चातुर्मास / देवशयनी एकादशी आज, श्राद्ध पक्ष के बाद के सभी त्योहार देरी से आएंगे क्योंकि 17 सितंबर को श्राद्ध खत्म होंगे

Devshayani Ekadashi today, all the festivals after Shraddha Paksha will come late as Shraddh ends on September 17
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Devshayani Ekadashi today, all the festivals after Shraddha Paksha will come late as Shraddh ends on September 17

  • श्राद्ध खत्म होने के अगले दिन से अधिक मास शुरू होगा जाे 16 अक्टूबर तक चलेगा, 17 अक्टूबर से शुरू होंगे नवरात्र

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 07:26 AM IST

श्रीगंगानगर. ग्यारस यानी देवशयनी एकादशी से 1 जुलाई काे चातुर्मास का शुभारंभ हाेगा। इस साल आश्विन का महीना अधिकमास का है। इसलिए चातुर्मास 4 के बजाय 5 महीने का होगा। संत समाज की अाेर से 5 महीने का चातुर्मास किया जाएगा। इस काल में नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं होंगे। श्राद्ध पक्ष के बाद के सारे त्योहार देरी से आएंगे।

श्राद्ध पक्ष समाप्त हाेने पर नवरात्र शुरू होते हैं लेकिन इस बार अगले रोज से अधिक मास शुरू हो जाएगा। ज्योतिषविद जगदीश साेनी के मुताबिक हिंदू पंचांग के अनुसार एक माह का लगातार दो बार पड़ना अधिकमास कहलाता है। ऐसा हर तीन साल में होता है। इस बार आश्विन माह अधिकमास पड़ रहा है। उन्हाेंने बताया कि देवशयनी एकादशी से देवप्रबोधिनी एकादशी के बीच के समय को चातुर्मास कहते हैं। इस साल आश्विन माह दो रहेंगे इसलिए चातुर्मास की अवधि भी बढ़ जाएगी। यह चार के बजाय 5 माह का होगा।

श्राद्ध पक्ष के बाद आने वाले सभी तीज त्योहार करीब 20 से 25 दिन देरी से आएंगे 

श्राद्ध पक्ष के बाद आने वाले सभी तीज त्योहार करीब 20 से 25 दिन देरी से आएंगे क्योंकि 17 सितंबर को श्राद्ध खत्म होंगे और अगले दिन से अधिक मास शुरू हो जाएगा यह 16 अक्टूबर तक चलेगा। एक सूर्य वर्ष 365 दिन 6 घंटे का होता है जबकि एक चंद्र वर्ष 354 दिनों का। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिन का अंतर होता है।

ये अंतर हर तीन वर्ष में लगभग एक माह के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अतिरिक्त आता है। इसे अधिकमास कहा जाता है। इसको लेकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण यह है कि यदि अधिकमास नहीं होता तो तीज- त्योहारों की व्यवस्था बिगड़ जाती। अधिकमास होने से ही सभी त्योहार सही समय पर मनाए जाते हैं। इसलिए अधिकमास का विशेष महत्व माना गया है।

इस साल 17 अक्टूबर से नवरात्र का शुभारंभ होगा। इस प्रकार से श्राद्ध पक्ष समाप्ति और नवरात्र शुभारंभ के बीच एक महीने का अंतराल रहेगा। इसके बाद दशहरा 26 अक्टूबर और दीपावली 14 नवंबर को मनाई जाएगी। 25 नवंबर को देव उठनी एकादशी होगी और इसी दिन चातुर्मास का समापन होगा।

चतुर्मास में संत एक ही स्थान पर रुककर तप और ध्यान करते हैं। क्योंकि वर्षा ऋतु में नदी-नाले उफान पर होते हैं तथा कई छोटे-छोटे कीट उत्पन्न हो जाते हैं। इस समय में चलने-फिरने से इन जीवाें को क्षति पहुंचती है। 

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