पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट:काेचिंग, पीजी व लाइब्रेरी फिर बंद, 4.31 कराेड़ का नुकसान; पीजी-हॉस्टल से विद्यार्थी घर लौटे

श्रीगंगानगर3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • संचालक बोले- कैसे देंगे इमारत का किराया
  • शहर में 100 के करीब काेचिंग इंस्टीट्यूट, 150 से अधिक पीजी और 45 लाइब्रेरी, जनवरी-फरवरी में ही शुरू हुई थी, एक माह में ही सब बंद हुए

काेराेना की दूसरी लहर पहली से अधिक खतरनाक बताई जा रही है। राज्य सरकार ने प्रदेश में 17 अप्रैल से स्व अनुशासन पखवाड़ा लगाकर लाेगाें काे काेराेना की दूसरी खतरनाक लहर से बचने की चाल चल दी है। इसकाे लेकर जारी की गई गाइडलाइन में ही झाेल कर दिया है।

बाजार में किराना, मेडिकल,दूध की दुकानाें काे दी गई छूट में शादियाें का सीजन बताकर टेलर्स,मनियारी आदि की दुकानाें काे भी छूट दे दी है। लेकिन स्कूल,काॅलेज, काेचिंग इंस्टीटयूट्स पूर्ण बंद रखने के आदेश दिए गए हैं।

अब इस आदेश के चलते अकेले जिला मुख्यालय पर ही 100 के करीब काेचिंग इंस्टीट्यूट, 150 से अधिक पीजी और 45 से अधिक लाइब्रेरियाें के ताले लग गए हैं। जिला मुख्यालय पर ऑफ लाइन पढ़ाई बंद हाे जाने से 4 कराेड़ 31 लाख 40 हजार रुपए का महीने का काराेबार प्रभावित हाेगा।

रेंट पर लेकर पीजी बनाए, दाे माह हुए नहीं कि वापस ताले लग गए

चाैधरी ब्वायज और गर्ल्स पीजी के मालिक संदीप चाैधरी और उनके पार्टनर अनिल चाैधरी बताते हैं कि जिला मुख्यालय पर करीब 150 छाेटे और बड़े पीजी हैं। एक पीजी में औसतन 50 बच्चाें की व्यवस्था काे भी मानें ताे पीजी मालिकाें काे इस काेविड के कारण बंद रहने से महीने भर का 3 कराेड़ 40 लाख रुपए के करीब का नुकसान हाेगा।

फरवरी और मार्च में ही काेचिंग शुरू हुई थी और पीजी में बच्चे आकर रहने लगे थे। अब अप्रैल में ताे वापस ही चले गए हैं। बंद पड़े पीजी का किराया देना हाेगा। छूट मांगें ताे मालिक बिल्डिंग खाली करने काे कहते हैं। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है कि क्या करें। लाखाें रुपए का इंफ्रास्ट्रक्चर भी बनाया हुआ है। अगर बिल्डिंग खाली करें ताे इतना सारा सामान कहां लेकर जाएंगे। इसलिए हालात सामान्य हाेने का इंतजार करेंगे।

संकट ये भी... 100 में से 12 कोचिंग सेंटर में ही ऑनलाइन पढ़ाई का सेटअप, बाकी 88 में अब ऑफलाइन-ऑनलाइन पढ़ाई सब ठप

जेबी क्लासेज के एमडी जयंत बाेथरा बताते हैं कि काेचिंग इंस्टीट्यूट बंद करने के आदेशाें से जिला मुख्यालय के करीब 100 संस्थानाें में 88 पर सीधे ताैर पर असर पड़ा है। इनमें ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन पढ़ाई भी नहीं हाे पा रही है। शेष 12 प्लस इंस्टीट्यूट हैं जाे कि ऑनलाइन क्लासेज ले रहे हैं। हम हमारे बच्चाें काे ऑनलाइन भी पूरी जिम्मेदारी से पढ़ा रहे हैं ताकि उनका पढ़ाई का नुकसान नहीं हाे।

लेकिन जिन संस्थानाें के पास ऑनलाइन पढ़ाई का सेटअप नहीं है,उनकाे साै फीसदी नुकसान हुआ है। अब यह भी नहीं कहा जा सकता कि हालात दाेबारा सामान्य कब हाेंगे। काेचिंग इंडस्ट्री बर्बाद हाेने के कगार पर पहुंच गई है। बच्चे घराें काे चले गए हैं। इससे संबंध इंडस्ट्री जैसे पीजी और लाइब्रेरी आदि पर भी बुरा असर पड़ा है।

लाइब्रेरियां भी बंद हुईं, संचालक बोले- खर्चे भी जेब से भुगत रहे हैं

जिला लाइब्रेरी एसाेसिएशन के संयाेजक व कार्तिक लाइब्रेरी के मालिक विनाेद नेहरा बताते हैं कि जिला मुख्यालय पर 45 लाइब्रेरियां हैं और प्रत्येक में औसतन 70 बच्चाें के लिए संसाधन उपलब्ध हैं। केंद्र और राज्य सरकार की कई सारी भर्तियाें की घाेषणा के कारण सभी लाइब्रेरियाें में बच्चे पढ़ने आते थे लेकिन अब काेराेना गाइडलाइन के कारण लाइब्रेरियां वापस बंद कर दी गई हैं।

बच्चे लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ना चाहते हैं लेकिन हम मजबूर हैं। अगर साेशल डिस्टेंसिंग से बैठने की अनुमति दें ताे हम व्यवस्था कर लेंगे। हालत यह हाे गई है कि अब ताे बिल्डिंग का किराया निकाल पाना ही मुश्किल हाे गया है। लाइब्रेरी में 500 से 800 रुपए की मासिक फीस ले रहे हैं जिससे खर्चे ही पूरे नहीं हाे पाते थे। अब ताे खर्चे भी जेब पर ही पड़ रहे हैं।

खबरें और भी हैं...