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कोरोना की वजह से अटका था काम:जिला अस्पताल में कोरिडोर का काम फिर शुरू, एक माह में पूरा होगा, फायदा-दोनों एमसीएच भवन आपस में जुड़ेंगे

श्रीगंगानगरएक महीने पहले
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  • नए और पुराने भवन को जोड़ने के लिए 36 लाख रुपए से बनाया जा रहा है यह कोरिडोर

अब लोगाें की जिंदगी की तरह जिला अस्पताल की गतिविधियां भी कोरोना के साथ-साथ ही चलेंगी। कोरोना की वजह से नए और पुराने एमसीएच भवन के बीच कोरिडाेर बनाने का काम फिर शुरू हो गया है। अब दोनों भवनों को 36 लाख रुपए से बन रहे कोरिडोर से जोड़ा जाएगा। इससे नया एमसीएच भवन और पुराना एमसीएच भवन पहली मंजिल से जुड़ जाएंगे।

इसका निर्माण अगले एक महीने में पूरा होने की संभावना है। अगर जरूरत पड़ी तो भविष्य में पुराने एमसीएच भवन की पहली मंजिल पर कोरोना मरीजों को शिफ्ट किया जा सकता है। अगर कोरोना मरीजों की संख्या कम होती है तो नए एमसीएच की पहली मंजिल को सामान्य मरीजों को भर्ती करने के लिए उपयोग में लिया जा सकता है।

पूर्व में नए एमसीएच भवन को पुराने एमसीएच भवन से जोड़ने के लिए पहली मंजिल पर प्रस्तावित 16 मीटर लंबा और 4 मीटर चौड़ा काेरिडोर बनाने का काम कोरोना के चलते एक बार अटक गया था। मार्च में नए एमसीएच भवन का निर्माण पूरा हो गया था। इसी दौरान कोरोना वायर का संक्रमण शुरू हो गया। तब अस्पताल के पुराने भवन को कोरोना डेडिकेटेड अस्पताल बना दिया गया।

काम पूरा होने के बाद कोरोना रोगियों को पुराने एमसीएच भवन की पहली मंजिल पर किया जाएगा शिफ्ट

सामान्य ओपीडी व आईपीडी को नए एमसीएच भवन में शिफ्ट कर दिया गया था। इसी दौरान नए एमसीएच भवन में लोगों की आवाजाही ज्यादा होने की वजह से रास्ता रोककर कोरिडोर बनाया जाना संभव नहीं था। तब काेरिडोर का निर्माण शुरू नहीं हाे सका। तब संभावना थी कि गर्मी में कोरोना खत्म हो जएगा। तब कोरिडोर बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

गर्मी बढ़ने पर परिस्थितियां उलट हो गईं। कोरोना वायरस का संक्रमण घटने या खत्म होने की बजाय बढ़ता ही गया। नए एमसीएच भवन में मरीजों की संख्या ज्यादा और जगह कम होने की वजह से ओपीडी व आईपीडी का काम व्यवस्थित नहीं रहा।

जगह कम होने की वजह से वहां फिजिकल डिस्टेंसिंग रखना भी संभव नहीं रहा। तब कोरोना संक्रमण लंबा चलने के दृष्टिगत आईपीडी व ओपीडी को पुराने अस्पताल परिसर में शिफ्ट कर दिया गया। नए एमसीएच भवन में कोरोना डेडिकेटेड अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया।

कोरिडाेर का निर्माण कर रहे ठेकेदार फर्म के प्रतिनिधि अमरीक सिंह के अनुसार कोरिडोर के समीप कोरोना पॉजिटिव वार्ड होने की वजह से कोई मजदूर जल्दी से काम करने काे तैयार नहीं होता। मजदूर कम संख्या में मिलने की वजह से काम की रफ्तार धीमी है। अमरीक सिंह के अनुसार एक महीने में कोरिडोर तैयार कर दिया जाएगा।

अब कोरोना के साथ भविष्य की व्यवस्थाओं पर काम

पीएमओ डॉ. केएस कामरा के अनुसार अब अस्पताल की सामान्य व्यवस्थाएं भी कोरोना के साथ चलती रहेंगी। इसके लिए नए व पुराने एमसीएच भवन का काम दो महीने पहले शुरू करवा दिया गया। ताकि जरूरत पड़ने पर दोनों भवनों का उपयोग किया जा सके। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

डॉ. कामरा के अनुसार नए एमसीएच भवन की क्षमता 150 बेड है। इसमें भूतल पर कोरोना सस्पेक्टेड वार्ड व आईसीयू चल रहा है। पहली मंजिल पर पॉजिटिव रोगियों का वार्ड और आईसीयू है। अब भविष्य की व्यवस्थाओं को देखते हुए नए एमसीएच भवन में ऑक्सीजन पाइप लाइन की फिटिंग का काम शुरू कर दिया गया है, जिसे सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम से जोड़ा जाएगा। कोरोना वार्डों में व्यवस्थाएं बढ़ाई जा रही हैं।

एमसीएच भवन पर 5.64 करोड़ रुपए लागत

नेशनल हेल्थ मिशन ने जिला अस्पताल में 51 हजार वर्ग फुट में नया एमसीएच भवन तैयार किया है। इसमें एक साइड में 40 हजार वर्ग फुट में दो मंजिला नया एमसीएच भवन बनाया गया है। वहीं, पुराने एमसीएच भवन की पहली मंजिला का विस्तार करते हुए उस पर 11 हजार वर्ग फुट में नया भवन तैयार किया गया है। अस्पताल में एमसीएच भवन व 16 हजार वर्ग फुट में 16 नए स्टाफ क्वार्टर बनाने के लिए 7.41 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे। इसमें से 5.64 करोड़ रुपए से 51 हजार वर्ग फुट में एमसीएच भवन बनाया गया है।

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