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पर्व:काेराेनाकाल में भाई-बहन का प्यार सलामत रहे इसलिए ऑनलाइन भेज रहे राखियां-गिफ्ट

श्रीगंगानगगर12 दिन पहले
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  • कंपनियां उपहार के साथ एक हजार रुपए में भाई तक राखी पहुंचाने का ऑफर दे रही हैं

कोरोना काल में बाजार का जाेर ऑनलाइन राखियों पर भी नजर आ रहा है। ऑनलाइन मार्केटिंग करने वाली कंपनियां आकर्षक गिफ्ट पैक का भी ऑफर कर रही हैं। हालांकि कि इस बार राखियों के दाम इजाफा हुआ है। क्योंकि लोग बाजार में कम निकल रहे हैं और बहुत से लोग दुकानों से सामान खरीदने में भी परहेज कर रहे हैं।

ऐसे में ऑनलाइन राखियों का बाजार गर्म है। कोरोना वायरस के कारण लोग राखी खरीदने और भेजने के लिए काेरियर और पोस्‍ट ऑफिस की सुविधा लेने से भी बच रहे हैं। ऐसे में ऑनलाइन शॉपिंग का विकल्‍प उनके सामने बेहतर है। ऑनलाइन बाजार की कंपनियां तमाम उपहार के साथ एक हजार रुपए में भाई तक राखी पहुंचाने का ऑफर दे रही है। ऑनलाइन बाजार में 149 से 999 रुपए तक की राखियां उपलब्ध हैं। शंकर काॅलाेनी निवासी मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि उन्होंने छत्तीसगढ़ में अपने भाई को एक ऑनलाइन कंपनी के माध्यम से राखी भेजी है। चाकलेट के साथ भेजी गई दो राखियों की क़ीमत के लिए संबंधित संबंधित कंपनी ने 450 रुपए वसूल किए हैं।

इस बार भाई बहन को नगदी देने की बजाए खाते में जमा करवाएंगे रुपए: इस बार भाई बहनों को राखी बांधने के दौरान नगदी देने की बजाए ऑनलाइन रुपए डिपॉजिट करेंगे। ताकि बहनों के हाथ इन नोटों पर न लगें। संक्रमण का खतरा भी न रहे। पी ब्लॉक निवासी अरुण शर्मा का कहना है कि वे इस बार बहन को नगदी रुपए नहीं देंगे। इस दिन बहन के खाते में रुपए जमा करवाएंगे, ताकि बहन की जरूरत के समय काम भी आ सकें।

ऑनलाइन राखी खरीदने व भेजने दोनों में लाभ है, 60 फीसदी तक खरीदारी ऑनलाइन ही हाे रही

ऑनलाइन बुकिंग में हर प्रकार की डिजाइनर राखियां उपलब्ध हैं। इंटरनेट पर संबंधित साइट पर जाएंगे तो राखी के कई डिजाइन और रेट डिसप्ले होंगे, जिन्हें अपनी पसंद और बजट के अनुसार चुनकर आप बुक करा सकते हैं। रिया कहती हैं कि ऑनलाइन राखी खरीदने और भेजने दोनों में लाभ है। एक तो आपको बाजार में राखी के लिए भटकना नहीं पड़ता।

दूसरा राखी को लिफाफे में भरना और फिर काेरियर या फिर पोस्ट ऑफिस जाकर पोस्ट करने की समस्या नहीं होती। कोरोना काल में भीड़ में भी नहीं जाना पड़ेगा। राखी के साथ तिलक का सामान, राखी थाली, बुके और मिठाई के रूप में चॉकलेट आदि भी भेज सकती हैं।

सामान के अनुसार कोरियर चार्ज और कीमत आपको भुगतान करनी होगी।इसमें 50 फीसदी तक कमी आई है। बार भाइयों की राखी हो या बहनों का गिफ्ट, सब कुछ ऑनलाइन घर बैठे ही पहुंचाए जा रहे हैं। ताकि एक दूसरे काे संक्रमण से बचाया जा सके।

