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घड़साना से खबर:सीआईडी के 13260 वर्गफुट भूखंड पर 20 साल पहले बर्खास्त सिपाही ने किया था कब्जा, 3 थानों की पुलिस सुरक्षा में हटाया

श्रीगंगानगर8 महीने पहले
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  • भूखंड बेचने के बावजूद अभी पशुओं व तूड़ी के लिए बना रखा थे छप्पर, दो जेसीबी की मदद से हटाए

कस्बे के बीचों-बीच एसटीआर माइनर के निकट सीआईडी अाईबी की करोड़ों की जमीन से बुधवार को अतिक्रमण हटाया गया। कस्बे की नेशनल हाईवे पर सीआईडी के कार्यालय के समीप जमीन विभाग काे आवंटित हुई थी। इसके बावजूद इस भूखंड पर दाे दशक से एक बर्खास्त सिपाही ने अतिक्रमण किया हुआ था। विभाग ने कानूनन लंबी प्रक्रिया के बाद बुधवार को पुलिस जाब्ते की सुरक्षा में अतिक्रमण हटवा दिया।

अतिक्रमण कारी ने 78 फुट चाैड़े व 170 फुट लंबे करीब 13260 वर्गफुट अाकार के भूखंड पर कब्जा किया हुआ था। अतिक्रमण ने यह भूखंड दाे लाेगाें काे बेच दिया था, लेकिन वर्तमान में चारदीवारी कर तूड़ी व पशुअाें के लिए छप्पर अादि बनाए हुए थे। जाे दाे जेसीबी की मदद से हटा दिए गए। इस दाैरान प्रशासनिक अधिकारी व तीन थानाें का पुलिस जाब्ता तैनात रहा।

अतिक्रमण हटाने से पहले पुलिस ने अतिक्रमणकारी को सामान हटाने काे कहा। लेकिन अतिक्रमणकारी ने चेतावनी काे गंभीरता से नहीं लिया। जैसे ही जेसीबी से भूखंड की दीवार तोड़नी शुरू की तो अतिक्रमणकारी ने एक दो दिन का समय और देने की मांग की। जिस पर प्रशासन ने इनकार कर दिया।

अतिक्रमण कर 23 लाख में बेच दिया था, कई बार नाेटिस दिए अनदेखी करता रहा

मजेदार बात यह है कि यह अतिक्रमण पुलिस के ही एक बर्खास्त सिपाही अाेमप्रकाश शर्मा ने किया हुअा था। कुछ साल पूर्व बर्खास्त पुलिसकर्मी ने अतिक्रमण किए हुअा यह भूखंड दाे लाेगाें काे 23 लाख में बेच दिया था। हालांकि भूखंड के एक काेने में भूखंड के एक कोने में सीआईडी बीआई का कार्यालय भवन भी बना हुआ है। वर्ष 2011 से अतिक्रमणकारी को विभाग नेे कई बार नाेटिस दिए थे। सीअाईडी की एएसपी दीक्षा कामरा प्रशासन पर लगातार दबाव बना कर अतिक्रमण हटवाने के लिए प्रयास कर रहीं थी।

तहसीलदार दानाराम लूणा ने बताया कि पुलिस के बर्खास्त कांस्टेबल ओमप्रकाश शर्मा ने करीब 20 साल पहले थाने से सटती कीमती भूमि पर अतिक्रमण कर लिया था। अतिक्रमण कर खुद का मकान बना लिया था। इसके साथ ही नेशनल हाइवे पर स्थित भूखंड के कब्जे में से एक हिस्से को अनूपगढ़ के एक व्यापारी को 18 लाख तथा एक हिस्सा पांच लाख रुपए बेच दिया। सरकारी रिकाॅर्ड ओमप्रकाश को भूखंड खाली करने के लिए लगातार नोटिस दिए गए। इसके बावजूद अतिक्रमण कारी ने प्रशासन के नोटिस को कभी भी गंभीरता से नहीं लिया।

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