।

जांच कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट पर सीएमएचओ डॉ. गिरधारी लाल मेहरड़ा ने गबन के आरोप की जांच का सामना कर रहे कैशियर धर्मवीर शेखावत को एपीओ कर दिया है। उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक (जन स्वास्थ्य) को सिफारिश भेज दी है। 

एडिशनल सीएमएचओ डॉ. मुकेश मेहता, बीसीएमओ अनूपगढ़ डॉ. मुकेश मित्तल, एएओ राजपाल चीनिया, एएओ द्वितीय अनिल मोदी और जूनियर अकाउंटेंट पंकज ढालिया की टीम अनूपगढ़ सीएचसी में आरएमआरएस का अप्रैल 2018 से लेकर 8 जुलाई 2020 तक का रिकॉर्ड लिया है। हालांकि कैशियर धर्मवीर शेखावत ने कैश का चार्ज जुलाई 2018 में लिया है।

इससे पहले भी कई बार बार थोड़ा-थोड़ा समय आरएमआरएस के कैशियर के तौर पर काम कर चुका है। धर्मवीर शेखावत ने 15.63 लाख रुपए का गबन जुलाई 2018 से जून 2020 के बीच किया। इससे पहले की आरएमआरएस की कैश बुक और बैंक स्टेटमेंट की अभी तक विस्तृत जांच नहीं हुई है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार इससे पहले अनूपगढ़ ब्लॉक में डबल वेतन उठाने के मामले में हुए 26 लाख रुपए के गबन के मामले में भी धर्मवीर शेखावत का नाम आया था। इसी वजह से धर्मवीर शेखावत की पोस्टिंग के समय का पुराना रिकॉर्ड भी लिया गया है। 

मुकदमे के बाद जांच टीम पहुंचने के बाद जमा करवाए 17 लाख रुपए 

धर्मवीर शेखावत ने 29 जून को स्पष्टीकरण का नोटिस जारी होने के बाद धर्मवीर शेखावत ने दो ट्रांजेक्शन में 49 हजार और 33 हजार रुपए सहित 82 हजार रुपए जमा करवाए। इसके बाद सोमवार को एक ट्रांजेक्शन में मूल गबन राशि के 14 लाख 81 हजार 620 रुपए जमा करवाए।

इसके बाद उसने सीएचसी में आकर जांच टीम को बताया कि उसने उसकी तरफ निकले रुपए जमा करवा दिए हैं। उसकी बैंक रसीदें दिखाईं। तब जांच टीम ने 18 प्रतिशत की दर से ब्याज राशि के 3 लाख 11 हजार 44 रुपए भी जमा करवाने को कहा। इसके बाद उसे ब्याज राशि भी जमा करवा दी। इस पर सीएचसी प्रभारी डॉ. एमएल गुप्ता को बैंक से आरएमआरएस के खाते की अधिकृत स्टेटमेंट तक इसकी रिपोर्ट भेजने को कहा गया है

अब विस्तृत जांच के बाद ही होगी मुकदमा दर्ज करवाने की सिफारिश

जांच कमेटी में शामिल डॉ. मुकेश मेहता और एएओ राजपाल चीनिया के अनुसार गबन  राशि की ब्याज सहित रिकवरी हो चुकी है। अब पुराने रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की जाएगी। विस्तृत जांच रिपोर्ट में कैशियर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने की सिफारिश की जाएगी। लेखा नियमों के अनुसार लंबे समय तक राशि जमा नहीं करवाना भी सरकारी धन के दुरुपयोग और गबन की श्रेणी में आता है। नियमानुसार इसके खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए।

जांच टीम ने सीएचसी प्रभारी को पूर्व में एक-एक सप्ताह तक आरएमआरएस की फीस राशि बैंक खाते में जमा नहीं होने से अवगत करवाते हुए भविष्य में नियमित राशि जमा करवाने के निर्देश दिए। समय समय पर इसकी ऑडिट करवाने को कहा गया। पूर्व में  दाे साल तक गबन हाेता रहा।  इसी दौरान ऑडिट और स्थानीय स्तर पर जांच नहीं हुई। 

सख्ती से रिकवरी की

  • सीएचसी से ज्यों ही कैशियर द्वारा गबन की जानकारी मिली तो पहले तीन अकाउंटेंट्स से रिकॉर्ड की जांच करवाई। फिर जांच कमेटी गठित की। सख्ती का ही नतीजा  है कि 18 लाख रुपए से ज्यादा राशि वसूल कर ली गई है। कैशियर को एपीओ कर विभागीय कार्रवाई के लिए िलखा है। विधिक परामर्श लेकर आगामी कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. गिरधारी लाल मेहरड़ा, सीएमएचओ, श्रीगंगानगर। 
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