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कोरोना का स्ट्रेन बदला:मई के तीसरे सप्ताह से कोरोना का पीक, ऑक्सीजन व बेड का इंतजाम हो जाएगा

श्रीगंगानगर13 दिन पहले
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फोटो सब्जी मंडी का। - Dainik Bhaskar
फोटो सब्जी मंडी का।
  • अभी से हांफ रहा जिला अस्पताल, पीक आया तो क्या होगा, इसी पर पढ़िए रिपोर्ट...

मेडिकल एक्सपर्ट कोरोना संक्रमण को लेकर जैसी आशंका जाहिर कर रहे हैं अगर वह सच साबित हो गई तो श्रीगंगागनगर में भी हालात भयावह हो सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मई के तीसरे सप्ताह से जून के दूसरे सप्ताह तक कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर पीक पर रहेगी।

अगर ऐसा हुआ तो जिले के कोरोना रोगियों के इलाज की खातिर किए गए इंतजाम कम पड़ सकते हैं। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि प्रशासन 430 बेड की क्षमता के 12 कोविड अस्पताल खोलने की तैयारी कर रहा है। सवाल यह है कि ऑक्सीजन व बेड का इंतजाम वहां हो भी जाता है तो डॉक्टर व स्टाफ की व्यवस्था कहां से होगी?

डॉक्टर्स के अनुसार इस बार कोरोना का स्ट्रेन बदला हुआ है। रोगियों काे निमाेनिया ज्यादा हो रहा है। फेफड़ों का संक्रमण बढ़ने की वजह से सांस की तकलीफ के रोगी ज्यादा हैं। इन्हें ऑक्सीजन और वेंटिलेंटर की ज्यादा जरूरत पड़ रही है। कोमोर्बिड और उम्रदराज के अलावा युवा संक्रमितों की भी मृत्यु हो रही है। ऐसी स्थिति में रोगियों की संख्या बढ़ने पर प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को जोर आ सकता है।

1 ऑक्सीजन बेड ऑक्यूपेंसी 92%
जिला अस्पताल व 5 अन्य कोरोना निजी कोविड अस्पतालों में 238 ऑक्सीजन बेड है। एक सप्ताह पूर्व ऑक्सीजन पर निर्भर रोगियों की संख्या 100 से 125 तक रहती थी। मंगलवार को 220 बेड भरे हुए थे। महज 14 ऑक्सीजन बेड ही खाली थे। वेंटिलेटर की भी कमी भी बड़ा संकट है। ऑक्सीजन की बात करें तो अस्पताल में एक ऑक्सीजन प्लांट है। दूसरे का निर्माण शुरू हो चुका है। कोटा भी बढ़ाया जा रहा है।

2. अब 12 कोविड अस्पताल खुलेंगे
जिला स्तरीय सरकारी कोविड डेडिकेटेड अस्पताल की 140 बेड क्षमता थी। रोगियों की संख्या बढ़ने पर 35 अतिरिक्त बेड लगाकर क्षमता 175 कर दी। फिर भी पिछले चार दिनों से अस्पताल ओवर क्राउडेड है। 2 मई को 210 रोगी भर्ती थे। फर्श पर गद्दे लगाकर रोगियों को भर्ती करना पड़ा। 3 मई को 189 और 4 मई को 188 रोगी भर्ती थे। अब प्रशासन 430 बेड क्षमता के 12 कोविड अस्पताल खोलने की तैयारी कर रहा है।

3. स्टाफ के 77 पद खाली
पिछले एक वर्ष से कोरोना संक्रमण जारी है। फिर भी सरकारी स्तर पर अस्पतालों की क्षमता और स्टाफ बढ़ाने का प्रयास नहीं किए गए। जिले के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर्स के 305 पद स्वीकृत हैं। इसमें से 255 ही कार्यरत हैं और 50 पद खाली पड़े हैं। जिला अस्पताल में 12 डाॅक्टर्स की कमी है। जिले में नर्सिंग स्टाफ के 489 स्वीकृत पदों में से 462 भरे हुए हैं और 27 पद खाली हैं।

4. जीवन रक्षक दवाओं का संकट
फेफड़ों के संक्रमण में राहत के लिए लगाए जाने वाले एंटीवायरल रेमडेसिविर इंजेक्शनों की अभी से कमी चल रही है। अप्रैल से अब तक जिला अस्पताल प्रबंधन 2 हजार इंजेक्शनों की मांग कर चुका है। उपलब्ध 514 ही हुए हैं। प्राइवेट अस्पतालों के लिए पिछले दिनों 26 रेमडेसिविर इंजेक्शन ही मिले हैं। मांग ज्यादा होने की वजह से आपूर्ति कम हो रही है।

5. कोरोना रिपाेर्ट का बढ़ेगा इंतजार
जुलाई 2020 में सरकार ने जिला अस्पताल में कोरोना जांच लैब शुरू कर दी। रोगियों की संख्या बढ़ने से अब सैंपलिंग ज्यादा करनी पड़ रही है। इससे लैब पर भी वर्कलोड बढ़ा है। पिछले दिनों 3800 सैंपल जांच के लिए बीकानेर भेजने पड़े थे जिनकी रिपोर्ट सैंपलिंग के एक सप्ताह बाद मिली थी। वर्तमान में लैब की क्षमता 1500 सैंपल टेस्टिंग प्रतिदिन है। इसे 2500 प्रतिदिन किया जाना जरूरी है।

6. वैक्सीनेशन की रफ्तार भी धीमी
जिले में अभी तक 392227 लोगों को ही वैक्सीन लगा है। जिले में 18 वर्ष से इससे अधिक आयु के लोगों की संख्या 1401592 है। इस हिसाब से अभी तक लक्षित लोगों में से 27 प्रतिशत को ही वैक्सीन लगाया गया है। अब तक 108 दिनों में प्रतिदिन औसतन 3655 लोगों को वैक्सीन लगी है। अगर ये ही रफ्तार रही तो 14 लाख लोगों का वैक्सीनेशन 382 दिनों यानी एक साल से ज्यादा समय में हो सकेगा।

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