राखी काराेबारियाें की मानें तो कोरोना वायरस की वजह से इस बार बाजार में खरीदारी करने ज्यादा लोग नहीं आ रहे। ऐसे में रीटेल दुकानदारों ने भी बिक्री के लिए ऑनलाइन माध्यम का ही सहारा लेना शुरू कर दिया है। इस बदलाव का असर यह हुआ है कि इस बार त्योहार पर ऑनलाइन बिक्री 60 फीसदी तक हो रही है जबकि, पारंपरिक बाजार में इसमें 50 फीसदी तक कमी आई है। बार भाइयों की राखी हो या बहनों का गिफ्ट, सब कुछ ऑनलाइन घर बैठे ही पहुंचाए जा रहे हैं। ताकि एक दूसरे काे संक्रमण से बचाया जा सके।

भद्रा के कारण बहनें कल सुबह 9:31 बजे बाद बांधेंगी राखी

पूर्णिमा रविवार रात 9:30 बजे शुरू हाेकर सोमवार रात 9.28 बजे समाप्त होगी
रक्षाबंधन का पर्व इस बार काेराेना काल में 3 अगस्त को मनाया जाएगा। सुबह भद्रा के कारण राखी बांधने की शुरुआत 9:31 बजे बाद होगी। पूरे दिन आनंद योग में राखी बांधी जा सकेगी। इस दिन श्रावण सोमवार व पूर्णिमा का योग इसे खास बना रहा है। जो बहनें कोरोना संक्रमण के कारण रक्षाबंधन के लिए भाई के यहां नहीं जा पा रहीं, वे घर पर वैदिक राखी बनाकर भगवान श्रीकृष्ण को बांध सकती हैं।

रक्षाबंधन श्रावण शुक्ल पूर्णिमा काे मनाया जाता है। उदयात तिथि के अनुसार पूर्णिमा 3 अगस्त को रहेगी। पंडित कालूराम गाैड़ बताते हैं कि पूर्णिमा की शुरुआत रविवार रात 9.30 बजे से हो जाएगी जाे सोमवार रात 9:28 पर पूर्णिमा समाप्त होगी। इस दिन सोमवार का संयोग होने के साथ पूरे दिन आनंद योग भी रहेगा। इसलिए इस बार रक्षाबंधन पर्व शुभ संयोगों में मनेगा। सुबह भद्रा रहेगी, इसलिए सुबह 9:31 के बाद ही राखी बंधेगी और अन्य शुभ काम होंगे।
ब्राह्मणों का उपाकर्म भी होगा

पंचांगों के अनुसार यजुर्वेदीय व ऋग्वेदीय ब्राह्मणों के उपाकर्म में श्रवण नक्षत्र मुख्य है। पूर्णिमा को श्रवण नक्षत्र सुबह 8 बजे से रहेगा। इस दिन ऋग्वेदी और यजुर्वेदी का उपकर्म एक ही दिन होगा।
ऐसे बनाएं वैदिक रक्षासूत्र

बहनें अपने भाई के लिए घर पर ही वैदिक राखी बनाकर बांध सकती हैं। वैदिक राखी बनाने के लिए दूर्वा घास यानी कि दूब जिसे आप घास भी कहते हैं। अब जितनी राखी बनानी है उसके अनुसार थोड़े से चावल के साबुत दानों को हल्दी लगाकर पीला कर लें। चंदन, सरसों और केसर एवं रेशम का धागा ये पांच चीजें इकट्ठी कर लें। दूर्वा, चावल, केसर, चंदन, सरसों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर एक पीले रंग के रेशमी कपड़े में बांध लें।

यदि इसकी सिलाई कर दें तो यह और भी अच्छा रहेगा। इन पांच पदार्थों के अलावा कुछ राखियां हल्दी, कौड़ी व गोमती चक्र से भी बना सकते हैं। रेशमी कपड़े में लपेटकर बांधने या सिलाई करने के बाद इसे कलावे (मौली) में पिरो दें, आपकी वैदिक राखी बनकर तैयार हो गई। वहीं दूर्वा, अक्षत, केसर, चंदन, सरसों से बना रक्षासूत्र भी शुभ व सौभाग्यशाली माना जाता है।

वैदिक राखी बांधने का वैदिक मंत्र

  • येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
  • तेन त्वां अभिबद्धनामि रक्षे मा चल मा चल।।

रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त

सुबह 9:31 से 11 बजे तक और दोपहर 2 से शाम 7 बजे तक का शुभ मुहूर्त रहेगा।

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